चावल अनुसंधान की वार्षिक समूह बैठक का उद्घाटन

3 अप्रैल, 2016, रायपुर, छत्‍तीसगढ़

छत्‍तीसगढ़ के माननीय राज्‍यपाल श्री बलरामजी दास टंडन ने आज इंदिरा गांधी कृषि विश्‍वविद्यालय, रायपुर में 51वीं वार्षिक चावल अनुसंधान समूह बैठक का उद्घाटन किया। अपने सम्‍बोधन में माननीय राज्‍यपाल महोदय ने चावल में किस्‍म सुधार और अच्‍छी चावल किस्‍मों, जिन्‍हें पानी की कमी वाली परिस्थितियों में भी बोया जा सकता है,  के विकास के लिए व्‍यापक विचार विमर्श करने का आह्वान किया । उन्‍होंने न्‍यूट्रास्‍यूटिकल्‍स चावल पर बल दिया और बहु फसलों द्वारा चावल खेती की लाभप्रदता को बढ़ाने की जरूरत तथा साथ ही मात्स्यिकी और मुर्गी पालन क्षेत्र के साथ इसे जोड़ने की आवश्‍यकता बताई।

Annual Rice Research Group Meeting Inaugurated

श्री ब्रजमोहन अग्रवाल, माननीय कृषि मंत्री, छत्‍तीसगढ़ ने चावल के मूल्‍य वर्धित उत्‍पादों पर तथा साथ ही अन्‍य फसलों को उगाने के लिए एक महीने से अधिक समय के लिए चावल की फसल में खडे पानी का सही इस्‍तेमाल करने पर ध्‍यान केन्द्रित करने पर बल दिया।

डॉ. त्रिलोचन महापात्र, सचिव, डेयर एवं महानिदेशक, भाकृअनुप ने पिछले दो वर्षों के दौरान  सूखा परिस्थितियां बने रहने के बावजूद >100 mt का स्थिर चावल उत्‍पादन हासिल करने और >10 mt का  निर्यात करके प्रतिवर्ष 40,000 करोड़ रूपये अर्जित करने में अखिल भारतीय समन्वित चावल अनुसंधान परियोजना के प्रयासों की सराहना की। साथ ही उन्‍होंने कहा कि कुपोषण को लक्षित करते हुए पोषणिक सुरक्षा हासिल करने में किए गए अनुसंधान प्रयासों में अखिल भारतीय समन्वित चावल अनुसंधान परियोजना के माध्‍यम से उच्‍च प्रोटीन युक्‍त तथा उच्‍च जिंक युक्‍त चावल की दो किस्‍मों को जारी करना इसका प्रत्‍यक्ष उदाहरण है।

डॉ. मैथ्‍यु मोरेल, महानिदेशक, अंतर्राष्‍ट्रीय चावल अनुसंधान संस्‍थान ने चावल किसानों के लाभ के लिए आईआरआरआई तथा भारत के बीच लंबे समय से चली आ रही भागीदारी को याद किया।

डॉ. एस.के. पाटिल, कुलपति, इंदिरा गांधी कृषि विश्‍वविद्यालय, रायपुर ने छत्‍तीसगढ़ और देशभर में लाखों किसानों की आजीविका में चावल फसल के महत्‍व पर प्रकाश डाला।

डॉ. वी. रविन्‍द्र बाबू, निदेशक, भाकृअनुप – भारतीय चावल अनुसंधान संस्‍थान, हैदराबाद ने कहा कि किसी एक फसल के लिए सबसे बड़ी नेटवर्क परियोजना होने के कारण अखिल भारतीय समन्वित चावल अनुसंधान परियोजना में किसानों के लाभ के लिए अनुसंधान गतिविधियों के समन्‍वय के अधिदेश वाले 45 वित्‍त पोषित केन्‍द्र, राज्‍य कृषि विश्‍वविद्यालय, कृषि विभाग और बीज कम्‍पनियां शामिल हैं ।

इस अवसर पर विशिष्‍ट अतिथिगणों द्वारा चार प्रकाशनों यथा ‘’ 50 ईअर्स ऑफ एआईसीआरआईपी – ए वे फारवर्ड, आईआईआरआर, हैदराबाद’’, चेन्जिस इन  राइस डीजिज इन इंडिया – एन एनालिसिस ऑफ प्रोडक्‍शन चेन्जिस, आईआईआरआर, हैदराबाद’’, कैटालॉग ऑफ इन्‍डीजीनियस जर्मप्‍लाज्‍म, आईजीकेवी, रायपुर’’ तथा राइस वैरायटीज डेवलप्‍ड एंड रीलिज्‍ड बॉय आईजीकेवी, रायपुर’’ का विमोचन किया गया।

इस कार्यक्रम में लगभग चार सौ चावल वैज्ञानिकों ने भाग लिया।

(स्रोत : भाकृअनप – भारतीय चावल अनुसंधान संस्‍थान, हैदराबाद)