भारत में दलहन में आत्‍मनिर्भरता हासिल करने की दिशा में रणनीतिपरक कार्यशाला

7-8 अप्रैल, 2016, नई दिल्‍ली

राष्‍ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी (NAAS) के तत्‍वावधान में दिनांक 7-8 अप्रैल, 2016 को एनएएससी परिसर, नई दिल्‍ली में ‘भारत में दलहन में आत्‍मनिर्भरता हासिल करने की दिशा में’ एक रणनीतिपरक कार्यशाला का आयोजन किया गया।

Strategy Workshop - Towards Achieving Self-sufficiency of Pulses in IndiaStrategy Workshop - Towards Achieving Self-sufficiency of Pulses in IndiaStrategy Workshop - Towards Achieving Self-sufficiency of Pulses in India

डॉ. आर.एस. परोदा, अध्‍यक्ष, तास (TAAS) ने मुख्‍य अतिथि के रूप में कार्यशाला का उद्घाटन किया जबकि प्रो. रमेश चन्‍द, सदस्‍य (कृषि नीति आयोग) ने कार्यक्रम की अध्‍यक्षता की।

Strategy Workshop - Towards Achieving Self-sufficiency of Pulses in IndiaStrategy Workshop - Towards Achieving Self-sufficiency of Pulses in IndiaStrategy Workshop - Towards Achieving Self-sufficiency of Pulses in IndiaStrategy Workshop - Towards Achieving Self-sufficiency of Pulses in India

डॉ. एस. अय्यप्‍पन, अध्‍यक्ष, राष्‍ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी (NAAS); डॉ. त्रिलोचन महापात्र, सचिव, डेयर एवं महानिदेशक, भाकृअनुप; डॉ. आर.बी. सिंह, इससे पूर्व अध्‍यक्ष, राष्‍ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी (NAAS) ; श्री एस.के. पटनायक, सचिव, डीएसी एवं एफडब्‍ल्‍यू; डॉ. श्‍याम बहादुर खडका, भारत में एफएओ के प्रतिनिधि; डॉ. डेविड बर्जविन्‍सन, महानिदेशक, इक्रीसेट; श्री ए.के. श्रीवास्‍तव, सचिव, एमएफपीआई; डॉ. पी.के. जोशी, निदेशक, आईएफपीआरआई, दक्षिण एशिया; डॉ. गुरबचन सिंह, अध्‍यक्ष, कृषि वैज्ञानिक चयन मंडल; एवं डॉ. जीत सिंह संधू, उप महानिदेशक (फसल विज्ञान), भाकृअनुप ने विभिन्‍न विषयों पर अपने विचार प्रकट किए और विचार विमर्श किया। चर्चा तथा तकनीकी आदान के आधार पर, सन् 2020 तक देश में दलहन में आत्‍मनिर्भरता हासिल करने हेतु एक कार्रवाई योजना तैयार की गई।

इस अवसर पर दलहन की खेती करने वाले पांच प्रगतिशील किसानों नामत: श्री उदयवीर; श्री कृष कुमार; श्री शैलेन्‍द्र सिंह; श्री राम प्रकाश; एवं श्री विजय सिंह को अपने खेतों पर प्रमुख कृषि फसलों के रूप में दलहन की खेती करने के उनके प्रयासों के लिए मुख्‍य अतिथि द्वारा सम्‍मानित किया गया।

दो दिवसीय विस्‍तृत चर्चा के उपरान्‍त निम्‍नलिखित सिफारिशों को लागू करके तथा प्राथमिकता देकर दलहन में आत्‍मनिर्भरता हासिल करने हेतु एक कार्रवाई योजना के साथ साथ एक रोडमैप भी तैयार किया गया। सिफारिशों में शामिल हैं : उच्‍चतर उत्‍पादकता के लिए अनुसंधान रिस्‍ट्रक्‍चरिंग पौधा किस्‍में; दलहन प्रजनन कार्यक्रमों का आधुनिकीकरण; पराजीनी प्रौद्योगिकी के माध्‍यम से आनुवंशिक लाभ को सहायता करना; सुपर नोडुलेटिंग पौधा किस्‍मों का विकास करके जैविक नाइट्रोजन निर्धारण को बढ़ाना; फसलचक्र सघनता को बढ़ाने के लिए अल्‍पावधि वाली किस्‍मों का प्रजनन; अरहर में संकर प्रौद्योगिकी का उपयोग करना; तथा संरक्षित कृषि । नीतिगत सिफारिशों में शामिल है : दलहन पर एक अलग मिशन तथा राष्‍ट्रीय दलहन बोर्ड की स्‍थापना; छ: प्रमुख दलहन उत्‍पादक राज्‍यों पर फोकस करना; मजबूत खरीद नेटवर्क के साथ उच्‍चतर न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य देकर दलहन उत्‍पादकों को प्रोत्‍साहित करना; पीडीएस के माध्‍यम से बीपीएल परिवारों को रियायती दरों पर दालें उपलब्‍ध कराना; स्‍कूलों में मिड डे मील योजना में दाल आधारित स्‍नैक्‍स/खाद्य को शामिल करना; दलहन जैसी  जोखिम युक्‍त फसलों को कवर करने के लिए फसल बीमा योजना में तेजी लाना; तथा दलहन में अनुसंधान व विकास के लिए सरकार की वित्‍तीय सहायता में वृद्धि करना। कुछ सामान्‍य सिफारिशें भी की गईं जिनमें शामिल है : आईआईपीआर तथा अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजनाओं सहित राष्‍ट्रीय अनुसंधान प्रणाली के अनुसंधान व विकास को मजबूती प्रदान करना; अनुसंधान व विकास युक्ति को कहीं अधिक दलहन केन्द्रित बनाना; दलहन उप-क्षेत्र में सार्वजनिक निजी भागीदारी ( PPP) को बढ़ावा देना; 10 वर्ष से अधिक पुरानी दलहन किस्‍मों को नई किस्‍मों से बदलना और एसआरआर को >30% तक बढ़ाना; फार्म मशीनीकरण को बढ़ावा देना व समेकित युक्ति द्वारा खरपतवार नियंत्रण करना; सूक्ष्‍म सिंचाई और समेकित प्रधान मंत्री सिंचाई योजना के माध्‍यम से प्रभावी जल प्रबंधन करना; सिंचित इलाकों में अनाज के तहत कुछ खेती क्षेत्रफल को दलहन में बदलना; पराजीनी दलहन फसलों को प्रोत्‍साहित करना; आईसीटी के माध्‍यम से राष्‍ट्रीय व अंतर्राष्‍ट्रीय बाजारों को समेकित करने की जरूरत; कस्‍टम हायरिंग के माध्‍यम से बढ़ा हुआ फार्म मशीनीकरण; जैव उर्वरकों और जैव कीटनाशकों की बढ़ी हुई उपलब्‍धता के साथ बीज प्रणाली को मजबूती प्रदान करना; सोयाबीन प्रोटीन को प्रोत्‍साहित करना; दलहन में जैव फार्टीफिकेशन और मूल्‍य वर्धन को प्राथमिकता दी जाए; तथा देश में दलहन में आत्‍मनिर्भरता हासिल करने हेतु सभी हितधारकों के बीच समन्‍वय और अभिसार के साथ मिशन मोड युक्ति की नितांत जरूरत ।

इस कार्यशाला में कुल 130 से भी अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया जिनमें देश के प्रतिष्ठित दलहन अनुसंधानकर्मी, नीति निर्माता, प्रशासक एवं शिक्षाविद् शामिल थे। कार्यशाला को छ: विशिष्‍टीकृत विषयों पर आयोजित किया गया जिनमें आनुवंशिक संवृद्धि, उत्‍पादकता संवृद्धि, स्‍मार्ट कृषि, कटाई एवं कटाई उपरांत प्रबंधन, व्‍यापार एवं नीति, नए आयाम और भावी दिशा जैसे विषय शामिल थे।

(स्रोत : राष्‍ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी (NAAS) )