राष्‍ट्रीय अंगूर अनुसंधान केन्‍द्र का 20वां स्‍थापना दिवस

18 जनवरी, 2016, पुणे

राष्‍ट्रीय अंगूर अनुसंधान केन्‍द्र के 20वें स्‍थापना दिवस के कार्यक्रम में केन्‍द्र द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों और किस्‍मों का खेत प्रदर्शन करने में राष्‍ट्रीय अंगूर अनुसंधान केन्‍द्र के साथ सहयोग करने वाले दो प्रगतिशील किसानों श्री सुभाष आर्वे (अध्‍यक्ष, एमआरडीबीएस) तथा श्री शिवाजीराव बास्‍ते को सम्‍मानित किया गया। इस अवसर पर श्री सुभाष आर्वे ने ‘’भारत में शुष्‍क अंगूर उद्योग की वर्तमान स्थिति और भविष्‍य’’ पर एक तकनीकी वार्ता प्रस्‍तुत की।

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कार्यक्रम के मुख्‍य अतिथि श्री दन्‍यानेश्‍वर फडटरे (सेवानिवृत सतर्कता संयुक्‍त आयुक्‍त, महाराष्‍ट्र) ने देश के सम्‍यक विकास के लिए कृषि में ग्रामीण युवाओं की रूचि को बनाए रखने और बाजार तथा उपभोक्‍ता की मांग के साथ सामंजस्‍य बनाने के महत्‍व पर बल दिया। डॉ. पी.एस. मिन्‍हास, निदेशक, भाकृअनुप – एनआईएएसएम, बारामती ने अंगूरों में मृदीय दबाव के प्रबंधन में एनआईएएसएम और राष्‍ट्रीय अंगूर अनुसंधान केन्‍द्र के बीच सहयोगात्‍मक कार्य बढ़ाने की जरूरत बताई।

डॉ. जय गोपाल, निदेशक, भाकृअनुप – प्‍याज एवं लहसुन अनुसंधान निदेशालय, पुणे ने वांछित गुणों वाली अंगूर किस्‍मों के विकास के लिए प्रजनन की महत्‍ता पर प्रकाश डाला। डॉ. के.वी. प्रसाद, निदेशक, भाकृअनुप – पुष्‍पविज्ञान अनुसंधान निदेशालय, पुणे ने कहा कि अंगूर के जूस में सजावटी फसलों से प्राकृतिक रंगों और स्‍वाद को मिलाने की संभावना है। राष्‍ट्रीय अंगूर अनुसंधान केन्‍द्र की पत्रिका ‘अंगूरी’ का एक विशेष अंक जारी किया गया जिसमें राष्‍ट्रीय अंगूर अनुसंधान केन्‍द्र के फोटोग्राफ और स्‍थापना के यादों को दर्शाया गया है।

(स्रोत : भाकृअनुप - राष्‍ट्रीय अंगूर अनुसंधान केन्‍द्र, पुणे)