भाकृअनुप- भाकृअनुसं, नई दिल्ली का 55वां दिक्षांत समारोह

माननीय केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री राधा मोहन सिंह ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली के 55वें दीक्षांत में सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि भाकृअनुप - भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली द्वारा पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों में कृषि का निरंतर विकास हुआ है। उन्होंने कहा कि देश में पूसा के अलावा 2 और भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान झारखण्ड और असम में खोले जा चुके हैं। मंत्री महोदय ने कहा कि यह वर्ष 2016 में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान ने चावल, गेहूँ, सरसों एवं दलहनी फसलों की कुल 11 प्रजातियों को विमोचित किया है। मंत्री महोदय ने कहा है कि दूसरी हरित क्रांति लाने के लिए कृषि में प्रशिक्षित छात्र-छात्राओं को आगे आना चाहिए और उन्हें अपना अर्जित ज्ञान और कौशल कृषि एवं किसान कल्याण को समर्पित करना चाहिए।

भाकृअनुप- भाकृअनुसं, नई दिल्ली का 55वां दिक्षांत समारोहभाकृअनुप- भाकृअनुसं, नई दिल्ली का 55वां दिक्षांत समारोहभाकृअनुप- भाकृअनुसं, नई दिल्ली का 55वां दिक्षांत समारोह

कृषि मंत्री ने कहा कि इस संस्थान द्वारा विकसित प्रजातियों के प्रचलन में आने से देश की कृषि व्यवस्था में सार्थक एवं गुणात्मक परिवर्तन देखने को मिला है। जहां पहले खाद्यान्न के लिए दूसरे देशों के ऊपर निर्भर रहना पड़ता था वहीं आज हम खाद्यान्न आपूर्ति कर दूसरे देशों की मदद कर रहे हैं। कृषि मंत्री ने इस उपलब्धि के लिए देश के कृषि वैज्ञानिकों, विशेषकर इस संस्थान के वैज्ञानिकों को बधाई दी।

श्री सिंह ने कहा कि भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित गेंहू की किस्मों को 10 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्रफल में उगाकर, 50 मिलियन टन गेहूं का उत्पादन किया जा रहा है। लगभग 1 लाख करोड़ रुपए के कृषि निर्यात में बासमती चावल का योगदान लगभग 22 हजार करोड़ का है। इसमें पूसा संस्थान द्वारा विकसित किस्मों का योगदान लगभग 90 प्रतिशत है। वर्ष 2016 में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान ने चावल, गेहूं, सरसों एवं दलहनी फसलों की कुल 11 प्रजातियों को विमोचित किया है। संस्थान द्वारा विकसित कनोला गुणवत्ता वाली सरसों की प्रजाति पूसा डबल जीरो सरसों 31, देश की पहली उच्च गुणवत्ता वाली किस्म है जिसके तेल में पाये जाने वाले ईरुसिक अम्ल की मात्रा 2 प्रतिशत से कम तथा खली में पाये जाने वाली ग्लूकोसिनोलेट्रस की मात्रा 30 पी.पी.एम. से कम है जो मानव एवं पशु स्वास्थ्य के अनुकूल है। उन्होंने कहा कि भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में अत्याधुनिक 'फिनोमिक्स सुविधा' केन्द्र स्थापित किया गया है जो कि विभिन्न प्रकार के वातावरण संबंदित तनावों के अध्ययन के लिए उपयोगी है।

उन्होंने कहा कि भाकृअनुप – भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा, नई दिल्ली ने एक ऐसी नवीन, पर्यावरण अनुकूल और आर्थिक दृष्टि से लाभकारी अपशिष्टजल उपचार प्रौद्योगिकी विकसित की है जिससे 1 प्रतिशत से भी कम ऊर्जा व 50-60 प्रतिशत कम पूंजी और परिचालन लागत से मल-जल को आसानी से प्रदूषण मुक्त कर उसे कृषि उपपोगी बनाया जा सकता है।

कृषि मंत्री ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में कृषि को बढ़ावा देने एवं खाद्य उत्पादन के साथ ग्रामीण आजीविका सुदृढ़ करने के लिए वभिन्न कृषि एवं किसान कल्याण योजनाओं की शुरूआत की गई है। इनमें से कुछ प्रमुख योजनाएं - प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, कृषि मशीनीकरण मिशन, राष्ट्रीय कृषि विपणन, ग्रामीण भंडार योजना एवं मृदा स्वास्थ्य कार्ड जैसी योजनाएं हैं। ये योजनाएं किसानों की आय दुगुनी करने में सहायक सिद्ध होंगी। उन्होंने बताया कि संस्थान द्वारा चालित “मेरा गाँव मेरा गौरव” कार्यक्रम से वैज्ञानिकों व किसानो के बीच सीधा संपर्क हो सकेगाI पूसा संस्थान द्वारा दिल्ली के आसपास लगभग 600 गांवों का चयन कर इस कार्यक्रम को प्रभावी बनाते हुए कृषकों को लाभान्वित किया जा रहा हैI इसके साथ ही श्री राधामोहन सिंह जी ने घोषणा की कि डा. राजेन्द्र प्रसाद जी के सम्मान में प्रति वर्ष 3 दिसम्बर को कृषि शिक्षा दिवस के रूप में मनाया जायेगा।

पूर्वोत्तर राज्यों में कृषि को बढ़ावा देने के लिए मंत्री महोदय द्वारा पी. एच. डी. में पूर्वोत्तर राज्य से आए सर्वोत्तम विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किया जाएगा। इस वर्ष पचपनवें दीक्षान्त समारोह में पहली बार इस पुरस्कार को उन्होंने डा. सुजन मजूमदार को प्रदान किया। आखिर में, कृषि मंत्री ने सभी विद्यार्थियों, अभिभावकों, शिक्षकों एवं दीक्षांत समारोह से जुड़े सभी लोगों का अभिनंदन किया और उन्हें बधाई दी।

दीक्षान्त समारोह का उद्घाटन करते हुए पूसा संस्थान की निदेषक डा0 रवीन्द्र कौर ने डिग्री प्राप्त करने वाले 111 पी.एच.डी.,112 स्नातकोत्तर व 8 एमटेक छात्र-छात्राओं को जीवन में जिम्मेदारी के साथ काम करने हेतु आह्वाहन किया।

इस अवसर पर डॉ. त्रिलोचन महापात्र, सचिव, डेयर एवं महानिदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्, डॉ. गुरबचन सिंह, चेयरमैन, कृषि वैज्ञानिक चयन बोर्ड एवं विभिन्न विषयों के प्राध्यापकों के अतिरिक्त अन्य गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद थेI

समारोह के दौरान संस्थान की निदेशक डॉ. रविन्द्र कौर ने जानकारी दी कि वर्ष 2016 के दौरान संस्थान ने विभिन्न फसलों (जैसे गेहूं, धान, सरसों एवं दलहन ) की 13 नई किस्में विकसित की हैंI इन किस्मों में धान की लीफ ब्लास्ट प्रतिरोधी (पूसा बासमती 1637) , केनोला की गुणवत्ता वाला सरसों (पूसा डबल ज़ीरो सरसों 31); चने की पूसा 3043; मूंग की 1371 एवं मसूर की (L- 4714) किस्में सम्मिलित हैं I इसके अतिरिक्त गेहूं की पूसा उजाला (HI 1605) एवं पूसा तेजस (HI 8759) क्षेत्रीय स्टेशन इंदौर द्वारा चिन्हित की गई और सिंचित अवस्था में मध्य क्षेत्र के लिए एवं असिंचित अवस्था में उपद्वीप क्षेत्र के लिए विमोचित की गयी I ये किस्में अधिक उत्पादकता, बेहतर गुणवत्ता के साथ-साथ जैविक एवं अजैविक दबाव के प्रति प्रतिरोधी हैंI इनके अतिरिक्त क्षेत्रीय स्टेशन शिमला द्वारा चिन्हित गेहूं की किस्म (HS 562) भी सी वी आर सी द्वारा उत्तरी पर्वतीय क्षेत्र के लिए समय से बुआई के लिए विमोचित की गई है I पूसा द्वारा सब्जियों की 5 नई किस्मों का विमोचन किया गया इनमें लौकी की ‘पूसा संतुस्टी’ सब्जी मटर की ‘पूसा श्री’, कद्दू की ‘पूसा सब्जी पेठा’ , बैंगन की ‘DBL-2’, गोभी की ‘पूसा अश्वनी’ किस्में सेंट्रल सब-कमेटी ऑन क्रॉप स्टैण्डर्ड द्वारा विभिन्न क्षेत्रों के लिए अधिसूचित एवं विमोचित की गयी इसके अतिरिक्त अन्य सब्जियों की 14 किस्में जिनमें प्याज़ ‘पूसा रिद्धि’, गुछे वाली प्याज़ ‘पूसा सौम्या’, बाकले की ‘पूसा उदित’, चप्पन कद्दू की ‘पूसा पसंद’, खीरे की ‘पूसा बरखा’, धारीदार तोरई की ‘पूसा नूतन’, गोभी की ‘पूसा कार्तिकी’, गाजर की ‘पूसा रुधिरा’ एवं ‘पूसा असिता’, मूली की ‘पूसा श्वेता’, ‘पूसा जामुनी’ एवं ‘पूसा गुलाबी’, करेले कि ‘पूसा रसदार’, ‘पूसा पूर्वी’, एवं गाजर की संकर किस्म ‘पूसा वसुधा’ आदि दिल्ली एवं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लिए अधिसूचित की गयी I खाद्यान्न एवं सब्जियों के साथ पुष्पीय फसलों में ग्लेडियोलस की पूसा सिंदूरी, गुलदाउदी की पूसा गुलदस्ता एवं गेंदे की पूसा बहार किस्मों को विकसित किया गया I गुलाब की तीन संकर किस्में भी विकसित की गयी I उन्होंने बताया पौधों के फिनोटाइप व जीनोटाइप अंतर को कम करने के लिए परिभाषित पर्यावरण अवस्था में जननद्रव्य की अधिक मात्रा का गैर विनाशकारी व परिशुद्ध वर्णन तथा अजैविक तनाव प्रति सहिष्णुता विकसित करने हेतु पूसा संस्थान ने एक अत्याधुनिक स्वचालित अधिक प्रवाह क्षमता वाली पौध फीनोमिक्स सुविधा स्थापित की गई है I डॉ. रविन्द्र कौर ने जानकारी दी कि निकट भविष्य में पानी की कमी और जलवायु परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, संस्थान ने ऊर्जा सुरक्षा के लिए पर्यावरण के अनुकूल शून्य ऊर्जा अपशिष्ट जल उपचार प्रौद्योगिकी का विकास किया है जिसमें उत्तर प्रदेश मथुरा के जिले में प्रतिदिन 75,000 लीटर सीवेज के पानी को शुद्ध किया जाता हैI यह पहला पारिस्थितिकी के अनुकूल कचरे से जल उपचार संयंत्र उत्तर प्रदेश के फराह में पंडित दीन दयाल उपाध्याय धाम में निर्माणाधीन हैI विभिन्न शोध विकास के साथ साथ संस्थान प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन पर भी उतना ही ध्यान दिया गया है। आईएआरआई की उत्कृष्टता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त है और विश्व के बहुत से देश संस्थान द्वारा विकसित मॉडल को अपनाना चाहते हैंI आईएआरआई, अफगानिस्तान राष्ट्रीय कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (ANASTU), कंधार, अफगानिस्तान, भारत-म्यांमार उन्नत कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा केंद्र , येज़िन कृषि विश्वविद्यालय के साथ सक्रिय भागीदारी निभाई जा रही है I इसी श्रृंखला में संस्थान ने नेब्रास्का लिंकन, संयुक्त राज्य अमेरिका के विश्वविद्यालय के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया गया है जिसके अंतर्गत सूखा प्रबंधन के लिए देश भर में एक चेतावनी प्रणाली विकसित की जा सके ।

संस्थान के अधिष्ठाता एवं संयुक्त निदेशक (शिक्षा) डॉ. आर.के.जैन ने जानकारी दी कि पचपनवें दीक्षांत समारोह पर इस वर्ष भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के कुल 231 विद्यार्थियों में 13 विदेशी विद्यार्थी हैं जिन्हें डिग्री प्रदान की गयीं I इस वर्ष 112 स्नातकोत्तर, 111 शोधार्थियों एवं 8 छात्रों को एमटेक की डिग्री प्रदान की गई I इसके अतिरिक्त विभिन्न मेडल जैसे सर्वश्रेष्ठ छात्र पुरस्कार एवं 5 अन्य प्रतिष्ठित पुरस्कार जैसे श्री हरि कृष्ण शास्त्री मेमोरियल पुरस्कार, हूकर पुरस्कार और बेस्ट टीचर अवार्ड से विजेताओं को सम्मानित किया गया।