मत्स्य प्रग्रहण में सहायक एमकृषि मात्स्यिकी ऐप - एमकृषि® मात्स्यिकी – एक नीली समुद्री नवोन्मेष

भाकृअनुप- केन्द्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान, राष्ट्रीय समुद्री सूचना सेवा केन्द्र (आईएनसीओआईएस), हैदराबाद तथा टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) नवोन्मेष प्रयोगशाला – मुम्बई, के संयुक्त प्रयास द्वारा एमकृषि® मात्स्यिकी मोबाइल ऐप का विकास किया गया है। यह ऐप सहभागी संगठनों के सर्वश्रेष्ठ विशेषज्ञों के बहु-आयामी अनुसंधान तथा फील्ड वर्क पर आधारित है।

आईएनसीओआईएस संभावित मत्स्य पालन क्षेत्र (पीएफजेड), एनओएए उपग्रहों से प्राप्त डाटा दूर संवेदी सूचनाओं पर आधारित मछलियों के झुंड की भविष्यवाणी, सतह का तापमान और विभिन्न मछली किस्मों के भोजन का निर्माण करने वाले समुद्री पादप प्लवक की उपस्थिति जैसी सूचनाओं को एकत्रित करता है। एमकृषि® मात्स्यिकी ऐप इस प्रकार की सूचनाओं पर आधारित स्थानीय भाषा में सुझाव प्रदान करता है। इस आइकॉन का प्रयोग जावा तथा एंड्रायड मोबाइल फोन पर करना आसान है।

मत्स्य प्रग्रहण में सहायक एमकृषि मात्स्यिकी ऐप - एमकृषि® मात्स्यिकी – एक नीली समुद्री नवोन्मेष

आईएनसीओआईएस संभावित मत्स्य पालन क्षेत्र (पीएफजेड), एनओएए उपग्रहों से प्राप्त डाटा दूर संवेदी सूचनाओं पर आधारित मछलियों के झुंड की भविष्यवाणी, सतह का तापमान और विभिन्न मछली किस्मों के भोजन का निर्माण करने वाले समुद्री पादप प्लवक की उपस्थिति जैसी सूचनाओं को एकत्रित करता है। एमकृषि® मात्स्यिकी ऐप इस प्रकार की सूचनाओं पर आधारित स्थानीय भाषा में सुझाव प्रदान करता है। इस आइकॉन का प्रयोग जावा तथा एंड्रायड मोबाइल फोन पर करना आसान है।

आईसीएआर – सीएमएफआरआई, अनुसंधान केन्द्र, मुंबई स्थित द्वारा रायगढ़, महाराष्ट्र के 56 मुछआरों की सोसाइटी में इस सेवा की शुरूआत की गई।

मछुआरों द्वारा इस सेवा का लाभ मछली पकड़ने के लिए की गई समुद्री यात्राओं में किया गया। पीएफजेड मछुआरों के समीप स्थित होने के कारण उनके द्वारा अनावश्यक यात्राएं तथा इससे जुड़े डीजल, बर्फ तथा मजदूरी के खर्च में कटौती हुई।

मछुआरों की 13 सोसाइटी में किये गए एक सर्वेक्षण के अनुसार, आईसीएआर- सीएमएफआरआई द्वारा यह अनुमान लगाया गया कि इस सेवा के परिणामस्वरूप डीजल में 30 प्रतिशत की कटौती हुई है जो पर्यावरण की दृष्टि से लाभदायी है। एक अनुमान के अनुसार, वैश्विक तेल उत्पादन का 1.2 प्रतिशत मात्स्यिकी के क्षेत्र में खपत होता है।

  

इसके अतिरिक्त हवा की गति व दिशा, रंगीन बैंड द्वारा लहरों की उंचाई का प्रदर्शन द्वारा मछुआरों की मदद की गई जिससे वे समुद्र के असुरक्षित क्षेत्र की पहचान करने में सक्षम हो सके। सूचना मानचित्र नीले रंग का होने पर ही मछुआरों को समुद्र में जाने की सलाह दी जाती है। पांच दिन पहले मौसम अनुमान से संबंधित सूचना मछली पकड़ने के लिए बहु-दिवसीय यात्रा पर जाने वालों के लिए काफी सहयोगी है।

इस सहयोगात्मक नवोन्मेष को संसाधनहीन मछुआरों की आबादी को लक्षित कर तैयार किया गया है जिनमें से अधिकांश लोग गरीबी रेखा से नीचे से संबंधित हैं। मछली पकड़ने में सुधार के साथ ही लागत में कटौती, जीवन, नाव तथा मछली मारने की सामग्रियों की भी रक्षा कर यह सेवा मछुआरों की आजीविका पर सकारात्मक प्रभाव डाल रही है। इससे डीजल के प्रयोग में कटौती के कारण पर्यावरण को भी कम नुकसान होगा।

गहरे समुद्र में डाटा सिग्नल की कमी ने मछुआरों के सामने एक दूसरी चुनौति प्रस्तुत की। टीसीएस तथा सहयोगियों द्वारा गहरे समुद्र में 30 कि.मी. तक मोबाइल सिग्नल को शीघ्रता से बढ़ाया गया। इसके परिणामस्वरूप मछुआरे समुद्र से मछली के मूल्य तय करने तथा पकड़ी गई मछलियों के साथ वांछित व पहले से तय तट पर जाने में सक्षम हो सके।

डॉ. वी.वी. सिंह, कार्यवाहक वैज्ञानिक, आईसीएआर – सीएमएफआरआई, अनुसंधान केन्द्र, मुंबई द्वारा 9 जनवरी 2017 को प्रवासी भारतीय दिवस-2017, बेंग्लूरू में पुरस्कार प्राप्त किया गया।

इस मोबाइल ऐप को नीचे दिये गए लिंक से डाउनलोड कर सकते हैं।

http://www.tcsmkrishi.com/app/mfish/