शीतजल मात्स्यिकी अनुसंधान निदेशालय में हिन्दी कार्यशाला का आयोजन

24 सितम्बर 2013, भीमताल

शीतजल मात्स्यिकी अनुसंधान निदेशालय, भीमताल में हिन्दी सप्ताह कार्यक्रम के अनुक्रम में ‘पर्वतीय क्षेत्रों में जल-जीव पालन विविधीकरण’ विषय पर राजभाषा में दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्घाटन मुख्य अतिथि डॉ. वी.एस. बिष्ट, पूर्व कुलपति, पन्तनगर विश्वविद्यालय एवं वर्तमान निदेशक बिड़ला प्रौद्योगिकी संस्थान, भीमताल ने किया। उन्होंने अपने सम्बोधन में किसानों के लिए विकसित नवीन तकनीक को उन तक पहुंचाने पर जोर डालते हुए और जल क्रीड़ा एवं मत्स्य पर्यटन को अधिक विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

इस अवसर पर निदेशालय के निदेशक डॉ. ए. बराट ने अतिथियों का स्वागत किया एवं संस्थान की मुख्य उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने किसानों की आवश्यकता को ध्यान में रखकर हिन्दी भाषा में तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराये जाने पर जोर दिया। डॉ. बराट ने स्थानीय शीतजल मछलियों के संरक्षण का समर्थन करते हुए प्रयोगशाला में वैज्ञानिकों द्वारा किये गए शोध को किसानों तक पहुँचाने पर जोर दिया ताकि नई विकसित तकनीक का लाभ किसानों को मिल सके।

कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को डॉ. मदन मोहन, सहायक महानिदेशक (मत्स्य), भा.कृ.अनु.प., नई दिल्ली; डॉ. पी.सी. महन्ता, पूर्व निदेशक, शी.मा.अनु. निदेशालय; डॉ.आई.जे. सिंह, प्राध्यापक, मात्स्यिकी कॉलेज, पन्तनगर तथा डॉ. बी.सी. त्यागी, पूर्व प्रधान वैज्ञानिक, शी.मा.अनु. निदेशालय ने भी सम्बोधित किया।

इस अवसर पर गणमान्य अतिथियों ने जर्नल ऑफ कोल्ड वाटर फिशरीज का भी विमोचन किया। इस दो दिवसीय कार्यशाला में तीन तकनीकी सत्रों शीतजल मात्स्यिकी संसाधनों का आकलन और प्रबंधन, शीतजल कृषि में विविधीकरण तथा शीतजल कृषि द्वारा जीविकोपार्जन पर गहन चर्चा की गई। इस अवसर पर ‘हिन्दी सप्ताह’ पर आयोजित विभिन्न हिन्दी प्रतियोगिताओं में विजित कर्मचारियों को पुरस्कार भी वितरित किये गये।

डॉ. एन.एन. पाण्डेय, वरिष्ठ वैज्ञानिक ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

(स्रोतः शीतजल मात्स्यिकी अनुसंधान निदेशालय, भीमताल)