30 सितम्बर, 2026, अल्मोड़ा
भाकृअनुप-विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (वीपीकएएस), अल्मोड़ा में आज भाकृअनुप रिफॉर्म उत्सव एवं हिन्दी प्रोत्साहन पखवाड़े का समापन समारोह अत्यंत उत्साह एवं गरिमामयी वातावरण में वंदे मातरम् एवं परिषद गीत के साथ किया गया। यह पखवाड़ा दिनांक 14 सितम्बर, 2026 को हिन्दी दिवस से पर प्रारम्भ होकर आज दिनांक 30 सितम्बर को अल्मोड़ा एवं हवालबाग परिसर में कार्यरत सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ।

समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित डॉ. गीता खोलिया, सेवानिवृत्त प्रोफेसर, हिंदी विभाग, सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा, ने इस अवसर पर अपना व्याख्यान अत्यन्त रोचक तरीके से सभी श्रोताओं के मध्य रखा। उन्होंने अपने वक्तव्य का आरम्भ करते हुए कहा कि हिन्दी केवल अभिव्यक्ति का साधन नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान और धरोहर है। संस्कृत की समृद्ध परंपरा से जन्म लेकर पाली, प्राकृत और अपभ्रंश के सोपानों से गुजरते हुए हिन्दी ने एक लंबी और गौरवशाली विकास यात्रा तय की है। जन-जन की भाषा होने के कारण यह समय के साथ लगातार परिमार्जित होती रही और आज विश्व पटल पर एक सशक्त एवं बहुप्रचलित भाषा के रूप में स्थापित हो चुकी है।
हिन्दी के ऐतिहासिक विकास क्रम पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि संस्कृत की समृद्ध एवं शास्त्रीय परंपरा से जन्म लेकर यह पाली, प्राकृत और अपभ्रंश के विभिन्न सोपानों से बहती हुई एक सरिता की भाँति आगे बढ़ी है। मध्यकाल के भक्ति साहित्य से लेकर आधुनिक काल तक, जन-जन की संवेदनाओं को पिरोते हुए हिन्दी ने अपने स्वरूप को निरन्तर समृद्ध और परिमार्जित किया है।

आज की वर्तमान स्थिति पर चर्चा करते हुए प्रो. खोलिया ने कहा कि फ़िल्म, रेडियो, टीवी और वैश्विक व्यापार के क्षेत्र में हिन्दी ने अपनी अभूतपूर्व उपस्थिति दर्ज कराई है। उन्होंने, चिंता व्यक्त करते हुए, इस बात पर भी बल दिया कि तकनीकी और व्यावहारिक प्रगति के बावजूद हमें दैनिक जीवन और प्रशासनिक कामकाज में इसके प्रयोग को लेकर अधिक सहज, सजग और समर्पित होने की आवश्यकता है ताकि इसकी प्रगति की यात्रा पूर्ण सके।
भाकृअनुप रिफॉर्म उत्सव एवं हिन्दी प्रोत्साहन पखवाड़ा के समापन समारोह की अध्यक्षता कर रहे डॉ. लक्ष्मी कान्त, निदेशक, वीपीकेएएस, ने अपने उद्बोधन में नराकास की प्रशंसनीय श्रेणी में पुरस्कार मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त की तथा प्रभारी राजभाषा अधिकारी श्रीमती रेनू सनवाल द्वारा किए गए उत्कृष्ट कार्यों एवं प्रयासों की सराहना की। उन्होंने संस्थान द्वारा राजभाषा हिन्दी के संवर्धन एवं प्रगति हेतु किए गए कार्यों का उल्लेख भी किया। डॉ. कान्त ने कहा कि हमारे संस्थान द्वारा हिंदी में कई नवोन्मेषी कार्य भी किये जा रहे है। साथ ही पखवाड़ा कर्मचारियों और अधिकारियों में हिन्दी भाषा के प्रति संवेदनशीलता और दक्षता बढ़ाने का एक महत्त्वपूर्ण साधन है और जब तक हम अपनी राजभाषा को दैनिक जीवन एवं कार्य संस्कृति का अभिन्न हिस्सा नहीं बनाएँगे, तब तक इसके संवर्धन और विस्तार का लक्ष्य अधूरा रहेगा।

डॉ. निर्मल कुमार हेडाउ, कार्यवाहक निदेशक, वीपीकेएएस एवं डॉ. पंकज कुमार मिश्रा, प्रधान वैज्ञानिक द्वारा क्रमश: हवालबाग एवं अल्मोड़ा परिसर में सभी कार्मिकों को हिन्दी दिवस की बधाई के साथ-साथ श्री शिवराज सिंह चौहान, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री, डॉ. एम.एल. जाट, सचिव (डेयर) एवं महानिदेशक (भाकृअनुप) तथा डॉ. लक्ष्मी कान्त, निदेशक, वीपीकएएस, द्वारा जारी किया गया प्रेरणादायक संदेशों एवं अपीलों का कार्मिकों के मध्य सस्वर वाचन किया गया।
इन संदेशों के माध्यम से सभी से दैनिक शासकीय एवं प्रशासनिक कार्यों में राजभाषा हिंदी का अधिकाधिक प्रयोग करने तथा हिंदी के प्रचार-प्रसार में अपना सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया गया और कथन, "राजभाषा के प्रयोग से न केवल प्रशासनिक कार्यों में सुगमता आती है, बल्कि आम जनमानस तक अनुसंधान के लाभ भी अधिक प्रभावी ढंग से पहुँचते हैं", पर अपनी सहमति व्यक्त की।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए प्रभारी अधिकारी (राजभाषा) श्रीमती रेनू सनवाल ने कहा कि भाकृअनुप रिफॉर्म उत्सव एवं हिन्दी प्रोत्साहन पखवाड़ा के दौरान टंकण, हिन्दी टिप्पण एवं प्रारूप लेखन, लोकोक्तियाँ एवं मुहावरे, राजभाषा ज्ञान एवं स्वरचित काव्य पाठ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था जिसमें संस्थान के वैज्ञानिकों, अधिकारियों, कर्मचारियों, संविदा कार्मिकों एवं ठेकेदार द्वारा प्रदत्त अतिकुशल श्रमिकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ये प्रतियोगिताएं न केवल हिन्दी के प्रयोग में सहज हैं, बल्कि तकनीकी उपकरणों पर भी समान रूप से निपुणता को दर्शाती है तथा कार्मिकों के अभिव्यक्ति क्षमता के साथ ही उनके लेखन कौशल को भी बताती है।
डॉ. प्रियंका खाती, वैज्ञानिक, वीपीकेएएस, ने धन्यवाद प्रस्ताव ज्ञापित किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्र के प्रति कृतज्ञता दर्शाते हुए राष्ट्रगान से किया गया।
(स्रोतः भाकृअनुप-विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा)







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