'आजीविका सुधार के लिए हिलसा मत्स्य संरक्षण' पर आभासी प्रशिक्षण कार्यक्रम का हुआ आयोजन

12 जनवरी, 2021, बैरकपुर

Virtual Training Programme on “Hilsa Fishery Conservation for livelihood improvement” organized

भाकृअनुप-केंद्रीय अंतर्स्थलीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर, कोलकाता ने आज ‘आजीविका सुधार के लिए हिलसा मत्स्य संरक्षण’ पर एक आभासी प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया।

डॉ. बी. के. दास, निदेशक, भाकृअनुप-सिफ़री, बैरकपुर, कोलकाता ने अपने उद्घाटन संबोधन में 2012 से 2020 तक हिलसा के लिए संस्थान के हस्तक्षेप और अनुसंधान गतिविधियों पर प्रकाश डाला। डॉ. दास ने वैज्ञानिकों, मछुआरों और प्रशासनिक अधिकारियों से मिशन हिलसा की दिशा में एक टीम के रूप में काम करने का आग्रह किया। उन्होंने हिलसा संरक्षण कार्यक्रम में युवाओं की भागीदारी पर भी प्रकाश डाला।

डॉ. संदीप बेहरा, वरिष्ठ सलाहकार, जैव विविधता संरक्षण, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन, जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार ने विशेष रूप से पार-सीमा जलीय जंतुओं और वैज्ञानिक भागीदारी एवं आउटपुट के लिए भाकृअनुप-सिफ़री की क्षेत्रीय अनुसंधान सहयोग की भूमिका पर प्रकाश डाला।

प्रो. अब्दुल वहाब, टीम लीडर, एकोफिश परियोजना-यूएसएआईडी, वर्ल्डफिश, बांग्लादेश ने बांग्लादेश में हिलसा उत्पादन सुधार के लिए विज्ञान आधारित सामुदायिक भागीदारी की महत्त्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य हितधारकों को जागरूक करना और हिलसा मत्स्य पालन के लिए विशिष्ट जैव विविधता संरक्षण योजना में सामुदायिक भागीदारी को उजागर करना था।

इस कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों के मछुआरों, छात्रों, मत्स्य पालन अधिकारियों, विश्वविद्यालयों और अनुसंधान-संस्थानों के कर्मियों का प्रतिनिधित्व करने वाले 260 से अधिक प्रतिभागियों ने आभासी तौर पर भाग लिया।

(स्रोत: भाकृअनुप-केंद्रीय अंतर्स्थलीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर, कोलकाता)