'जैव-शाकनाशी: वर्तमान स्थिति और आगे की राह’ पर विचार मंथन सत्र का हुआ आयोजन

7 अक्तूबर, 2021, जबलपुर

भाकृअनुप-खरपतवार अनुसंधान निदेशालय, जबलपुर, मध्य प्रदेश ने आज 'जैव-शाकनाशी: वर्तमान स्थिति और आगे की राह’ पर एक विचार-मंथन सत्र का आयोजन किया।

 Brainstorming Session on “Bio-herbicides: Present status and way forward” organized

अपने उद्घाटन संबोधन में, मुख्य अतिथि, डॉ सुरेश कुमार चौधरी, उप महानिदेशक (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन), भाकृअनुप ने खरपतवार प्रबंधन के लिए जैव-शाकनाशी या प्राकृतिक उत्पादों के महत्त्व पर जोर दिया। फसलों की उत्पादकता और विशेष रूप से जैविक कृषि को बनाए रखने में प्रमुख जैविक तनावों में से एक खरपतवार के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं की बढ़ती मांग से निपटने के लिए किसान हानिकारक रासायनिक-निर्भर पारंपरिक कृषि से अधिक टिकाऊ और हरित कृषि पद्धतियों की ओर बढ़ रहे हैं।

जैविक खेती के महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए विशिष्ट अतिथि, डॉ. एस. भास्कर, सहायक महानिदेशक (ए, एएफ एंड सीसी), भाकृअनुप ने रेखांकित किया कि जैविक कृषि के तहत क्षेत्र में वृद्धि के साथ, सरकार ने जैविक कृषि को बढ़ावा देने के लिए परंपरागत कृषि विकास योजना (पीकेवीवाई), भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति (बीपीकेपी) और जैविक खेती पर नेटवर्क परियोजना आदि जैसे कई कार्यक्रम शुरू किए हैं।

इससे पूर्व अपने स्वागत संबोधन में डॉ. जे. एस. मिश्रा, निदेशक, भाकृअनुप-डीडब्ल्यूआर, जबलपुर ने खरपतवार प्रबंधन के लिए विश्व स्तर पर विकसित व व्यावसायिक जैव-शाकनाशी और प्राकृतिक उत्पादों की वर्तमान स्थिति को रेखांकित किया।

प्रख्यात खरपतवार वैज्ञानिकों सहित 100 से अधिक प्रतिभागी; कृषि निदेशकों, तमिलनाडु सरकार और जैव-कीटनाशक उद्योगों के प्रतिनिधियों ने विचार-मंथन सत्र में भाग लिया।

(स्रोत: भाकृअनुप-खरपतवार अनुसंधान निदेशालय, जबलपुर, मध्य प्रदेश)