भाकृअनुप-एनबीएआईआर ने अभिनव जैव नियंत्रण रणनीतियों के माध्यम से खतरनाक आक्रामक रुगोस स्पाइरलिंग व्हाइटफ्लाई पर लगाया अंकुश

भाकृअनुप-राष्ट्रीय कृषि कीट संसाधन ब्यूरो, बेंगलुरु के वैज्ञानिकों ने पहली बार 2016 में तमिलनाडु के पोलाची में नारियल पर अत्यधिक पॉलीफेगस (विविधभक्षी) आक्रामक रुगोस स्पाइरलिंग व्हाइटफ्लाई (झुर्रीदार सर्पिलन श्वेत मक्खी, आरएसडब्ल्यू, वैज्ञानिक नाम - एल्यूरोडिकस रुगियोपरक्यूलेटस मार्टिन) को दर्ज किया था। इसके बाद यह कीट तेजी से भारत में नारियल उगाने वाले सभी जिलों में फैलता चला गया और नारियल के बागानों को व्यापक नुकसान पहुँचाने लगा। घबराए किसानों ने रासायनिक कीटनाशकों के छिड़काव का सहारा लिया और यह अस्थायी रूप से ठीक हो गया।

ICAR-NBAIR curtails dangerous Invasive Rugose Spiralling Whitefly through Innovative Biocontrol Strategies ICAR-NBAIR curtails dangerous Invasive Rugose Spiralling Whitefly through Innovative Biocontrol Strategies ICAR-NBAIR curtails dangerous Invasive Rugose Spiralling Whitefly through Innovative Biocontrol Strategies

भाकृअनुप-एनबीएआईआर ने एफेलिनिड पैरासाइटॉयड (परजीवी) एनकारसिया गुआदेलूपे की पहचान की, जिससे प्राकृतिक पैरासिटिज्म (परजीवीता) 56% से 82% हो गई। किसानों को परजीवी पदार्थ की पहचान, बड़े पैमाने पर उत्पादन और वितरण में प्रशिक्षित करने के साथ-साथ रासायनिक कीटनाशकों का अनुप्रयोग नहीं करने की सख्त सलाह दी गई। परजीवी तेजी से बढ़े और प्राकृतिक परजीवी ने अभूतपूर्व वृद्धि की। इस प्रकार, गंभीर प्रकोपों ​​को रोका। उत्पादकों को परजीवी के संरक्षण और संवर्धन के लिए बैंकर संयंत्रों के रूप में केला और कैनना इंडिका उगाने की सलाह दी गई।

एक बड़ी सफलता के रूप में भाकृअनुप-एनबीएआईआर ने एक अत्यधिक प्रभावी एंटोमोपैथोजेनिक फंगस (कवक), इसरिया फ्यूमोसरोसिया (भाकृअनुप-एनबीएआईआर पीएफयू-5) की पहचान की और इसे विकसित करते हुए आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में इसका क्षेत्रीय परीक्षण किया। कीट के सभी जीवन चरणों को मारने में कवक प्रभावी था। कीट की मृत्यु दर 91 फीसद तक दर्ज की गई। टैल्क, चावल के दाने और तेल का सूत्रीकरण/संरूपण लंबे जीवनावधि के साथ विकसित किया गया था। प्रभावित किसानों के लिए रोगजनक के सूत्रीकरण को स्वतंत्र रूप से वितरित किया गया था। इसकी उच्च क्षेत्र प्रभावकारिता के कारण नारियल कृषक समुदाय से जैव नियंत्रण एजेंट की भारी मांग है। इस प्रकार, भाकृअनुप-एनबीएआईआर थोड़े समय के भीतर आरएसडब्ल्यू के कुशल प्रबंधन के लिए जैव नियंत्रण रणनीतियों को विकसित करने में सफल रहा। आर्थिक विश्लेषण से पता चला है कि वर्तमान में लगभग 9,500 रुपए/हेक्टेयर फसल संरक्षण लागत और 900 मिलीलीटर कीटनाशकों/हेक्टेयर को बचाया जा रहा है।

(स्रोत: भाकृअनुप-राष्ट्रीय कृषि कीट संसाधन ब्यूरो, बेंगलुरु)