भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र ने मनाया 38वाँ स्थापना दिवस

5 जुलाई, 2021, बीकानेर

डॉ. त्रिलोचन महापात्र, सचिव (कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग) एवं महानिदेशक (भा.कृ.अनु.प.) ने आज भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र, बीकानेर, राजस्थान के 38वें स्थापना दिवस के समारोह के उद्घाटन संबोधन में कहा कि 'ऊँटनी के दूध की चिकित्सीय भूमिका को लोकप्रिय बनाने और इसकी बाजार में मांग बढ़ाने की जरूरत है।'

ICAR-NRC on Camel celebrates 38th Foundation Day  ICAR-NRC on Camel celebrates 38th Foundation Day

डॉ. महापात्र ने कहा कि केंद्र को बदलते परिवेश में ऊँट पालन व्यवसाय को आगे ले जाने के लिए हितधारकों की जरूरत के अनुसार अनुसंधान प्राथमिकताओं के पुनर्गठन पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने राष्ट्रव्यापी उपभोक्ताओं तक पहुँच का विस्तार करने और लाभ कमाने वाले उद्यम के रूप में ‘ऊँट डेयरी’ स्थापित करने के लिए शीत भंडारण श्रृंखला के माध्यम से दूध के चैनल वितरण पर भी जोर डाला।

इस अवसर पर महानिदेशक ने केंद्र की डेयरी प्रौद्योगिकी एवं प्रसंस्करण इकाई के उद्घाटन सहित ऊँट आरोग्यम मोबाइल एप्प और ऊँट के बालों से बने योगा चटाई (मैट) का शुभारंभ किया। उन्होंने ऊँट पालन को बढ़ावा देने के लिए प्रगतिशील किसानों को सम्मानित भी किया।

डॉ. भूपेंद्र नाथ त्रिपाठी, उप महानिदेशक (पशु विज्ञान), भाकृअनुप ने ऊँट डेयरी उद्यमिता मॉडल विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने ऊँटनी के दूध के चिकित्सीय गुणों को बढ़ावा देने के लिए भाकृअनुप-एनडीआरआई और भाकृअनुप-आईवीआरआई के साथ सहयोगात्मक कार्य करने पर भी जोर दिया।

ICAR-NRC on Camel celebrates 38th Foundation Day

डॉ. अर्तबंधु साहू, निदेशक, भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र ने ऊँट प्रजातियों के विकास एवं संरक्षण के संबंध में केंद्र की अनुसंधान उपलब्धियों पर प्रकाश डाला।

भाकृअनुप-संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों ने कृषि एवं पशुपालन के लिए अपनाई जा रही नई तकनीकियों/प्रौद्योगिकियों पर भी विचार-विमर्श किया।

इस अवसर पर आयोजित किसान-वैज्ञानिक परस्पर संवादात्मक बैठक में लगभग 40 किसानों ने भाग लिया।

(स्त्रोत: भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र, बीकानेर, राजस्थान)