भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र, बीकानेर ने मनाया 37वाँ स्थापना दिवस

06 जुलाई, 2020, बीकानेर

भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र, बीकानेर, राजस्थान ने आज अपने 37वें स्थापना दिवस के अवसर पर 'ऊँट आधारित पर्यटन विकास के नए आयाम: उद्यमिता की प्रबल संभावनाएँ' पर परस्पर संवादात्मक बैठक का आयोजन किया।

ICAR-NRC on Camel, Bikaner celebrates 37th Foundation Day 

डॉ. आर. के. सावल, निदेशक, भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र ने कहा कि पिछले 36 वर्षों के दौरान केंद्र द्वारा प्राप्त उपलब्धियों ने ऊँट पालकों की आजीविका को सुधारा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि क्षेत्र में आबादी में गिरावट ऊँटों को समाज के लिए उपयोगी बनाने हेतु और अधिक प्रयासों की मांग करती है। डॉ. सावल ने पिछले वर्ष के दौरान देश और विदेश के 45,000 से अधिक पर्यटकों, स्कूली बच्चों और किसानों द्वारा यात्रा को रेखांकित किया।

श्री रमेश तम्बिया, जिला विकास प्रबंधक, नाबार्ड, बीकानेर, राजस्थान ने किसानों को संवाद हेतु एक अच्छा मंच प्रदान करने के लिए केंद्र की पहल की सराहना की। उन्होंने ऊँट दुग्ध संग्रहण और परिवहन की मूल्य श्रृंखला में सुधार करने और किसान उत्पादक संगठनों के माध्यम से नए आयामों में ऊँट कृषि व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए अधिक विचार-विमर्श करने पर जोर दिया।

भारत में ऊँट के दूध में एक अग्रणी उद्यमी श्री हितेश राठी, आदिविक फूड्स, नोखा, बीकानेर, राजस्थान ने ऊँट के दूध के परिवहन और विपणन के लिए शीत श्रृंखला के विकास को ग्राहकों की संतुष्टि से मेल खाने के लिए कठिन कार्य माना।

राजस्थान के बीकानेर, लखुसर के एक प्रगतिशील किसान श्री जेठाराम ने केंद्र के साथ लंबे जुड़ाव के बारे में अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि ऊँट की खेती को लाभकारी बनाने में बैठकों और प्रशिक्षणों से उन्हें काफी मदद मिली है।

(स्रोत: भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र, बीकानेर, राजस्थान)