भाकृअनुप संस्थानों ने विश्व मधुमक्खी दिवस – 2022 मनाया

20 मई, 2022

परागणकों के महत्व, उनके सामने आने वाले खतरों और सतत विकास में उनके योगदान के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए, संयुक्त राष्ट्र ने 20 मई को विश्व मधुमक्खी दिवस के रूप में हर साल पूरे विश्व में मनाया जाने के लिए नामित किया।

इस दिवस को मनाने का मुख्य लक्ष्य मधुमक्खियों और अन्य परागणकों की रक्षा के  उपायों को मजबूत करना है जो वैश्विक खाद्य आपूर्ति से संबंधित समस्याओं को हल करने और विकासशील देशों में भूख को खत्म करने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

भाकृअनुप संस्थानों ने भी इस दिवस को मनाया।

 

कृषि विज्ञान केंद्र, पालघर, महाराष्ट्र

मुख्य अतिथि, डॉ. लखन सिंह, निदेशक, भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, पुणे, महाराष्ट्र ने मनुष्यों, पौधों, जानवरों और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखने में मधुमक्खियों की भूमिका पर प्रकाश डाला। डॉ. सिंह ने इस बात पर भी जोर दिया कि मधुमक्खियों के बिना, भोजन दुर्लभ होगा और आबादी का एक बड़ा हिस्सा भूख से मर जाएगा। डॉ. सिंह ने ग्रामीण क्षेत्रों, गांवों और स्कूलों में मधुमक्खी पालन के महत्व के बारे में जागरूकता पैदा करने की आवश्यकता पर बल दिया।

 

इससे पहले, डॉ. विलास जाधव, प्रमुख, केवीके, पालघर ने स्वागत संबोधन में मधुमक्खी पालन के बारे में विभिन्न गतिविधियों को उनके प्रभावों के साथ रेखांकित किया। उन्होंने कहा क्षमता निर्माण और जागरूकता निर्माण के लिए केवीके द्वारा कुल 25 मास्टर ट्रेनर्स विकसित किए हैं।

कार्यक्रम में 100 से अधिक किसानों और उद्यमियों ने भाग लिया।

 

भाकृअनुप-पुष्प कृषि अनुसंधान निदेशालय, पुणे, महाराष्ट्र

निदेशालय ने इस दिवस के उत्सव को चिह्नित करने के लिए "परागणक: उनकी अमूल्य सेवाएं" पर एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया।

मुख्य अतिथि, डॉ. के.वी. प्रसाद, निदेशक, भाकृअनुप-पुष्प कृषि अनुसंधान निदेशालय, पुणे, महाराष्ट्र ने शहरी क्षेत्रों और कृषि भूमि में परागणक जीवों के संरक्षण की संभावना को रेखांकित किया। डॉ. प्रसाद ने परागणक जीवों के संरक्षण के लिए निदेशालय की गतिविधियों और फूलों की खेती आधारित मधुमक्खी पालन के दायरे पर भी प्रकाश डाला।

सम्मानित अतिथि, डॉ ज्योति जाधव, प्रमुख, जैव प्रौद्योगिकी विभाग, शिवाजी विश्वविद्यालय, कोल्हापुर, महाराष्ट्र ने मधुमक्खियों के महत्व और उनकी अमूल्य सेवाओं को रेखांकित किया।

डॉ. वी.ए. बापट, प्रोफेसर, जैव प्रौद्योगिकी विभाग, शिवाजी विश्वविद्यालय, कोल्हापुर, महाराष्ट्र ने परागणकों के बारे में उभरते मुद्दों पर प्रकाश डाला और परागण अनुसंधान के कुछ उभरते क्षेत्रों पर एक सहयोगी अनुसंधान कार्यक्रम शुरू करने का सुझाव दिया।

कार्यक्रम में 75 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।

(स्रोत: संबंधित भाकृअनुप संस्थान)