"भारत में गन्ने की लाल सड़न रोग की स्थिति और उसके प्रबंधन" पर विचार मंथन सत्र आयोजित

23 मई, 2022, लखनऊ

भाकृअनुप-भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ, उत्तर प्रदेश ने आज "भारत में गन्ने के लाल सड़न रोग की स्थिति और उसके प्रबंधन" पर विचार-मंथन सत्र का आयोजन किया।

Brainstorming Session on “Status of Red Rot Disease of Sugarcane in India and its Management” organized  Brainstorming Session on “Status of Red Rot Disease of Sugarcane in India and its Management” organized

सत्र का उद्घाटन करते हुए, डॉ. तिलक राज शर्मा, उप महानिदेशक (फसल विज्ञान), भाकृअनुप ने गन्ने के लाल सड़न के दृश्य और आणविक निदान की आवश्यकता पर जोर दिया। डॉ. शर्मा ने प्रतिरोध प्रजनन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सेंसर के विकास, भविष्यवाणी मॉडल, जीन मैपिंग और जीन संपादन को समय की आवश्यकता के रूप में माना। उन्होंने सेट जनित बीमारी से बचाव के लिए टिश्यू कल्चर द्वारा तैयार स्वस्थ रोपण सामग्री पर भी जोर दिया।

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डीडीजी ने संस्थान की मृदा परीक्षण प्रयोगशाला के नवनिर्मित भवन का भी उद्घाटन किया और इस अवसर पर कॉफी टेबल बुक - आईआईएसआर @ 70: एक संस्मरण का विमोचन किया।

डॉ. एस.सी. दुबे, एडीजी (पौध संरक्षण और जैव सुरक्षा), भाकृअनुप ने सबसे लोकप्रिय किस्म के गन्ना सीओ 0238 को सीओ 98014, सीओ 0118, सीओ 15023, सीओएलके 14201 और सीओएस 13235, आदि के साथ बदलने पर जोर दिया।

डॉ. आर.के. सिंह, एडीजी (सीसी), भाकृअनुप ने गन्ने की लाल सड़न प्रतिरोधी किस्मों को विकसित करने, गुणवत्ता वाले बीज उत्पादन और लाल सड़न पर बुनियादी शोध के साथ-साथ कोलेटोट्रिकैटम फाल्कटम की विभिन्न प्रजातियों की पहचान पर जोर दिया।

इससे पहले, डॉ. ए.डी. पाठक, निदेशक, भाकृअनुप-आईआईएसआर ने गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत करते हुए लाल सड़न रोग से होने वाले भारी आर्थिक नुकसान और इस बीमारी के प्रबंधन में संस्थान के योगदान के बारे में जानकारी दी।

डॉ. आर.बी. दौले, मुख्य गन्ना सलाहकार, एनएफसीएसएफ, नई दिल्ली ने मोनोकल्चर के दुष्परिणामों को रेखांकित करते हुए कहा कि किसी भी किस्म की खेती >50% क्षेत्र में नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने लाल सड़न रोग के प्रबंधन के लिए एक एकीकृत रणनीति विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

विचार-मंथन सत्र में भाकृअनुप संस्थानों और राज्य सरकार के विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया।

(स्रोत: भाकृअनुप-भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ, उत्तर प्रदेश)