महानिदेशक, भाकृअनुप ने राष्ट्रीय शूकर अनुसंधान केंद्र के कृषि-व्यवसाय ऊष्मायन केंद्र का किया उद्घाटन

24 नवंबर, 2019, गुवाहाटी

DG, ICAR the Agri-Business Incubation (ABI) Centre of ICAR-National Research Centre on Pig

डॉ. त्रिलोचन महापात्र, महानिदेशक (भा.कृ.अनु.प.) एवं सचिव (कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग) ने राष्ट्रीय शूकर अनुसंधान केंद्र, रानी, गुवाहाटी के कृषि-व्यवसाय ऊष्मायन केंद्र का आज उद्घाटन किया। उन्होंने ग्रामीण सूअर वधशाला प्रौद्योगिकी का भी अनावरण किया। यह प्रौद्योगिकी ग्रामीण क्षेत्रों में मांस संचालकों को किफायती लागत पर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के अनुसार अंतिम उत्पाद के लिए बेहतर स्वच्छ स्थिति सुनिश्चित करने हेतु ऑफ-फ्लोर ड्रेसिंग संचालन प्रदान करती है।

चार उद्यमियों मसलन, मेसर्स आरोहन फूड्स प्राइवेट लिमिटेड, गुवाहाटी; मेसर्स सिम्बायोटिक फूड्स प्राइवेट लिमिटेड, तेजपुर; मेसर्स सयूरी फार्म्स, गुवाहाटी और मेसर्स अमोरा फूड्स, गुवाहाटी के साथ पाँच प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए गए थे।

प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौतों को प्रौद्योगिकी के सत्यापन और अप-स्केलिंग (बढ़ावा) के लिए आवश्यक समर्थन प्रदान करने और एक आकर्षक व्यवसाय प्रस्ताव के रूप में उपयोगकर्ता तक अपनी पहुँच को प्रोत्साहित करने के लिए परिकल्पित किया गया है। यह समझौता वाणिज्यिक सूअर पालन के क्षेत्रों में उद्यमिता कौशल विकास गतिविधियों सहित ऊष्मायन और व्यापार विकास कार्यक्रम और संबद्ध सेवा क्षेत्रों, बाजारों के लिए दिशा-निर्देश तय करने एवं मूल्य वर्धन पर भी केंद्रित है।

इन समझौतों के माध्यम से एबीआई सेंटर का उद्देश्य भावी उद्यमियों की मदद करना है जो तकनीकी परामर्श, बुनियादी ढाँचे की सुविधा, विशेषज्ञों के मार्गदर्शन एवं प्रशिक्षण के आधार पर प्रौद्योगिकी आधारित व्यावसायिक विचारों को विकसित करने और स्थायी उद्यम स्थापित करने के लिए सक्रिय मूल्य वर्धित व्यापार सहायता प्रदान करते हैं।

डॉ. महापात्र ने अपने संबोधन में उत्पादन और उत्पादकता में सुधार के लिए सुरक्षा, जैव सुरक्षा, गुणवत्ता मानक, पैकेजिंग और पता लगाने की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया ताकि इससे न केवल उत्तर पूर्वी क्षेत्र में मौजूद मांग और आपूर्ति के बीच के अंतर को बल्कि निर्यात की आवश्यकता को भी पूरा किया जा सके।

उन्होंने भाकृअनुप के साथ जुड़ने व आगे आने के लिए उद्यमियों को बधाई दी और इस तथ्य पर जोर दिया कि एक साथ काम करना सभी के लिए जीत की स्थिति होगी। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि सूअर पालन मूल्य श्रृंखला में हर कदम पर एक अंतर मौजूद है और इस तरह उद्यमियों को संबोधित करने के लिए बहुत सारे व्यवसाय के अवसर मिलते हैं। सभी उद्यमियों को शुरुआती हिचकिचाहट को दूर करने, उन्हें हल करने, आगे बढ़ने और साधन खोजने के लिए उन्होंने शुभकामनाएँ दीं। समापन करते हुए डॉ. महापात्र ने जोर देकर कहा कि हर एबीआई के लिए नारा होगा – ‘लाभ के लिए श्रृंखला - हर खिलाड़ी के लिए अधिकतम लाभ हेतु मूल्य श्रृंखला।’

इस दौरान डॉ. त्रिलोचन महापात्र सहित अन्य गणमान्य लोगों ने पशु प्रयोगों का संचालन करने के लिए संस्थान में स्थापित जलवायु कक्ष का भी उद्घाटन किया।

डॉ. स्वराज राजखोवा, निदेशक, भाकृअनुप-राष्ट्रीय शूकर अनुसंधान केंद्र ने इससे पहले अपने स्वागत संबोधन में संस्थान के एबीआई सेंटर के मुख्य उद्देश्यों की जानकारी दी।

डॉ. जयकृष्ण जेना, उप महानिदेशक (मात्स्यिकी एवं पशु विज्ञान); डॉ. ए. के. सिंह, उप महानिदेशक (कृषि विस्तार); डॉ. के. अलगुसुंदरम, उप महानिदेशक (कृषि अभियांत्रिकी); डॉ. आर. सी. अग्रवाल, उप महानिदेशक (कृषि शिक्षा); डॉ. मोइरंगथेम प्रेमजीत सिंह, कुलपति, केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, इम्फाल ने इस अवसर की शोभा बढ़ाई।

इस दौरान भाकृअनुप-संस्थानों के निदेशक भी मौजूद थे।

(स्त्रोत: राष्ट्रीय शूकर अनुसंधान केंद्र, रानी, गुवाहाटी)