महानिदेशक, भा.कृ.अनु.प. ने ‘भारत में कृषि अनुसंधान और शिक्षा में बौद्धिक संपदा अधिकार' पर आभासी कार्यशाला-सह-प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन किया

12 सितंबर, 2020

राष्ट्रीय उच्च कृषि शिक्षा कार्यक्रम की छत्रछाया में शिक्षा प्रभाग और आईपी&टीएम इकाई, भा.कृ.अनु.प. द्वारा आयोजित ‘भारत में कृषि अनुसंधान और शिक्षा में बौद्धिक संपदा अधिकार' पर 14 दिवसीय आभासी कार्यशाला-सह-प्रशिक्षण का आज उद्घाटन किया गया। पहला सत्र 'विज्ञान और प्रौद्योगिकी में आईपीआर का महत्त्व: एक वैश्विक परिप्रेक्ष्य' पर था।

डॉ. त्रिलोचन महापात्र, सचिव (कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग) एवं महानिदेशक (भा.कृ.अनु.प.) ने कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य प्रतिभागियों (आने वाले समय में भा.कृ.अनु.प. और कृषि विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिक और संकाय बनने वाले) को कृषि में आईपीआर के उत्पादन, संरक्षण और प्रबंधन पर एक संपूर्ण अवलोकन और ज्ञान प्रदान करना है।

Director General, ICAR inaugurates Virtual Workshop-cum-Training Programme On “Intellectual Property Rights in Agricultural Research & Education in India”

प्रमुख वक्ता, डॉ. पुष्पेन्द्र राय, विशेषज्ञ, अंतरराष्ट्रीय बौद्धिक संपदा (आईपी) ने हाल के ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स (वैश्विक नवोन्मेषी सूचकांक) 2020 के बारे में बात की, जिसमें 2019 में भारत 52 वें स्थान से ऊपर चढ़ने के बाद 48 वें स्थान पर है जबकि वर्ष 2015 में 81 वें स्थान पर है। रैंकिंग में लगातार सुधार यह बताता है कि भारत मध्य और दक्षिणी एशियाई क्षेत्र में 2019 के अग्रणी नवाचार प्राप्तकर्ताओं में से एक के रूप में उभर रहा है।

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डॉ. राय ने भा.कृ.अनु.प. की सराहना करते हुए कहा कि राष्ट्रीय एवं वैश्विक आईपीआर दौर में खुद को बनाए रखने के लिए भा.कृ.अनु.प. ने आईपी प्रबंधन क्षेत्र में संस्थागत क्षमताओं और मानव कौशल के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि आईपी का मतलब केवल पेटेंट करना और इसे नवीकरण के माध्यम से अलमारियों में रखना नहीं है।

उन्होंने अन्य प्रकार के बौद्धिक गुणों जैसे सर्वाधिकार (कॉपी राइट्स), व्यापार-चिन्ह (ट्रेडमार्क), व्यापार रहस्य (ट्रेड सीक्रेट्स) आदि की जाँच करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि आईपीआर कोशिकाओं को मजबूत करने से नवाचारों के नेतृत्व वाले स्टार्ट-अप पारिस्थितिकी तंत्र की स्थापना का मार्ग प्रशस्त होगा। उन्होंने कहा कि पेटेंट केवल एकाधिकार प्रदान करता है जो अनन्य नहीं है और यह नवाचार पर प्रतिबंध नहीं लगाता है बल्कि केवल मुफ्त सवारी है।

डॉ. आर. सी. अग्रवाल, उप महानिदेशक (शिक्षा), भा.कृ.अनु.प. और राष्ट्रीय निदेशक (एनएएचईपी) ने इससे पहले अपने स्वागत संबोधन में कार्यक्रम के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भागीदारी को और अधिक समावेशी बनाने के लिए इस कार्यक्रम को 28 सितंबर, 2020 तक चौदह कार्य दिवसों के लिए दिन में एक घंटे के लिए तैयार किया गया था।

कार्यक्रम में भा.कृ.अनु.प. के उप महानिदेशकों और वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम में 250 से अधिक पंजीकृत प्रतिभागियों ने भाग लिया।

डॉ. संजीव सक्सेना, अतिरिक्त महानिदेशक, (आईपी&टीएम इकाई), भा.कृ.अनु.प. ने धन्यवाद प्रस्ताव दिया।

(स्रोत: कृषि शिक्षा प्रभाग, भा.कृ.अनु.प.)