श्री गिरिराज सिंह ने मत्स्यपालकों के लिए ऑनलाइन पाठ्यक्रम मोबाइल एप्प 'मत्स्य सेतु' का किया शुभारंभ

6 जुलाई, 2021

श्री गिरिराज सिंह, केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री ने कहा, ‘ऑनलाइन पाठ्यक्रम मोबाइल एप्प - मत्स्य सेतु - किसानों को उनके सुविधानुसार प्रौद्योगिकियों एवं बेहतर प्रबंधन प्रथाओं को सीखने में मददगार होगा।' केंद्रीय मंत्री आज भाकृअनुप-केंद्रीय मीठाजल जीवपालन अनुसंधान संस्थान, भुवनेश्वर, ओडिशा द्वारा विकसित मत्स्य पालकों के लिए ऑनलाइन पाठ्यक्रम मोबाइल एप्प 'मत्स्य सेतु' के शुभारंभ समारोह को संबोधित कर रहे थे।

श्री सिंह ने जोर देकर कहा कि मत्स्यपालकों की क्षमता निर्माण देश में प्रौद्योगिकी के नेतृत्व वाले जलीय कृषि विकास की अगुवाई करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। केंद्रीय मंत्री के संबोधन में सजावटी मत्स्य पालन, समुद्री शैवाल संवर्धन, चारा तैयार करने हेतु मॉड्यूल और फसल कटाई उपरांत मूल्यवर्धन आदि सहित विभिन्न गतिविधियों पर प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए जोर दिया गया।

Shri Giriraj Singh launches Online Course Mobile App “Matsya Setu” for Fish Farmers  Shri Giriraj Singh launches Online Course Mobile App “Matsya Setu” for Fish Farmers

देश के विभिन्न राज्यों के प्रगतिशील मत्स्यपालकों के साथ बातचीत के दौरान श्री सिंह ने सफल किसानों को उनकी परियोजनाओं के 1 से 2 मिनट के वीडियो को साझा करने के लिए कहा। केंद्रीय मंत्री ने एप्प को व्यापक रूप से लोकप्रिय बनाने का आग्रह किया ताकि यह देश के प्रत्येक मत्स्यपालकों तक पहुँच सके।

श्री प्रताप चंद्र सारंगी, केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री के अलावा श्री जे. एन. स्वैन, सचिव, मत्स्यपालन विभाग, भारत सरकार और मत्स्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

एप्प में प्रजाति-वार/विषय-वार स्व-अधिगम ऑनलाइन पाठ्यक्रम मॉड्यूल हैं जिसमें कार्प, कैटफ़िश, स्कैम्पी, मुर्रेल, सजावटी मछली और मोती की खेती आदि जैसी व्यावसायिक रूप से महत्त्वपूर्ण मछलियों के प्रजनन, बीज उत्पादन एवं उपज संस्कृति पर बुनियादी अवधारणाएँ और व्यावहारिक प्रदर्शनों को प्रसिद्ध जलकृषि विशेषज्ञों द्वारा गहराई से समझाया गया है। अतिरिक्त शिक्षण सामग्री के साथ-साथ शिक्षार्थियों की सुविधा के लिए मॉड्यूल को छोटे वीडियो अध्यायों में विभाजित किया गया है।

प्रत्येक पाठ्यक्रम मॉड्यूल के सफलतापूर्वक पूरा होने पर शिक्षार्थियों को एक स्वतः उत्पन्न ई-प्रमाण पत्र मिलता है। किसान भी अपनी शंकाओं को दूर कर सकते हैं और एप्प के माध्यम से विशेषज्ञों से विशिष्ट सलाह प्राप्त कर सकते हैं।

राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड, हैदराबाद के सहयोग से विकसित इस एप्प का उद्देश्य देश के जलीय कृषकों तक नवीनतम मीठाजल जीवपालन प्रौद्योगिकियों का प्रसार करना है।

(स्रोत: भाकृअनुप-केंद्रीय मीठाजल जीवपालन अनुसंधान संस्थान, भुवनेश्वर, ओडिशा)