संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में पादप विकृति विज्ञान पर 7वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का हुआ उद्घाटन

16 जनवरी, 2020, नई दिल्ली

भारतीय फाइटोपैथोलॉजिकल सोसायटी द्वारा ‘संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में पादप विकृति विज्ञान’ पर आयोजित 7वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली के डॉ. बी. पी. पाल मेमोरियल ऑडिटोरियम में किया गया।

7th International Conference on Phytopathology in Achieving UN Sustainable Development Goals inaugurated  7th International Conference on Phytopathology in Achieving UN Sustainable Development Goals inaugurated

डॉ. आनंद कुमार सिंह, उप महानिदेशक (बागवानी एवं फसल विज्ञान), भाकृअनुप ने बतौर मुख्य अतिथि वर्ष 1950-51 में 50.82 मिलियन टन खाद्यान्न के उत्पादन की तुलना में वर्ष 2018-19 में 281.37 मिलियन टन खाद्यान्न के उत्पादन का हवाला देते हुए भारत सरकार के मजबूत नीतिगत फैसलों पर जोर दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि शोधकर्ताओं द्वारा उपकरणों और प्रौद्योगिकियों की निर्मिति तथा उच्च उपज और प्रतिरोध के लिए जीन के साथ किस्मों के विकास और तैनाती ने इसमें महत्त्व भूमिका निभाई है। डॉ. सिंह ने वर्ष 2022 तक किसान की आय को दोगुना करने और कृषि-निर्यात आय बढ़ाने के लिए भारत सरकार के लक्ष्यों के बारे में प्रकाश डाला। उन्होंने किसानों को इस क्षेत्र में नए उपकरणों और तकनीकों जैसे आईसीपी, डिजिटल कृषि, इंटरनेट ऑफ थिंग्स आदि को अपनाने के लिए शिक्षित और प्रशिक्षित करने का आग्रह किया।

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डॉ. अशोक कुमार सिंह, उप-महानिदेशक (कृषि विस्तार) और निदेशक, भाकृअनुप-आईएआरआई ने बतौर सम्मानित अतिथि पौधों के संरक्षण पर जोर दिया, क्योंकि औसतन बीमारियों, कीटों और खरपतवारों के कारण फसल को होने वाले नुकसान का अनुमान फसल उत्पादन के 15 से 25% तक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पौधों की सुरक्षा संबंधी रणनीतियों को तैयार करते समय मृदा स्वास्थ्य, पशु स्वास्थ्य और मानव स्वास्थ्य पर विचार करना महत्त्वपूर्ण है। उन्होंने जैव नियंत्रण को अधिक प्रभावी, व्यवहार्य और लोकप्रिय बनाने के लिए रणनीतियों की समीक्षा करने का आग्रह किया।

सम्मानित अतिथि, डॉ. सर्ज सावरी, एडिटर-इन-चीफ, खाद्य सुरक्षा और पूर्व उपाध्यक्ष, इंटरनेशनल सोसायटी फॉर प्लांट पैथोलॉजी, फ्रांस ने पोषण युक्त भोजन के उत्पादन के लिए पारिस्थितिकी तंत्र की रणनीति को अपनाने पर जोर दिया, जो बदले में खाद्य सुरक्षा हासिल करने में मदद करेगा।

डॉ. एम. पी. ठाकुर, अध्यक्ष, इंडियन फाइटोपैथोलॉजिकल सोसाइटी ने इससे पहले 24 देशों के गणमान्य व्यक्तियों और प्रतिनिधियों का स्वागत किया।

डॉ. दिनेश सिंह, सचिव, इंडियन फाइटोपैथोलॉजिकल सोसायटी ने सोसायटी के इतिहास और उसके द्वारा की गई विभिन्न गतिविधियों के बारे में जानकारी दी।

डॉ. पी. के. चक्रवर्ती, अध्यक्ष (निर्वाचित), भारतीय फाइटोपैथोलॉजिकल सोसायटी और सदस्य, कृषि वैज्ञानिक भर्ती बोर्ड ने जैविक और अजैविक तनावों पर जोर दिया जो अग्रणी फसल संयंत्रों में कम पैदावार के लिए योगदान देने वाले कारक हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि जैव सुरक्षा के लिए पौधे की सुरक्षा सर्वोपरि है। डॉ. चक्रवर्ती ने पौधे के रोगजनकों से होने वाली बीमारियों को कृषि के अस्तित्व के लिए खतरा माना। उन्होंने उल्लेख किया कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी, विशेष रूप से ओमिक्स टूल्स में उन्नति के साथ दुनिया पौधों की विकृति के क्षेत्र में नए युग का अनुभव कर रही है।

इस दौरान 9 विभिन्न श्रेणियों में प्लांट पैथोलॉजी क्षेत्र के विभिन्न प्रख्यात शोधकर्ताओं को पुरस्कृत किया गया।

(स्रोत: भाकृअनुप-कृषि ज्ञान प्रबंधन निदेशालय, नई दिल्ली)