सागर द्वीप, पश्चिम बंगाल के अनुसूचित जाति के मछुआरों के सतत मत्स्य विकास के लिए उत्तर-अंफान समर्थन

20 अक्तूबर, 2020, बैरकपुर

भाकृअनुप-केंद्रीय अंतर्स्थलीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर, कोलकाता ने कोविड-19 महामारी की स्थिति के बीच स्थानीय एनजीओ, एसकेएसवीवाईसीएस के साथ मिलकर सागर द्वीप के 250 अनुसूचित जाति के लाभार्थियों को 9,000 किलोग्राम मछली का चारा, 5,000 किलोग्राम चूना और 800 किलोग्राम मछली बीज वितरित किया।

सागर द्वीप या गंगासागर सुंदरबन डेल्टा, पश्चिम बंगाल में स्थित है। द्वीप में रहने वाले ज्यादातर लोग आर्थिक रूप से पिछड़े हुए हैं। यह द्वीप चक्रवात और अन्य प्राकृतिक आपदाओं की चपेट में होने के कारण अत्यधिक असुरक्षित है। हाल के दिनों में सुपर चक्रवात अंफान ने द्वीप में गंभीर क्षति पहुँचाते हुए कई घरों और अन्य बुनियादी ढाँचे को नष्ट कर दिया। अंफान के दौरान भारी ज़्वार की लहरों के कारण तालाबों और कृषि योग्य भूमि में खारे पानी का जलभराव हो गया जिससे द्वीप में मत्स्य पालन और कृषि फसलों का भारी नुकसान हुआ।

संस्थान ने परामर्शी क्षमता का विस्तार करते हुए सागर द्वीप, सुंदरबन के ग्रामीणों को मत्स्य विकास के लिए मत्स्य पालन संबंधी जानकारियाँ वितरित की। इस अवसर पर द्वीप के लगभग 250 अनुसूचित जाति के लाभार्थियों को चूना, मछली का चारा और मछली के बीज वितरित किए गए।

डॉ. बी. के. दास, निदेशक, भाकृअनुप-सिफ़री, बैरकपुर, कोलकाता ने मछुआरों को वैज्ञानिक मत्स्य संस्कृति की सलाह दी और उन्हें एकीकृत कृषि प्रणाली के लिए भी प्रेरित किया जो न केवल पौधे-पशु प्रोटीन, बल्कि व्यक्तिगत परिवारों के लिए स्थायी आजीविका प्रदान करेगा। लाभार्थियों को उनके किचन गार्डन के लिए आम का नमूना भी प्रदान किया गया।

इस अवसर पर आयोजित डॉल्फिन जागरूकता कार्यक्रम में गंगासागर के मछुआरों को डॉल्फिन संरक्षण और जैव विविधता के लिए उनके महत्त्व पर भी सशक्त किया गया।

(स्रोत: भाकृअनुप-केंद्रीय अंतर्स्थलीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर, कोलकाता)