‘प्रतिकूल मौसम की घटनाओं के संदर्भ में जलवायु स्मार्ट कृषि के लिए मृदा एवं जल संरक्षण प्रौद्योगिकी' पर राष्ट्रीय स्तर के आभासी प्रशिक्षण कार्यक्रम का हुआ आयोजन

22 फरवरी-5 मार्च, 2021, उधगमंडलम

भाकृअनुप-भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान, अनुसंधान केंद्र, उधगमंडलम ने 22 फरवरी से 5 मार्च, 2021 तक विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा प्रायोजित ‘प्रतिकूल मौसम की घटनाओं के संदर्भ में जलवायु स्मार्ट कृषि के लिए मृदा एवं जल संरक्षण प्रौद्योगिकी' पर राष्ट्रीय स्तर के आभासी प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया।

डॉ. आर. एस. यादव, निदेशक, भाकृअनुप-भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान, देहरादून, उत्तराखंड ने जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए विभिन्न कृषि एवं अभियांत्रिकी प्रौद्योगिकियों को संबोधित करने के लिए एक नीति तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

सम्मानित अतिथि, डॉ. एन. वी. के. चक्रवर्ती, पूर्व प्रोफेसर और प्रमुख, कृषि भौतिकी विभाग, भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली ने ने सटीक खेती के लिए ड्रोन और भू-स्थानिक आँकड़ों का उपयोग करके वास्तविक समय के चित्रों का उपयोग करते हुए व्यक्तिगत किसानों के लिए सटीक कृषि स्तर की जानकारी के साथ मिट्टी के नक्शे बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

डॉ. देबप्रिया दत्ता, वैज्ञानिक 'जी' / सलाहकार और प्रमुख, सीड और एस & टी प्रोग्राम (एसएसटीपी), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार ने क्षेत्र के किसानों से गतिविधियों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के बारे में प्रतिक्रिया प्राप्त करने की आवश्यकता पर बल दिया।

डॉ. के. कन्नन, केंद्र प्रमुख ने विभिन्न जलवायु परिवर्तन परिदृश्यों के तहत प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, मिट्टी एवं जल संरक्षण प्रौद्योगिकियों से निपटने के लिए बेहतर उपकरणों और विधियों के संयोजन में नई दृष्टि के महत्त्व पर जोर दिया।

इस कार्यक्रम में देश भर से 12 राज्यों के कुल 52 प्रतिभागियों ने आभासी तौर पर भाग लिया।

(स्त्रोत: भाकृअनुप-भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान, देहरादून, उत्तराखंड)