‘भूमि क्षरण तटस्थता प्राप्त करने’ पर हुआ अंतरराष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन

22-24 जुलाई, 2020, देहरादून

भाकृअनुप-भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान, देहरादून, उत्तराखंड ने भारतीय मृदा और जल संरक्षणवादियों का संघ, (आईएएसडब्ल्यूसी) देहरादून और भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (आईसीएफआरई), देहरादून, उत्तराखंड के सहयोग से 22 से 24 जुलाई, 2020 तक ‘भूमि क्षरण तटस्थता प्राप्त करने’ पर एक अंतरराष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया।

International Webinar on “Achieving Land Degradation Neutrality” organized  International Webinar on “Achieving Land Degradation Neutrality” organized

मुख्य अतिथि, डॉ. त्रिलोचन महापात्र, महानिदेशक (भा.कृ.अनु.प.) एवं सचिव (कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग) ने अपने उद्घाटन संबोधन में आजादी के बाद से देश के विभिन्न कृषि पारिस्थितिकीय क्षेत्रों में स्थित अपने प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन संस्थानों के माध्यम से भूमि क्षरण को कम करने में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद के नुकसान और भूमि क्षरण के भारी प्रभाव पर समयबद्ध तरीके से धन निवेश करने व लक्ष्यों को पूरा करने के लिए विशिष्ट कार्यक्रमों को चाक-चौबंद करने हेतु विचार-विमर्श की आवश्यकता पर बल दिया। महानिदेशक ने भूमि क्षरण तटस्थता को प्राप्त करने के लिए एकीकृत पारिस्थितिकी तंत्र/परिदृश्य आधारित विकास को केंद्रीय माना। उन्होंने भूमि आच्छादन, भूमि उत्पादकता और मृदा जैविक कार्बन के संबंध में परिवर्तन विश्लेषण करने के लिए ऐतिहासिक आँकड़ों को सम्मिलित करते हुए संबंधित राष्ट्रीय डेटाबेस बनाने का आग्रह किया, जो भूमि क्षरण तटस्थता को प्राप्त करने के लिए तीन संकेतक हैं।

सम्मानित अतिथि, श्री ए. एस. रावत, आइएफएस, महानिदेशक, आईसीएफआरई ने वन क्षेत्र की भूमि क्षरण समस्या के समाधान के लिए सरकारी पहलों पर प्रकाश डाला। उन्होंने देश के लक्ष्यों के क्षमता निर्माण, ज्ञान साझा करने और कार्यान्वयन प्रदान करने के लिए आईसीएफआरई में भूमि क्षरण तटस्थता पर उत्कृष्ट केंद्र के स्थापना की रूपरेखा भी प्रस्तुत की।

सम्मानित अतिथि, डॉ. एस. के. चौधरी, उप महानिदेशक (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन), भाकृअनुप ने भूमि क्षरण डेटाबेस में सामंजस्य बिठाने और विभिन्न भूमि क्षरण प्रक्रियाओं के माध्यम से हुए नुकसान का मूल्यांकन करने में भाकृअनुप के प्रयासों को रेखांकित किया। उन्होंने भूमि क्षरण तटस्थता को प्राप्त करने के लिए अभिसरण मोड में देश में विभिन्न प्रकार के क्षरण की समस्याओं के समाधान के कार्यान्वयन पर जोर दिया।

वेबिनार ने भारत और विदेशों में विभिन्न संगठनों के 521 से अधिक प्रतिभागियों द्वारा कुल भागीदारी दर्ज की।

(स्रोत: भाकृअनुप-भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान, देहरादून, उत्तराखंड)