समृद्ध उष्णकटिबंधीय जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध अंडमान द्वीप समूह में कई अनूठी देशज प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें सतत उपयोग की महत्वपूर्ण संभावनाएं हैं। दशकों से भाकृअनुप–केन्द्रीय द्वीपीय कृषि अनुसंधान संस्थान, श्री विजय पुरम, देशज जैव विविधता के संरक्षण और सतत उपयोग को बढ़ावा देते हुए द्वीपीय समुदायों को सशक्त बनाने के लिए कार्य कर रहा है।
इसका एक उल्लेखनीय उदाहरण दुर्लभ, स्थानिक प्रजाति गार्सिनिया धानीखारिएन्सिस (Garcinia dhanikhariensis) पर संस्थान का अग्रणी कार्य है। डॉ. पूजा बोहरा और डॉ. अजित अरुण वामन, वरिष्ठ वैज्ञानिक, भाकृअनुप-सीआईएआरआई, के अनुसंधान में इस फल में एंटीऑक्सीडेंट, एंथोसायनिन और हाइड्रॉक्सीसिट्रिक एसिड सहित कई जैव सक्रिय यौगिकों की पहचान की गई। एक नवीन फल फसल के रूप में इसकी क्षमता को पहचानते हुए वैज्ञानिकों ने राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर इस फल की एक विशिष्ट पहचान स्थापित करने के लिए इसे ‘अंडमान कोकम’ नाम दिया। संस्थान ने इसके उपयोग और बाजार क्षमता को बढ़ाने के लिए अंडमान कोकम सिरप, छिलके की कैंडी और निर्जलित छिलके सहित मूल्यवर्धित उत्पाद भी विकसित किए।

पर्यटन द्वारा स्थानीय उपज को बढ़ावा देने के अवसर उपलब्ध होने के कारण ये उत्पाद आगंतुकों को द्वीपों के अनूठे देशज संसाधनों और विशिष्ट स्वादों से परिचित कराकर कृषि-इकोटूरिज्म में भी योगदान देते हैं। यह पहल जैव विविधता संरक्षण को आजीविका सृजन के साथ भी जोड़ती है, क्योंकि मूल्यवर्धित उत्पादों के लिए फल के छिलके का उपयोग आर्थिक अवसर पैदा करता है और साथ ही इस सूक्ष्म-स्थानिक प्रजाति के संरक्षण को प्रोत्साहित करता है।
वैज्ञानिक नवाचार से महिला उद्यमिता तक
इन उत्पादों को उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के लिए भाकृअनुप-सीआईएआरआई ने दिसंबर 2025 में दक्षिण अंडमान की शिक्षित युवा सुश्री स्नेहा होरो को तकनीकी जानकारी हस्तांतरित की। उन्होंने अपनी मित्र सुश्री एम. वेन्नी के साथ मिलकर संस्थान के तकनीकी मार्गदर्शन में ‘आइलैंड्स रास एंड रूट’ की स्थापना की, जो उद्यम (UDYAM) और एफएसएसएआई (FSSAI) के तहत पंजीकृत एक फर्म है।
अंडमान कोकम उत्पादों को फरवरी 2026 में भाकृअनुप-सीआईएआरआई के किसान मेले में आधिकारिक रूप से लॉन्च किया गया और इसके बाद लोकप्रिय आइलैंड फूड फेस्टिवल 2026 में प्रदर्शित किया गया। उत्पादों को उपभोक्ताओं से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली और दोनों आयोजनों में उन्होंने काफी ध्यान आकर्षित किया। प्रदर्शनियों के बाद भी इनकी लोकप्रियता बनी रही और अभी तक कोई समर्पित खुदरा बिक्री केंद्र नहीं होने के बावजूद उद्यमियों को टेलीफोन कॉल और सीधे संपर्क के माध्यम से ऑर्डर प्राप्त हुए।
आशाजनक प्रतिफल और विस्तार की संभावनाएं
एक ही फलन मौसम के दौरान उद्यमियों ने ₹47,255 का राजस्व अर्जित किया, जिसमें लाभ–लागत (बी) अनुपात 1.71 रहा। उत्पादन और बाजार पहुंच के विस्तार के साथ आने वाले वर्षों में प्रतिफल बढ़ने की उम्मीद है।
एक दुर्लभ देशज प्रजाति का उपयोग अंडमान कोकम उत्पादों को एक विशिष्ट पहचान प्रदान करता है और उनके अद्वितीय विक्रय प्रस्ताव के रूप में कार्य करता है। हालांकि, कच्चे माल की सीमित उपलब्धता उत्पादन को बड़े पैमाने पर बढ़ाने में एक प्रमुख चुनौती बनी हुई है। फिलहाल, यह दुर्लभता इन उत्पादों को सीमित-संस्करण का आकर्षण भी प्रदान करती है।

आपूर्ति संबंधी बाधा को दूर करने और भविष्य में विस्तार को समर्थन देने के लिए आईसीएआर-सीआईएआरआई पूरे द्वीप समूह के किसानों को रोपण सामग्री उपलब्ध करा रहा है, जिनमें से कई ने इस प्रजाति की खेती शुरू कर दी है।
डॉ. जय सुंदर, निदेशक (कार्यवाहक), भाकृअनुप-सीआईएआरआई, के नेतृत्व में यह पहल दर्शाती है कि किस प्रकार वैज्ञानिक अनुसंधान को मूल्यवर्धित उत्पादों, महिला-नेतृत्व वाली उद्यमिता और स्थानीय आजीविका के अवसरों में परिवर्तित किया जा सकता है, साथ ही अंडमान द्वीप समूह की अनूठी जैव विविधता के संरक्षण को भी बढ़ावा दिया जा सकता है।
(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय द्वीपीय कृषि अनुसंधान संस्थान, श्री विजय पुरम)







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