जुन्हेबोटो, नागालैंड में बैकयार्ड पोल्ट्री के माध्यम से आजीविका और पोषण सुरक्षा में वृद्धि

जुन्हेबोटो, नागालैंड में बैकयार्ड पोल्ट्री के माध्यम से आजीविका और पोषण सुरक्षा में वृद्धि

नागालैंड में पशु-आधारित प्रोटीन, विशेष रूप से मांस और अंडों की मांग और उपलब्धता के बीच एक महत्वपूर्ण अंतर है। पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवा विभाग, नागालैंड सरकार की वार्षिक प्रशासनिक रिपोर्ट (2022–23) के अनुसार, राज्य में मांस की वार्षिक आवश्यकता 52.37 मीट्रिक टन है, जबकि उपलब्धता 23.87 मीट्रिक टन है, जिसके परिणामस्वरूप 38.50 मीट्रिक टन की कमी दर्ज की गई है। इसी प्रकार, 1,870 लाख अंडों की वार्षिक आवश्यकता के मुकाबले उपलब्धता केवल 350.42 लाख है, जिससे काफी कमी बनी हुई है। प्रति व्यक्ति मांस की उपलब्धता अनुशंसित 70 ग्राम के मुकाबले 40 ग्राम प्रतिदिन दर्ज की गई है, जबकि प्रति व्यक्ति अंडों की वार्षिक उपलब्धता 182.5 अंडों की आवश्यकता की तुलना में 22 अंडे है। यह स्थिति पोषण सुरक्षा में सुधार और आजीविका के स्थायी अवसर पैदा करने के लिए स्थानीय पोल्ट्री उत्पादन को मजबूत करने की आवश्यकता को रेखांकित करती है।

Enhancing Livelihoods and Nutritional Security through Backyard Poultry in Zunheboto, Nagaland

इस चुनौती का समाधान करते हुए कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके), जुन्हेबोटो ने नाबार्ड प्रायोजित कार्यक्रम “कम लागत वाले अंडा इनक्यूबेटर और बैकयार्ड पोल्ट्री उत्पादन के माध्यम से महिला स्वयं सहायता समूहों की सतत आजीविका और पोषण सुरक्षा को बढ़ावा देना” लागू किया। इस पहल का उद्देश्य वैज्ञानिक पोल्ट्री प्रबंधन के माध्यम से महिला किसानों को सशक्त बनाना, परिवारों की पौष्टिक भोजन तक पहुंच में सुधार करना और बैकयार्ड पोल्ट्री पालन के माध्यम से अतिरिक्त आय उत्पन्न करना था।

कार्यक्रम के तहत चयनित महिला लाभार्थियों को उन्नत रेनबो रूस्टर नस्ल के गुणवत्तापूर्ण एक दिन के चूजे, शुरुआती 20 दिनों के लिए आहार, टीकाकरण तथा दवा सहायता, फीडर, ड्रिंकर और खेत पर चूजा उत्पादन के लिए कम लागत वाले अंडा इनक्यूबेटर उपलब्ध कराए गए। केवीके वैज्ञानिकों ने लाभार्थियों को वैज्ञानिक पक्षी प्रबंधन पद्धतियां अपनाने और रोग निवारण को मजबूत करने में मदद करने के लिए नियमित प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और क्षेत्र-स्तरीय सहायता प्रदान की। कम लागत वाले इनक्यूबेटरों की शुरुआत विशेष रूप से महत्वपूर्ण रही, क्योंकि इससे किसानों को स्थानीय स्तर पर चूजों का उत्पादन शुरू करने और बाहरी स्रोतों पर अपनी निर्भरता कम करने में मदद मिली।

Enhancing Livelihoods and Nutritional Security through Backyard Poultry in Zunheboto, Nagaland

कार्यक्रम ने घरेलू पोषण और आय सृजन के संदर्भ में उत्साहजनक परिणाम दिए हैं। रिपोर्टिंग अवधि के दौरान लाभार्थी परिवारों ने 1,380 पक्षियों का उपभोग किया, जिससे पशु-आधारित प्रोटीन तक पहुंच में सुधार हुआ, जबकि आय अर्जित करने के लिए अन्य 2,135 पक्षियों को बेचा गया। प्रति परिवार मांस की औसत उपलब्धता में 66.7 किलोग्राम की वृद्धि हुई और लाभार्थियों ने सामूहिक रूप से ₹30,80,360 की आय अर्जित की। कार्यक्रम में 22,618 अंडों का उत्पादन भी दर्ज किया गया, जिनका या तो परिवारों द्वारा उपभोग किया गया या उन्हें बेचा गया। प्रत्येक लाभार्थी ने अब तक ₹32,592 की शुद्ध आय अर्जित की, जो ग्रामीण महिलाओं के लिए पूरक आजीविका गतिविधि के रूप में बैकयार्ड पोल्ट्री की क्षमता को प्रदर्शित करती है।

किसानों के खेतों में स्थापित कम लागत वाले इनक्यूबेटरों ने भी नियमित रूप से चूजों का उत्पादन शुरू कर दिया है। इस विकास से आने वाले वर्षों में स्थानीय स्तर पर चूजों की उपलब्धता में सुधार होने और लाभार्थी गांवों तथा पड़ोसी क्षेत्रों की आवश्यकताओं को पूरा करने की उम्मीद है, साथ ही यह बैकयार्ड पोल्ट्री पालन की निरंतरता और विस्तार को समर्थन प्रदान करेगा।

Enhancing Livelihoods and Nutritional Security through Backyard Poultry in Zunheboto, Nagaland

केवीके, जुन्हेबोटो द्वारा कार्यान्वित नाबार्ड प्रायोजित पहल यह प्रदर्शित करती है कि वैज्ञानिक पोल्ट्री प्रबंधन, किफायती प्रौद्योगिकियां और निरंतर तकनीकी सहायता पोषण संबंधी चुनौतियों का समाधान करते हुए आजीविका के अवसर कैसे पैदा कर सकती हैं। महिला स्वयं सहायता समूहों की सदस्यों को घरेलू उपभोग और बिक्री के लिए पोल्ट्री और अंडों का उत्पादन करने में सक्षम बनाकर कार्यक्रम ने उनकी आर्थिक भागीदारी को मजबूत किया है और आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित किया है। यह पहल महिला-नेतृत्व वाली ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने, पशु-आधारित प्रोटीन तक पहुंच में सुधार करने और जुन्हेबोटो जिले तथा नागालैंड के अन्य हिस्सों में समावेशी कृषि विकास को समर्थन देने के लिए एक आशाजनक मॉडल प्रस्तुत करती है।

(स्रोत: केवीके जुन्हेबोटो, नागालैंड विश्वविद्यालय, लुमामी)

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