श्री राधा मोहन सिंह द्वारा भाकृअनुप सोसायटी की 86वीं वार्षिक आम बैठक का उद्घाटन

18th फरवरी 2015, नई दिल्ली

Shri Radha Mohan Singh Inaugurates 86th Annual General Meeting of the ICAR Societyश्री राधा मोहन सिंह, केन्द्रीय कृषि मंत्री एवं भाकृअनुप सोसायटी के अध्यक्ष ने कहा है कि कृषि व्यवसाय, उत्पादन प्रणाली, अनुसंधान संस्थानों, स्थानीय प्रशासन, अन्य किसानों, घरेलू और वैश्विक बाजार तथा अन्य भागीदारों के साथ किसानों को संपर्क बनाना होगा जिससे उनके लिए कृषि अधिक लाभप्रद हो सके। कृषि मंत्री, राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर में भाकृअनुप सोसायटी की 86वीं वार्षिक आम बैठक को आज यहाँ संबोधित कर रहे थे।

भाकृअनुप की सराहना करते हुए श्री राधा मोहन सिंह ने कहा ‘‘भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा कृषि विकास के क्षेत्र में 85 वर्षों से अधिक समय से सफलतापूर्वक महत्वपूर्ण योगदान दिया जा रहा है। चुनौतियों के बावजूद  परिषद द्वारा समय-समय पर अनेक उल्लेखनीय सफलताएं हासिल की गईं हैं जिन्हें देश की कृषि प्रगति में मील का पत्थर कहा जा सकता है। इनमें खेत उत्पादकता व कृषि आय में वृद्धि, संस्थान निर्माण, मानव संसाधन, नई तकनीकों का विकास, कृषि विविधीकरण, नए अवसर पैदा करना तथा जानकारी के नए स्रोतों का विकास करना शामिल हैं। कृषि में नवीन तकनीकों के तालमेल से गरीबी एवं भुखमरी को कम कर पाने के अतिरिक्त निसन्देह भूख के चंगुल से अनेक मासूम जिन्दगियां बचाई जा सकीं हैं।  भाकृअनुप, भारतीय कृषि को वास्तविक अर्थों  में कहीं अधिक टिकाऊ और लाभप्रद बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।’’

कृषि शिक्षा और अनुसंधान के प्रसार एवं सुदृढ़ीकरण के अतिरिक्त किसानों तक इसकी पहुंच बनाने के लिए कृषि मंत्री ने सरकार द्वारा क्रियान्वित विभिन्न नई योजनाओं और पहलों की जानकारी भी दी।

Shri Radha Mohan Singh Inaugurates 86th Annual General Meeting of the ICAR Societyइस अवसर पर बैठक को संबोधित करते हुए डा. संजीव कुमार बालियान, केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री ने ‘लैब टु लैंड’ कार्यक्रम पर जोर देते हुए सुझाव दिया कि इस प्रयास में हमारा दृष्टिकोण प्रत्येक कृषि इकोलॉजिकल क्षेत्र के लिए स्थान विशिष्ट उपयुक्त तकनीकों का उपयोग कर कृषि में किसान केन्द्रित प्रगति की दिशा में अग्रसर होना चाहिए। यह भी महसूस किया जा रहा है कि हमारी अनुसंधान प्रणाली को, किसानों तक सीधे सूचना पहुंचाने में सक्रिय भूमिका अदा करनी चाहिए तथा विभिन्न खेत पर्यावरण के लिए कहीं अधिक उपयुक्त प्रक्रियाओं, कार्यप्रणालियों तथा तकनीकों के विकास पर किसानों का फीडबैक हासिल करना चाहिए।

Shri Radha Mohan Singh Inaugurates 86th Annual General Meeting of the ICAR Societyश्री मोहनभाई कल्याणजीभाई कुंडारीया, केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री ने कृषि में परंपरागत ज्ञान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा ‘‘सामान्य रूप से, हमारा खेतीहर समुदाय तथा विशेष रूप से जनजातीय और अन्य दुर्गम क्षेत्र घरेलू ज्ञान और नवप्रवर्तन के खजाने हैं। हमें इन मूल्यवान जानकारियों को खोज निकालना चाहिए और उसको दस्तावेज का रूप देना चाहिए क्योंकि ये पर्यावरण के अनुकूल कृषि क्रियाओं को अपनाने के लिए तथा कृषि क्षेत्र में महसूस की जा रही कुछ समस्याओं के कम लागत के समाधान प्रस्तुत करने में निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण स्रोत हो सकते हैँ।’’

इस विशेष अवसर पर गणमान्यों ने कृषि, बागवानी और कटाई उपरांत प्रबंधन से जुड़े भाकृअनुप प्रकाशनों और उत्पादों का विमोचन किया। ‘कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा-नये कदम, बढ़ते कदम’ नामक विडियो फिल्म भी जारी की गई।

इससे पूर्व डा. एस. अय्यप्पन, सचिव, डेयर और महानिदेशक, भाकृअनुप ने परिषद की हाल की उपलब्धियों पर प्रस्तुति दी और 12वीं योजना अवधि में भाकृअनुप की नयी पहलों और लक्ष्यों की विस्तृत जानकारी दी।

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विभिन्न राज्यों के कृषि और पशुपालन मंत्री, भाकृअनुप शासी निकाय के सदस्य, राष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि, भाकृअनुप के वरिष्ठ अधिकारीगण और वैज्ञानिकों ने इस वार्षिक आम बैठक में भाग लिया।

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श्री आर. राजगोपाल, अपर सचिव, डेयर और सचिव, भाकृअनुप ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

(स्रो: डीकेएमए, आईसीएआर)