भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का 87वां स्थापना दिवस और पुरस्कार समारोह

प्रधानमंत्री द्वारा दूसरी हरित क्रांति को नई दृष्टि और नये आयामों के साथ साकार करने का आह्वान

25 जुलाई 2015, पटना

87th Foundation Day and ICAR award ceremonyमाननीय प्रधानमंत्री ने आधुनिक समय में कृषि से संबंधित चुनौतियों से निपटने के लिए नई दृष्टि, नये आयाम और नये उद्देश्यों के साथ दूसरी हरित क्रांति का आरंभ करने के लिए कृषि वैज्ञानिकों एवं योजनाकारों का आह्वान किया। माननीय प्रधानमंत्री आज मुख्य अतिथि के रूप में भाकृअनुप के 87वें स्थापना दिवस एवं पुरस्कार समारोह को संबोधित कर रहे थे। प्रधानमंत्री ने कृषि वैज्ञानिकों एवं किसानों के योगदान की प्रशंसा करते हुए सुझाव दिया कि राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय बाजार में लाभकारी कृषि उत्पादों को पहचान कर उन पर शोध कार्यों को आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने अपने इस विचार को पुनः दुहराया कि अपार प्राकृतिक संसाधनों और कृषि प्रयोग की इच्छा से भरपूर पूर्वी भारत के किसानों में सामर्थ्य है कि वे दूसरी हरित क्रांति की अगुआई कर सकें।

प्रधानमंत्री ने आईसीएआर द्वारा स्थापना दिवस को पटना में आयोजित करने की पहल की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि सर्वप्रथम बिहार में, 1905 में स्थापित कृषि अनुसंधान संस्थान द्वारा देश में व्यवस्थित कृषि अनुसंधान कार्य की शुरुआत हुई थी। ‘प्रयोगशाला से खेत तक’ के कार्यक्रम पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कृषि वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि वे किसानों को कृषि प्रौद्योगिकी के विकास व प्रसार में अपना भागीदार बनाएं। वैज्ञानिकों द्वारा गांवों को अपनाने से किसानों के जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव लाया जा सकता है। उन्होंने इस पर संतोष व्यक्त किया कि आईसीएआर ने ‘प्रयोगशाला से खेत तक’ को साकार करते हुए, इस विचार को योजना का स्वरूप प्रदान किया और आज इनका शुभारंभ किया।

प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया कि नहरों, अनाज कोठारों जैसी बुनियादी संरचनाओं के निर्माण के लिए वास्तुकला विशेषज्ञों के साथ संबंध विकसित किया जाए, जिससे इस संदर्भ में विकसित  नई तकनीकों का लाभ कृषि जगत उठा सके। उन्होंने यह भी कहा कि गांवों में प्रचुर पारंपरिक ज्ञान विद्यमान है, जिसको परिष्कृत करने की आवश्यकता है। उन्होंने वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि प्रति हैक्टर उत्पादकता वृद्धि के लिए वे अपने ज्ञान को किसानों की दक्षता के साथ जोड़ें। इसके साथ ही माननीय प्रधानमंत्री ने राष्ट्र की आवश्यकता की दृष्टि से इस वर्ष दालों और तिलहन की बढ़ी जोत पर प्रसन्नता जाहिर की।  

प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से मधुमक्खी पालन से संबंधित प्रौद्योगिकी के प्रसार पर जोर दिया जिससे किसानों की आय में वृद्धि हो और शहद के वैश्विक बाजार का लाभ उठाया जा सके। उन्होंने जैविक खेती को व्यापक बनाने का भी सुझाव दिया। प्रधानमंत्री ने केसरिया, हरी, श्वेत और नीली क्रांति के लिए वैज्ञानिकों का आह्वान किया जो क्रमशः ऊर्जा, कृषि, दूध और मात्स्यिकी से संबंधित हैं।

प्रधानमंत्री ने सरदार पटेल उत्कृष्ट भाकृअनुप संस्थान पुरस्कार, जगजीवन राम अभिनव किसान पुरस्कार(राष्ट्रीय), कृषि में विविधता के लिए एन जी रंगा कृषक पुरस्कार तथा उत्कृष्ट कृषि पत्रकारिता के लिए चौ. चरण सिंह सिंह पुरस्कार प्रदान किये। इस अवसर पर उन्होंने भाकृअनुप द्वारा विकसित मृदा परीक्षण किट को जारी करते हुए किसानों को वितरित किया।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री द्वारा भाकृअनुप की नई योजनाओं फार्मर फर्स्ट, आर्या, स्टुडेंट रेडी तथा मेरा गाँव मेरा गौरव का भी शुभारंभ किया गया। उन्होंने आईसीएआर विजन-2050 को भी जारी किया, जिसमें वर्ष 2050 तक देश में खाद्य, पोषण और आजीविका सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रोडमैप प्रस्तुत किया गया है। परिषद के अंतर्गत देश में कार्यरत 100 संस्थानों के लिए भी विजन-2050 विकसित किया गया है।

बिहार के राज्यपाल श्री केशरी नाथ त्रिपाठी और बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने इस अवसर पर उपस्थित होकर समारोह की गरिमा बढ़ाई।

केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री राधा मोहन सिंह ने समारोह की अध्यक्षता की और प्रधानमंत्री का स्वागत करते हुए अपने संबोधन में भाकृअनुप की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बिहार के निवासियों और कृषि वैज्ञानिकों की ओर से बिहार में कृषि शिक्षा तथा अनुसंधान को बढ़ावा देने वाली योजनाओं की मंजूरी देने के लिए प्रधानमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया। कृषि मंत्री ने प्रधानमंत्री को विश्वास दिलाया कि बिहार में स्थित भाकृअनुप के संस्थानों तथा कृषि विज्ञान केन्द्रों के माध्यम से दूसरी हरित क्रांति की संभावना को साकार किया जायेगा।

केन्द्रीय कृषि राज्यमंत्री डा. संजीव कुमार बालियान और केन्द्रीय कृषि राज्यमंत्री श्री मोहन भाई कुंडारिया भी इस समारोह में सम्मानित अतिथि के रूप में उपस्थित थे।

केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्रियों द्वारा भाकृअनुप के विभिन्न वर्गों के पुरस्कारों को प्रदान किया गया। इस वर्ष 18 वर्गों के अंतर्गत कुल 84 पुरस्कार प्रदान किये गए जिनमें तीन संस्थानों, एक एआईसीआरपी, नौ केवीके, 55 वैज्ञानिकों, सात किसानों और छह कृषि पत्रकारों को प्रदान किया गया। पुरस्कार विजेताओं में 15 महिला वैज्ञानिक भी शामिल हैं। पहली बार उत्कृष्ट कार्य प्रदर्शन के लिए भाकृअनुप में कार्यरत प्रशासनिक, तकनीकी और सहायक कर्मियों को भी पुरस्कार प्रदान किये गए।

डा. एस. अय्यप्पन, सचिव डेयर एवं महानिदेशक भाकृअनुप द्वारा गणमान्यों का स्वागत किया गया और भाकृअनुप की उपलब्धियों के बारे में संक्षिप्त प्रस्तुति दी गयी। इस क्रम में उन्होंने परिषद के भावी कार्यकलापों की रूपरेखा पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा पिछले वर्ष स्थापना दिवस के अवसर पर दिये गए सुझावों पर अमल करते हुए प्रारंभ की गई नई योजनाओं और पहलों से संबंधित उपलब्धियों से अवगत कराया।

इस समारोह में भाकृअनुप के प्रशासनिक निकाय के सदस्य, भाकृअनुप मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी, भाकृअनुप संस्थानों के निदेशक, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के अध्यक्ष एवं प्रतिनिधि, कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपति तथा भाकृअनुप एवं कृषि विश्वविद्यालायों के वैज्ञानिकों और कर्मचारियों ने भागीदारी की।

(स्रोत: कृषि ज्ञान प्रबंधन निदेशालय, भाकृअनुप)