अखिल भारतीय समन्वित सोयाबीन अनुसंधान परियोजना की वार्षिक समूह बैठक

5-7 अप्रैल, 2016, धारवाड़

अखिल भारतीय समन्वित सोयाबीन अनुसंधान परियोजना की 46वीं वार्षिक समूह बैठक का आयोजन भाकृअनुप – भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्‍थान, इन्‍दौर और कृषि विज्ञान विश्‍वविद्यालय, धारवाड़ द्वारा संयुक्‍त रूप से किया गया।

 Annual Group meeting of All India Coordinated Research Project on Soybean  Annual Group meeting of All India Coordinated Research Project on Soybean

प्रो. डी.पी. बिरादर, कुलपति, कृषि विज्ञान विश्‍वविद्यालय, धारवाड़ ने अपने संबोधन में सोयाबीन वैज्ञानिकों से सोयाबीन की खेती विशेषकर जलवायु परिवर्तन से जुडे मुद्दों में उभर रही समस्‍याओं का समाधान तलाशने के लिए कहा।

डॉ. बी.बी. सिंह, सहायक महानिदेशक (ओ एंड पी), भाकृअनुप ने अनुसंधान कार्य और समुचित प्रलेखन करने में सोयाबीन वैज्ञानिकों की कहीं अधिक प्रतिबद्धता और गंभीरता पर बल दिया। उन्‍होंने इस बात पर बल दिया कि अनुसंधान अनुदान को समन्वित केन्‍द्रों के प्रदर्शन के आधार पर जारी किया जाएगा।

वार्षिक समूह बैठक के दौरान संबंधित प्रधान अन्‍वेषकों द्वारा पादप प्रजनन, सस्‍यविज्ञान, कीटविज्ञान, पादप रोगविज्ञान और सूक्ष्‍म जीवविज्ञान के अनुसंधान परिणामों को प्रस्‍तुत किया गया और  खरीफ 2016 के लिए तकनीकी कार्यक्रम तैयार किए गए।

सिफारिशें :

  • उपज, परिपक्‍वता अवधि, प्रमुख कीटों व रोगों के विरूद्ध प्रतिरोधिता स्‍तर के आधार पर सोयाबीन की छ: किस्‍मों की पहचान विभिन्‍न जोन के लिए की गई : उत्‍तर-पूर्वी जोन के लिए एमएसीएस 1407 व आरकेएस 113; दक्षिणी जोन के लिए DSb 23-2 एवं केडीएस 726; मध्‍य जोन के लिए आरवीएस 2002-4; उत्‍तरी मैदानी जोन के लिए एसएल 955.
  • मध्‍य और दक्षिणी जोन के लिए वाईएमवी प्रतिरोधी सोयाबीन किस्‍मों को विकसित करने हेतु नई पहल की गई।
  • खरीफ 2016 के लिए 31 सोयाबीन किस्‍मों का 16645 क्विंटल प्रजनक बीज उत्‍पादन का अनंतिम लक्ष्‍य निर्धारित किया गया।
  • प्रमुख कीटों और रोगों के विरूद्ध प्रतिरोधिता हेतु क्षमताशील प्रदाताओं की पहचान की गई और संकरण कार्यक्रम में उपयोग हेतु सिफारिश की गई।
  • असोम में विलम्बित बुवाई परिस्थितियों के तहत अगस्‍त के प्रथम सप्‍ताह में  बुवाई के समय की सिफारिश की गई।
  • किस्‍मीय विकास में लगने वाले समय को कम करने के लिए पीढ़ियों के त्‍वरित उन्‍नयन के लिए रणनीति बनाई गई।
  • उत्‍तर-पर्वतीय क्षेत्र से देसी सोयाबीन का संकलन तथा संरक्षण किया जाएगा।

(स्रोत : भाकृअनुप – भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्‍थान, इन्‍दौर)