‘जय किसान, जय विज्ञान‘ समारोह का आयोजन

25th दिसंबर 2015, नई दिल्‍ली

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्‍थान, नई दिल्‍ली सहित आईसीएआर के नई दिल्‍ली स्थित सात अनुसंधान संस्‍थानों द्वारा 25 दिसंबर को जय किसान, जय विज्ञान सप्‍ताह के अंतर्गत किसान-वैज्ञानिक संवाद आयोजन पूसा संस्‍थान के परिसर में किया गया। इस कार्यक्रम में विभिन्न राज्‍यों के लगभग 300 किसानों ने भाग लिया एवं वैज्ञानिकों से कृषि के विभिन्न पहलुओं पर विस्‍तार से चर्चा-परिचर्चा की।

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इस कार्यक्रम के मुख्‍य अतिथि केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री, डॉ. संजीव कुमार बालियान ने अपने संबोधन के दौरान पूर्व प्रधानमंत्रियों, माननीय चौधरी चरणसिंह एवं माननीय अटल बिहारी वाजपेयी के द्वारा किसानों के हित में चलाए गए कार्यक्रमों को याद किया और वैज्ञानिकों एवं किसानों से एकजुट होकर कृषि में नए कीर्तिमान स्‍थापित करने का आह्वान किया। उन्‍होंने किसान-वैज्ञानिकों को सीधा जोड़ने के लिए ''मेरा गांव मेरा गौरव'' कार्यक्रम के बारे में भी प्रकाश डाला। मुख्‍य अतिथि ने किसानों को अपनी आय बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाने पर जोर दिया। राष्ट्रीय कृषि विपणन पर एक ठोस पहल की जरूरत को उजागर किया और कहा कि किसानों को उनके उत्‍पाद का सही मूल्‍य इसके द्वारा दिया जा सकता है।

विभिन्न राज्‍यों के चयनित उन्‍नतशील कृषकों को माननीय मुख्‍य अतिथि ने पुरस्‍कृत कर सम्‍मानित भी किया ।

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भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उपमहानिदेशक, फसल विज्ञान, डॉ. जीत सिंह संधु ने वैज्ञानिकों से आह्वान किया कि वे नवीनतम प्रौद्योगिकियों को कृषकों के खेत तक पहुँचाने के लिए और अधिक सक्रिय भूमिका निभाए।

डॉ. अशोक कुमार सिंह, उपमहानिदेशक, कृषि प्रसार ने विभिन्न कृषि विज्ञान केंद्रों पर मनाए जा रहे ''जय किसान-जय विज्ञान'' सप्‍ताह का जिक्र करते हुए कृषि उन्‍नति में कृषि विज्ञान केंद्रों द्वारा चलाए जा रहे प्रसार कार्यक्रमों की विस्‍तार से चर्चा की।

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्‍थान के निदेशक डॉ. त्रिलोचन महापात्र ने किसानों से अनुरोध किया कि संस्‍थान की विभिन्न उन्‍नत तकनीकों को अपनी कृषि पद्धति में वैज्ञानिकों की सहभागिता से अपनाकर अपने उत्‍पादन एवं आय को बढ़ाएँ। किसानों की समृद्धि हेतु इस संस्‍थान द्वारा कई प्रसार कार्यक्रम पूरे देशभर में चलाए जा रहे हैं। निदेशक ने समस्‍त कृषकों को राष्‍ट्रीय कृषि मेला, पूसा नई दिल्‍ली, 9-11 मार्च 2016 में आने का आमंत्रण दिया।

‘जय किसान, जय विज्ञान‘ समारोह का आयोजन किसान-वैज्ञानिक संवाद के अंतर्गत विभिन्न विशेषज्ञों ने अपने विचार किसानों के सम्‍मुख प्रस्‍तुत किए। डॉ. ए.के. सिंह ने पूसा संस्‍थान की उन्‍नत प्रौद्योगिकियों के बारे में विस्‍तार से चर्चा की और किसानों को इन्‍हें अपनाने की सलाह दी। डॉ. प्रद्युम्‍न कुमार ने मक्‍के की लाभकारी खेती के बारे में विस्‍तार से बताया और कहा कि इसकी वैज्ञानिक खेती करके अधिक लाभ कमाया जा सकता है। जैव विविधता संरक्षण पर डॉ. बी.एस. फोगट ने जोर दिया और कहा कि आने वाली पीढ़ि‍यों के लिए जैव विविधता का संरक्षण अति आवश्‍यक है। समेकित पीड़क प्रबंधन पर विस्‍तार से चर्चा डॉ. डी.बी. आहूजा ने की और किसानों को बहुत ही सरल भाषा में इसकी महत्‍ता को बताया और इसे आज की आवश्‍यकता भी कहा। डॉ. हिमांशु पाठक ने जलवायु परिवर्तन पर कृषि में इसके महत्‍व को समझाया और कृषकों को बदलते जलवायु परिवेश में किस प्रकार की कृषि करनी चाहिए, उस पर सलाह दी। कार्यक्रम में किसान प्रश्नोत्तरी का भी आयोजन किया गया और सही जवाब देने वाले कृषकों को पुरस्‍कृत भी किया गया।

उल्‍लेखनीय है कि इस कार्यक्रम में परिसर में स्थित संस्‍थानों के निदेशकों, क्रमश: डॉ. त्रिलोचन महापात्र (आई.ए.आर.आई.), डॉ. के.सी. बंसल (एन.बी.पी.जी.आर.), डॉ. सी. चट्टोपाध्‍याय (एन.सी.आई.पी.एम.), डॉ. टी.आर.शर्मा (एन.आर.सी.पी.बी.), डॉ. पी.एस. बिरथल (एन.आई.ए.पी.), डॉ. पी. कुमार (आई.आई.एम.आर.), डॉ. यू.सी. सूद (आई.ए.एस.आर.आई.) ने सक्रिय भागीदारी कर कार्यक्रम को सफल व उपयोगी बनाया।

कार्यक्रम में धन्‍यवाद ज्ञापन संयुक्त निदेशक प्रसार डॉ. जे.पी. शर्मा द्वारा दिया गया। उनके द्वारा किसानों को विपणन के गुण सीखने पर जोर दिया गया जिससे कि उनके उत्‍पादों का उचित मूल्‍य बाजार में मिल सके।

(स्रोतःआईएआरआई मीडिया सेल)