‘विचार मंच’ के आयोजन में कविता पाठ

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के द्वारा ‘विचार मंच’ का आयोजन 22 दिसंबर, 2015 को राष्ट्रीय कृषि विज्ञान केन्द्र में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. एस. अय्यप्पन, सचिव, डेयर एवं महानिदेशक, भाकृअनुप ने की।

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 सुप्रसिद्ध कवि श्री लक्ष्मी शंकर वाजपेयी  और कवयित्री सुश्री ममता किरण को काव्य पाठ के लिए आमंत्रित किया गया था। श्री वाजपेयी जी ने अपनी मधुर व गंभीर आवाज में कविता पाठ से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके द्वारा सुनायी गयी प्रमुख कविताएं इस प्रकार हैं: बदला है महज कातिल और उनके मुखौटे, वो कत्ल के अंदाज, वो खंजर नहीं बदले। उस शख्स की तलाश मुझे आज तलक है, जो शाह के दरबार में, जाकर नहीं बदले। वाजपेयी जी के यथार्थवादी दोहे हैं: चार लोग परिवार के बैठे तो हैं साथ, किन्तु मोबाइल में गड़े चेहरे आंखे हाथ। दफ्तर से घर आ गये दोनों थके हार, पत्नी ढूंढे केतली पति ढूंढे अखबार। श्री वाजपेयी आकाशवाणी के उपमहानिदेशक  पद से सेवानिवृत्त  है। ये देश के उन प्रतिष्ठित कविओं में से हैं जिन्हें विश्व के विभिन्न देशों में कविता पाठ के लिए आमंत्रित किया जा चुका है। इनकी परंपराओं को सहजने वाली और यथार्थवादी कविताएं पाठ्यक्रमों में भी शामिल की गई हैं। इनकी कृतियां 'खुशबू तो बचा ली जाए' तथा 'बेज़ुबान दर्द' सहित तीन पुस्तकों का प्रकाशन हो चुका है।

सुप्रसिद्ध कवयित्री सुश्री ममता किरण का काव्य पाठ मानवीय संवेदनाओं से परिपूर्ण था। ममता जी द्वारा किये गये कविता पाठ में कहीं आधुनिकता की दहलीज पर पारिवारिक मूल्यों के विघटन की वेदना है तो कहीं बिखरती मानवीय संवेदना की अनुपस्थिति। इन दोनों कवियों के काव्य पाठ को उपस्थित अधिकारियों द्वारा खूब सराहा गया। विविध समकालीन विषयों पर ममता जी की कविताएं आकाशवाणी, दूरदर्शन के साथ-साथ समाचार पत्रों एवं पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। इनकी कविताएं परिवेश, परंपरा और रिश्तों का गान है।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. अय्यप्पन ने काव्य पाठ की संवेदित शब्दों में प्रशंसा की और दोनों कवियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि संसारिकता में रमे हुए लोगों के लिए कविता एक राहत का नाम है। डॉ. अय्यप्पन ने परिषद कर्मियों से काव्य रचनाओं को भेजने के लिए कहा जिसे प्रकाशित कर उन्हें प्रोत्साहित किया जा सके।

(स्रोत: कृषि ज्ञान प्रबंध निदेशालय)