31 जुलाई, 2026, मालदा
सतत बागवानी को बढ़ावा देने और किसानों की आय में वृद्धि करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, भाकृअनुप-कृषि विज्ञान केन्द्र (सीआईएसएच), मालदा ने जिला प्रशासन, मालदा के सहयोग से प्रमुख “आमार मालदा” कार्यक्रम के अंतर्गत वर्षा ऋतु की सब्जियों के लिए उत्तम कृषि पद्धतियों (जीएपी), ब्रांडिंग और बाजार-उन्मुख उत्पादन को बढ़ावा देने हेतु एक महत्वपूर्ण पहल का शुभारंभ किया है।
प्रारंभिक चरण में सब्जी क्लस्टर की स्थापना भाकृअनुप के चार संस्थानों—आईएसआरआई, लखनऊ; सीआईएसएच, लखनऊ; आईआईवीआर, वाराणसी तथा अटारी, कोलकाता—के वित्तीय सहयोग से की गई थी। अब इस पहल का “आमार मालदा” कार्यक्रम के माध्यम से और अधिक विस्तार तथा सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है।

श्री राजनवीर सिंह कपूर, आईएएस, जिला मजिस्ट्रेट, मालदा, की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में सब्जी उत्पादकों, संबंधित विभागों के अधिकारियों, प्रखंड स्तरीय कर्मियों तथा आईसीएआर-केवीके, मालदा के वैज्ञानिकों ने भाग लिया। बैठक में एक प्रीमियम सब्जी मूल्य श्रृंखला विकसित करने के लिए रोडमैप तैयार किया गया। इस पहल का उद्देश्य उत्तम कृषि पद्धतियों के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण उत्पादन को बढ़ावा देना, जैविक खेती को चरणबद्ध तरीके से अपनाना तथा होटलों, खुदरा श्रृंखलाओं, शॉपिंग मॉल, सहकारी समितियों, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और प्रत्यक्ष किसान-से-उपभोक्ता (डी2सी) चैनलों के साथ मजबूत बाजार संपर्क स्थापित करना है। साथ ही घरेलू और निर्यात बाजारों की संभावनाओं का भी अन्वेषण किया जाएगा।
डॉ. प्रदीप डे, निदेशक, भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान (अटारी), कोलकाता, ने इस पहल को अनुसंधान को खेत स्तर पर प्रभाव में परिवर्तित करने के लिए वैज्ञानिक संस्थानों और जिला प्रशासन के बीच समन्वय का एक उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि ऐसी साझेदारियां किसान-केंद्रित मूल्य श्रृंखलाओं को सुदृढ़ करती हैं, ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देती हैं तथा मालदा को उच्च गुणवत्ता वाले फलों और सब्जियों के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करती हैं, जिनमें घरेलू और निर्यात दोनों स्तरों पर व्यापक संभावनाएं हैं। उन्होंने आगे कहा कि यह पहल आईसीएआर नेतृत्व के उस आह्वान को प्रतिबिंबित करती है, जिसमें कृषि क्षेत्र में अधिक प्रभाव प्राप्त करने के लिए संस्थागत सीमाओं को समाप्त कर विभिन्न हितधारकों के बीच समन्वय बढ़ाने पर बल दिया गया है।

भाकृअनुप-केवीके, मालदा के तकनीकी मार्गदर्शन में 10 गांवों को शामिल करते हुए 100 हैक्टर क्षेत्र में फैले एक सब्जी क्लस्टर की पहचान की गई है, जिससे 250 किसान लाभान्वित होंगे। इस क्लस्टर का अनुमानित वार्षिक उत्पादन मूल्य ₹3.25 करोड़ है। क्लस्टर विकास रणनीति में उन्नत सब्जी किस्मों का उपयोग, गुणवत्तापूर्ण पौध उत्पादन, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (आईएनएम), एकीकृत कीट एवं रोग प्रबंधन (आईपीडीएम), क्षमता निर्माण, जलवायु-सहिष्णु प्रौद्योगिकियां तथा उत्पादन लागत में कमी लाकर लाभप्रदता और स्थिरता बढ़ाने पर विशेष बल दिया गया है।
कार्यक्रम के अंतर्गत सामुदायिक संग्रहण, छंटाई और ग्रेडिंग केन्द्रों की स्थापना, किफायती परिवहन प्रणाली, डिजिटल विपणन प्लेटफॉर्म तथा “आमार मालदा” ब्रांड के अंतर्गत विपणन को भी प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि मध्यस्थों पर निर्भरता कम करते हुए एक प्रतिस्पर्धी और सतत सब्जी क्षेत्र का निर्माण किया जा सके।
जिला मजिस्ट्रेट ने सब्जी क्लस्टर की पहचान करने और प्रौद्योगिकी-आधारित हस्तक्षेपों को लागू करने में भाकृअनुप-केवीके, मालदा की अग्रणी भूमिका की सराहना की, जिसने “आमार मालदा” पहल की आधारशिला रखी।
यह कार्यक्रम जिला प्रशासन, मालदा और भाकृअनुप-केवीके, मालदा के बीच सफल समन्वय को रेखांकित करता है, जो नवाचार-आधारित बागवानी विकास, सतत सब्जी उत्पादन, बेहतर बाजार पहुंच और किसानों के लिए उन्नत आजीविका अवसरों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
(स्रोत: भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, कोलकाता)







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