पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए विशिष्ट अनुसंधान नीति बनाने की जरूरत : डॉ अय्यप्पन

बारापानी (शिलांग), 04 मई 2011

डॉ. एस. अय्यप्पन, सचिव, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डेयर) तथा महानिदेशक, आईसीएआर ने कृषि और पूर्वोत्तर क्षेत्रों से संबंधित क्षेत्रों के सतत् विकास के लिए विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों से विशिष्ट अनुसंधान नीति और प्राथमिकताओं को निर्धारित करने का आग्रह किया। यह बात उन्होंने पूर्वोत्तर क्षेत्रों का दौरा करने के दौरान वैज्ञानिकों से बातचीत करते हुए कही। डॉ अय्यप्पन ने बातचीत के दौरान जैव विविधता में पूर्वोत्तर क्षेत्रों की अपार क्षमता, संरक्षित कृषि, अम्लीय मिट्टी सुधार, प्रभावी वर्षा जल प्रबंधन, जैविक खेती, समन्वित खेती और प्रसंस्करण के माध्यम से कृषि उपज का मूल्य संवर्ध्दन पर भी जोर दिया। उन्होंने वैज्ञानिक, प्रशासनिक और तकनीकी कौशल के उन्नयन के लिए मानव संसाधन विकास कार्यक्रम की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला। डॉ अय्यप्पन ने पूर्वोत्तर क्षेत्रों के कृषि, बागवानी, पशु और मत्स्य पालन के क्षेत्र में कुल कृषि उत्पादकता में सुधार हेतु किसानों के खेतों पर प्रयोग करने की बात कही।

Visit of  Director General, ICAR to ICAR NEH Region Visit of  Director General, ICAR to ICAR NEH Region Visit of  Director General, ICAR to ICAR NEH Region Visit of  Director General, ICAR to ICAR NEH Region

डॉ. एस. वी. नचान, निदेशक आईसीएआर अनुसंधान परिसर, पूर्वोत्तर क्षेत्र ने प्रमुख अनुसंधान और प्रसार गतिविधियों के साथ इस क्षेत्र के कृषि के विकास में संस्थान के प्रमुख योगदान की विस्तार से जानकारी दी।

इस दौरान डॉ अय्यप्पन ने मत्स्य महाविद्यालय का दौरा किया तथा गुवाहाटी, असम में नए कॉलेज के निर्माण के लिए आधारशिला भी रखी और साथ ही साथ उन्होंने राज्य के समग्र कृषि विकास में मत्स्य पालन शिक्षा की क्षमता पर भी चर्चा की। इसके उपरांत उन्होंने केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय,शिलांग, मणिपुर में केंद्रीय पुस्तकालय का भी उद्घाटन किया और वैज्ञानिकों तथा शैक्षिक कर्मियों के साथ बातचीत की। इस अवसर पर डॉ. एस. एन. पुरी, कुलपति और डॉ. वी. टी. राजू, संभागाध्यक्ष, केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय ने विश्वविद्यालय की वर्तमान गतिविधियों और उपलब्धियों पर प्रकाश डाला।

डॉ. अरविंद कुमार, उप-महानिदेशक (शिक्षा) ने विचार-विमर्श के दौरान जैविक खेती के दायरे की सविस्तार से चर्चा की तथा कहा कि उत्पादकता में सुधार लाने के लिए फसल की आवश्यकता के अनुरूप खाद और पानी के समुचित उपयोग की दक्षता जरूरी तथ्यों में से एक हैं।

((स्रोत: एनएआईपी सब-प्रोजेक्ट मास-मीडिया मोबिलाइजेशन, डीकेएमए और आईसीएआर परिसर पूर्वोत्तर क्षेत्र )