स्वच्छ ढ़ंग से मछली सुखाने से उड़ीसा की तटीय महिला मछली पालकों की आजीविका में सुधार

कृषिरत महिला अनुसंधान निदेशालय (डीआरडबल्यूए) की नेटवर्क परियोजना "मत्स्य पालन में फसल कटाई के बाद प्रौद्योगिकी के माध्यम से तटीय महिला मछली पालकों की क्षमता निर्माण" के तहत राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (एनएफडीबी) की वित्तीय सहायता के साथ पेन्थाकोटा, पुरी, ओडिशा में मछली सुखाने की एक मॉडल इकाई बनाई गयी। डॉ. (श्रीमती) कृष्णा श्रीनाथ, निदेशक, डीआरडबल्यूए ने इस इकाई का उद्घाटन किया और शांति महिला समुद्री मछली पालक समुदाय, पेन्थाकोटा को श्री पी. कृष्ण मोहन, निदेशक, मत्स्यिकी विभाग, ओडिशा सरकार, राज्य मत्स्य पालन विभाग के अधिकारियों और डीआरडबल्यूए के वैज्ञानिकों की उपस्थिति में सौंप दिया।

स्वच्छ ढ़ंग से मछली सुखाने से उड़ीसा की तटीय महिला मछली पालकों की आजीविका में सुधार स्वच्छ ढ़ंग से मछली सुखाने से उड़ीसा की तटीय महिला मछली पालकों की आजीविका में सुधार

स्वच्छ ढ़ंग से मछली सुखाने से उड़ीसा की तटीय महिला मछली पालकों की आजीविका में सुधार मछली सुखाना ओडिशा के तटीय जिलों में एक प्रमुख गतिविधि है, जो मुख्य रूप से छोटे पैमाने की महिला मछली पालकों द्वारा किया जाता है। हालांकि, उनकी मछली सुखाने की प्रक्रिया उतनी स्वच्छ व सुदृढ़ नहीं होती। ऐसे उत्पादों में गुणवत्ता का अभाव होता है। इसके अलावा, असुरक्षित ढ़ंग से मछली सुखाना महिला मछली पालकों के स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है जो एक चिंता का विषय है। छोटे पैमाने की महिला मछली पालकों के लिए तकनीकी प्रयास और कौशल की आवश्यकता को पहचानते हुए पुरी के पेन्थाकोटा गांव में डीआरडबल्यूए ने मछली सुखाने, इसकी पैकेजिंग और विपणन के बेहतर और सुरक्षित उत्पादन को ध्यान में रखते हुए तटीय महिला मछली पालक समुदायों को सशक्त बनाने के लिए एक नेटवर्क परियोजना शुरू की। राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (एनएफडीबी) के सहयोग में डीआरडबल्यूए ने एक कार्यक्रम आयोजित किया जिससे महिला मछली पालकों के स्वास्थ्य को प्रभावित किए बिना मछली सुखाने के उत्पादन के साथ उनके कौशल में भी वृद्धि हुई, इसके अलावा उन्हें बाजार मूल्य से 25-30 प्रतिशत अधिक तक का मुनाफा मिला। इस परियोजना के तहत, उच्च गुणवत्ता युक्त उत्पाद का आश्वासन दिया गया था। मछली सुखाने की इकाई के मॉडल, पाँच स्थानों पर बनाए गए हैं जिसमें से दो स्थान ओडिशा में एवं तमिलनाडु, केरल और महाराष्ट्र में एक-एक स्थान हैं। यह मॉडल राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (एनएफडीबी) की वित्तीय सहायता के साथ महिला मछली पालक समुदाय के लिए समूह के दृष्टिकोण के माध्यम से मछली के स्वच्छ उत्पादन और विपणन के लिए बनाए गए थे।

(स्रोत: डॉ. (श्रीमती) कृष्णा श्रीनाथ, निदेशक, डीआरडबल्यूए
हिन्दी प्रस्तुति: एनएआईपी मास मीडिया परियोजना, कृषि ज्ञान प्रबंध निदेशालय)