बोध के जिला कलैक्टर का मछली की वैज्ञानिक कृषि को बढ़ावा देने का आह्वान

11 अक्टूबर 2012, बोध, ओडिशा

बोध के जिला कलैक्टर का मछली की वैज्ञानिक कृषि को बढ़ावा देने का आह्वान बोध जिले में कार्प मछलियों के पालन को बढ़ावा देने के लिए ओडिशा सरकार के मात्स्यिकी विभाग और केन्द्रीय ताजा जल जीव पालन संस्थान (सीफा), भुवनेश्वर ने हितसमूहों की एक बैठक का आयोजन किया। इस अवसर पर डॉ. पी. जयशंकर, निदेशक, सीफा ने सभी सम्बन्धित संस्थानों और एजेंसियों से इस क्षेत्र में तकनीकी विकास और उसके कार्यान्वयन का आग्रह किया। श्री महेन्द्र कुमार मलिक, जिलाधिकारी व कलैक्टर, बोध ने इस कार्यशाला का उद्घाटन किया। उन्होंने इस प्रकार की बैठक का आयोजन करने के लिए सीफा को बधाई दी और मात्स्यिकी अधिकारियों से बेकार पड़े छोटे तालाबों में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने का आग्रह किया। श्री मलिक ने कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत मिले धन से इन तालाबों का पुनर्निर्माण करके इनमें वैज्ञानिक विधि से मछली पालन किया जा सकता है। डॉ. राधेश्याम, प्रधान वैज्ञानिक ने अपने संबोधन में सीफा द्वारा विकसित लाभकारी मात्स्यिकी तकनीकों के बारे में बताया।

 

बोध के जिला कलैक्टर का मछली की वैज्ञानिक कृषि को बढ़ावा देने का आह्वानबोध के जिला कलैक्टर का मछली की वैज्ञानिक कृषि को बढ़ावा देने का आह्वान
बोध के जिला कलैक्टर का मछली की वैज्ञानिक कृषि को बढ़ावा देने का आह्वान

इस बैठक से इतर बोध के जिलाधिकारी ने ताजा जल जीव पालन पर आयोजित एक प्रदर्शनी का भी उद्धाटन किया। इस प्रदर्शनी में सीफा द्वारा विकसित की गई मत्स्य पालन तकनीकों, प्रकाशनों और उत्पादों का प्रदर्शन किया गया। इस अवसर पर ‘मिस्रितामत्सयचासा’, ‘फार्म मेड फीड’ और ‘वूमेन इन एक्वाकल्चर’ नामक तीन पत्रकों का विमोचन किया गया। “ट्रांसफर ऑफ टेक्नॉलजी ऑफ कॉम्पोसिट कार्प कल्चर थ्रू डिमॉन्सट्रेशन अमंग एससी/एसटी वुमेन इन बोध एंड पुरुलिया” नामक परियोजना के लिए एक नई वेबसाइट का भी उद्घाटन किया गया।

मत्स्य पालन में वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने और सामुदायिक नेतृत्व के लिए तीन प्रगतिशील किसानों रबिन्द्र कार्ना, प्रमोद कुमार बिशी और गिरधारी राना को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर श्री अनंतराम बेहेरा, मात्स्यिकी विस्तार अधिकारी. कान्तामाल को मत्स्य पालन के विस्तार में उल्लेखनीय कार्य के लिए प्रंशसा पत्र प्रदान किया गया। इस बैठक में मात्स्यिकी विस्तार अधिकारियों, सीफा के वैज्ञानिकों, कृषि उद्यमियों के अतिरिक्त हरभंगा, कान्तामाल और बोध के सौ से अधिक किसानों ने भाग लिया।

बैठक के अंत में, विशेषज्ञों ने मौसमी तालाबों में कार्प की कृषि और वैज्ञानिक पद्धतियों, फार्म में खाद बनाने के तरीकों, घरेलू तालाबों में मछली पालन आदि को अपनाने पर जोर दिया।

(स्रोत:सीफा, भुवनेश्वर)
(हिन्दी प्रस्तुति:एनएआईपी मास मीडिया प्रोजेक्ट, डीकेएमए)