सीफा द्वारा सार्क देशों के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन

1 अक्टूबर, 2012, भुवनेश्वर

CIFA organises international training programme for SAARC countriesकेन्द्रीय ताजा जल-जीव पालन संस्थान, भुवनेश्वर ने अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम "सार्क देशों में मछली प्रबंधन के माध्यम से गुणवत्ता युक्त मछली बीज उत्पादन" आयोजित किया। यह प्रशिक्षण सीफा द्वारा सार्क कृषि केन्द्र, ढ़ाका के सहयोग के साथ आयोजित किया गया।

CIFA organises international training programme for SAARC countriesडॉ. बी. मीनाकुमारी, उप-महानिदेशक (मात्स्यिकी), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, ने प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए कहा कि “यह परिषद के लिए एक गौरवमयी क्षण है कि भारत अपनी क्षमता के लिए मान्यता प्राप्त है और मत्स्य पालन एवं विकास के मामलों में वह पड़ोसी देशों को नेतृत्व प्रदान करता है।” गुणवत्ता युक्त मछली फ़ीड सफल जलीय कृषि के लिए बुनियादी आवश्यकता है। उन्होंने चयन, प्रबंधन, आनुवंशिक उन्नयन, और रोग मुक्त बीज के उत्पादन पर जोर दिया।

डॉ. अबुल कलाम आजाद, निदेशक, सार्क, ढ़ाका, बांग्लादेश ने कहा कि सार्क देशों में ताजा जल एवं जलीय कृषि में कई समानताएं हैं। सदस्य देशों को इस संस्थान द्वारा विकसित प्रौद्योगिकी का लाभ उठाना चाहिए और उन्हें किसानों के बीच प्रसारित करना चाहिए। डॉ. पी. जयशंकर, निदेशक, सीफा ने अपने स्वागत भाषण में बताया कि सीफा प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से जलीय कृषि में सार्क देशों की मदद करता रहा है। उन्होंने कहा कि, सार्क देशों के बीच ज्ञान एवं जानकारी का विनिमय इस कार्यक्रम का उद्देश्य है।    

कार्यक्रम में बांग्लादेश, नेपाल, भारत, पाकिस्तान, भूटान और श्रीलंका से 21 प्रतिभागियों ने भाग लिया। दस-दिवसीय कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों के लिए आनुवंशिक उन्नयन, जैव प्रौद्योगिकी उपयोग, ऑफ सीजन प्रजनन, बीज पालन पोषण, और स्वास्थ्य प्रबंधन आदि पर हाल के अनुसंधानों को उजागर किया जाएगा। इसके अलावा, प्रतिभागियों को नैहाटी मछली बीज बाजार, पश्चिम बंगाल की यात्रा पर ले जाने का भी प्रस्ताव है।

इस अवसर पर, सीफा द्वारा प्रकाशित "गुणवत्ता मत्स्य बीज उत्पादन और ब्रूडस्टॉक प्रबंधन पर एक किताब का विमोचन किया गया। इससे पूर्व, डॉ. बी. मीनाकुमारी ने मछली के स्वास्थ्य में अग्रिम अनुसंधान के लिए एक सुविधा का उद्घाटन किया।

(स्रोत: केन्द्रीय ताजा जल-जीव पालन संस्थान, भुवनेश्वर; प्रस्तुति- एनएआईपी मास मीडिया परियोजना, डीकेएमए)