जल उपयोग दक्षता बढ़ाने पर कार्यशाला आयोजित

30 अगस्त 2013, नई दिल्ली

''यमुना में जल उपयोग दक्षता बढ़ाने'' पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन 30 अगस्त, 2013 को राष्ट्रीय कृषि विज्ञान केन्द्र परिसर, नई दिल्ली में किया गया।

डॉ. एस अय्यप्पन, सचिव, डेअर और महानिदेशक, भा.कृ.अनु.प. इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे। अपने संभाषण में डॉ. अय्यप्पन ने यमुना में जल उपयोग दक्षता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नई प्रौद्योगिकी एवं संस्थागत और नीतिपरक हस्तक्षेप से जल के सतत् उपयोग को सुनिश्चित किया जा सकता है। डॉ. अय्यप्पन ने बदलती पर्यावरण परिस्थितियों में जल संसाधनों के संरक्षण के लिए जलवायु समुत्थानशील कृषि अपनाने के महत्व पर भी प्रकाश डाला।

माननीय अतिथि, श्री जी. मोहन कुमार, विशेष सचिव जल संसाधन मंत्रालय, भारत सरकार ने अपने संभाषण में कहा कि बदलती जलवायु परिस्थितियों में जल संसाधन का विशेष महत्व है। जल के सही प्रयोग हेतु सिंचाई आधारभूत सुविधाओं के विकास और नई प्रौद्योगिकी के प्रचार-प्रसार पर उन्होंने जोर दिया। श्री कुमार ने आशा व्यक्त की कि यह कार्यशाला जल उपयोग दक्षता बढ़ाने में मददगार साबित होगी।

डॉ. ए.के. सिक्का, उपमहानिदेशक (एनआरएम), श्री बिभास कुमार, अध्यक्ष, केन्द्रीय जल आयोग, भारत सरकार ने भी इस अवसर पर अपनी महत्वपूर्ण टिप्पणियां दीं।

इससे पूर्व, डॉ. अश्विनी कुमार, निदेशक, जल प्रबंधन निदेशालय, भुवनेश्वर ने अतिथियों का स्वागत किया और इस कार्यशाला के मुख्य विषयों से अवगत कराया।

भा.कृ.अनु.प. संस्थानों, डीडब्ल्यूएम, सिम्मिट, सीजीआईएआर संस्थानों और केन्द्रीय जल आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों और वैज्ञानिकों ने इस कार्यशाला में भाग लिया।

(स्रोत: एनएआईपी मास मीडिया परियोजना, डीकेएमए, आईसीएआर)