’द 50 पैक्ट’-डॉ. बोरलॉग की प्रथम भारत यात्रा की याद में समारोह

16 अगस्त, 2013, नई दिल्ली

16th August 2013, New Delhiडॉ. एम. एस. स्वामीनाथन, अध्यक्ष, एम. एस. स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन ने शुक्रवार को राष्ट्रीय कृषि विज्ञान केन्द्र परिसर, नई दिल्ली में 'द 50 पैक्ट'- डॉ. नॉरमन ई. बोरलॉग की प्रथम भारत यात्रा के 50 वर्ष पूरा होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन किया।

डॉ. स्वामीनाथन ने स्वतंत्रता पूर्व बंगाल के भीषण अकाल से लेकर 'भोजन का अधिकार' तक भारतीय कृषि की अनोखी यात्रा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ती आबादी और कई चुनौतियों के बावजूद हमें यह उल्लेखनीय सफलता प्राप्त हुई है। उन्होंने 1960 के दशक की हरित क्रान्ति की याद दिलाते हुए बताया कि यह क्रान्ति प्रौद्योगिकी पर आधारित थी। इसके साथ ही सार्वजनिक नीतियों का समर्थन प्राप्त होने के कारण इसे भरपूर सफलता भी मिली। डॉ. स्वामीनाथन ने कहा कि अब हमारे पास ज्यादा सोच-विचार और इंतजार करने का समय नहीं है, क्योंकि कृषि भूमि की कम उपलब्ध्ता और घटते जल संसाधनों के कारण स्थिति अच्छी नहीं है। जलवायु परिवर्तन भी इस समस्या को और गहरा रहा है। वहीं, कृषि व्यवसाय अपनाने के प्रति युवाओं का रुझान भी घटा है। इन सारी परिस्थितियों ने कृषि पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है। इससे स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। खाद्य सुरक्षा के लिए आज पारिस्थितिकी में सुधार, कृषि प्रौद्योगिकी का विकास व प्रसार और सदाबहार क्रान्ति की आवश्यकता है। इसके लिए युवाओं को आगे आना होगा क्योंकि नई तकनीक से वे कम समय में ही पूरी तरह परिचित हो जाते हैं। उन्होंने डॉ. बोरलॉग को श्रद्धांजलि दी और कहा कि डॉ. बोरलॉग का जीवन और कार्य विश्व के लिए एक संदेश है। इस अवसर पर डॉ. स्वामीनाथन को डॉ. बोरलॉग पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया।

16th August 2013, New Delhiडॉ. थॉमस ए लम्पकिन, महानिदेशक, सिमिट (यू.एस.ए.) ने सिमिट के साथ भारत के दीर्घकालीन सहयोग की सराहना की और इसके सहयोग से मिली उपब्लिधयों को गिनाया। उन्होंने भारत तथा अन्य पड़ोसी देशों की खाद्य सुरक्षा के लिए कम भूमि में अधिक से अधिक अनाज का उत्पादन करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाने के लिए जैव प्रौद्योगिकी, परिशुद्ध कृषि और मोबाइल आधारित निर्णय सहायता प्रणाली जैसी नई तकनीक का प्रयोग करना चाहिए। इससे खेती करना तो आसान होगा ही, नए लोग भी कृषि व्यवसाय के प्रति आकर्षित होंगे। डॉ. लम्पकिन ने आशा जताई कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के सहयोग से सिमिट दक्षिण एशियाई क्षेत्र की भुखमरी को स्थायी रूप से दूर कर पाएगा।

16th August 2013, New Delhiडॉ. नॉरमन बोरलॉग की पुत्री और बी.जी.आर.आई. की अध्यक्ष सुश्री जेनी लॉब बोरलॉग ने इस कार्यक्रम में भाग लेने पर प्रसन्नता व्यक्त की। इस अवसर पर उन्होंने भारतीय किसानों से डॉ. बोरलॉग के लगाव और मधुर संबंधों को याद किया। उन्होंने बताया कि डॉ. बोरलॉग की सोच के अनुसार, स्थायी रूप से और पोषक तरीके से भुखमरी को खत्म करने के लिए जैव प्रौद्योगिकी का अधिक से अधिक इस्तेमाल जरूरी है। जेनी ने कहा कि मेरे पिता बार-बार भारत आते रहते थे, इसीलिए मुझे भी भारत से गहरा लगाव है और यहां आना बहुत अच्छा लगता है। उन्होंने कहा कि बोरलॉग इंस्टीट्यूट फॉर साउथ एशिया (बी.आई.एस.ए.) मेरे पिता के सपनों को साकार करने में मददगार साबित होगा।

16th August 2013, New Delhiकार्यक्रम के दौरान डॉ. आर.एस. परोदा, अध्यक्ष, टी.ए.ए.एस., डॉ. एम.वी. राव., पूर्व विशेष महानिदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और डॉ. आर.बी. सिंह, अध्यक्ष, राष्ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी ने भी डॉ. बोरलॉग के साथ काम करने के अपने अनुभव सुनाए। इससे पूर्व, डॉ. एस. अय्यप्पन, सचिव, डेयर और महानिदेशक, भा.कृ.अनु.प. ने गणमान्य अतिथियों का स्वागत किया और 'द 50 पैक्ट' के उद्देश्यों के बारे में बताया। डॉ. अय्यप्पन ने कहा कि यह कार्यक्रम दक्षिण एशिया में खाद्य सुरक्षा पर मौजूदा भागीदारों के लिए वार्ता का एक अवसर है। इस मंच पर हम लोग अन्न का उत्पादन बढ़ाने और कृषि में आने वाली विभिन्न समस्याओं पर चर्चा करके उनके समाधान की दिशा में कुछ कदम उठा सकते हैं।

16th August 2013, New Delhi

इस दो दिवसीय (16-17 अगस्त, 2013) कार्यक्रम का आयोजन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, सिमिट और बोरलॉग इंस्टीट्यूट फॉर साउथ एशिया द्वारा किया गया। इसमें सी.जी.आई.ए.आर. संस्थानों, भा.कृ.अनु.प., विश्व बैंक और अन्य प्रसिद्ध राष्ट्रीय व अतरराष्ट्रीय संस्थानों के अधिकारियों और वैज्ञानिकों ने भाग लिया और अपने विचार प्रस्तुत किए। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. स्वप्न कुमार दत्ता, उप महानिदेशक (फसल विज्ञान) ने प्रस्तुत किया।

(स्रोत: एनएआईपी, मास मीडिया प्रोजेक्ट, डीकेएमए., आईसीएआर)