केन्‍द्रीय कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्री ने सार्क राष्‍ट्रों से एकसाथ मिलकर कार्य करने का आह्वान किया

7 अप्रैल, 2016, ढाका, बांग्‍लादेश

सार्क राष्‍ट्रों के कृषि मंत्रियों की तीसरी बैठक आज यहां ढाका में सम्‍पन्‍न हुई। इस बैठक का उद्घाटन बांग्‍लादेश की माननीया प्रधानमंत्री शेख हसीना द्वारा किया गया । अपने उद्घाटन संबोधन में माननीया प्रधानमंत्री ने कहा कि सुनिश्चित खाद्य सुरक्षा एक बहुआयामी और जटिल मुद्दा है जो कि कृषि से निकटता से जुड़ा हुआ है। उन्‍होंने आशा जताई कि इस सम्‍मेलन में भाग ले रहे मंत्री और विशेषज्ञ मिलकर ऐसी सिफारिशें तैयार करेंगे जिनसे इस क्षेत्र में गरीबी उन्‍मूलन में मदद मिलेगी। उन्‍होंने सार्क राष्‍ट्रों से गरीबी एवं भूख मुक्‍त शान्‍त एवं समृद्ध दक्षिण एशिया बनाने के लिए एकसाथ मिलकर कार्य करने का आह्वान किया।

श्री राधा मोहन सिंह, केन्‍द्रीय कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्री ने इस बैठक के आयोजन के लिए बांग्‍लादेश का आभार व्‍यक्‍त किया। सार्क देशों के कृषि मंत्रियों की पिछली बैठक का आयोजन 8  वर्ष पूर्व सन् 2008 में नई दिल्‍ली में किया गया था। माननीय मंत्री महोदय का प्रस्‍ताव था कि यह बैठक जल्‍दी जल्‍दी होनी चाहिए जो एक अथवा दो वर्ष में एक बार हो। उन्‍होंने पुन: कहा कि सार्क देशों की सरकारें अपने कृषि क्षेत्रों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति में सुधार लाने के प्रति इच्‍छुक हैं। यहां के किसान आर्थिक विषमता और अस्थिरता के विरूद्ध संघर्ष कर रहे हैं। उन्‍होंने आगे कहा कि आपसी सहयोग करके कृषि क्षेत्र में स्‍थाई अनुसंधान और विकास कार्य की शुरूआत करना उपयुक्‍त होगा। किसानों को सशक्‍त बनाने, उनके आजीविका स्‍तर को सुधारने तथा जलवायु परिवर्तन और असंतुलित पर्यावरण का मुकाबला करने में सार्क देश एक दूसरे की मदद कर सकते हैं।

माननीय केन्‍द्रीय कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्री ने पुन: कहा कि कृषि तकनीकों, उत्‍पादों, विधियों और संबंधित सेवाओं पर किसानों को समय से सूचना प्रदान करने के लिए एक बेहतर संचार नेटवर्क बनाया जाना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि ‘’भविष्‍य में खाद्यान्‍न की सुरक्षा के लिए कृषि अनुसंधान में निवेश किया जाना जरूरी है ।‘’

The third meeting of SAARC agriculture ministersThe third meeting of SAARC agriculture ministersThe third meeting of SAARC agriculture ministersThe third meeting of SAARC agriculture ministers


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इस बैठक में भारत, बांग्‍लादेश, नेपाल, भूटान और पाकिस्‍तान के कृषि मंत्रियों और अफ्गानिस्‍तान, श्रीलंका तथा मालदीव के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

माननीय केन्‍द्रीय कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्री ने सार्क बैठक के उपरांत बांग्‍लादेश और नेपाल के कृषि मंत्रियों के साथ बैठक की। उन्‍होंने बांग्‍लादेश के कृषि मंत्री  के साथ लवण सहिष्‍णु चावल किस्‍मों, उच्‍च तापमान सहिष्‍णु चावल किस्‍मों, तथा बीज बैंक जैसे मामले पर चर्चा की और नेपाल के कृषि मंत्री के साथ नेपाल में उच्‍चतर कृषि शिक्षा व अनुसंधान (मानद विश्‍वविद्यालय) के सुदृढ़ीकरण तथा दो और संगरोध केन्‍द्रों की स्‍थापना के लिए नेपाल को सहायता प्रदान करने पर चर्चा की।

गहन चर्चा के उपरांत ढाका कथन के तहत 12 सूत्री संकल्‍प जारी किया गया :

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  • सार्क देशों के कृषि मंत्रियों की पिछली बैठक का आयोजन वर्ष 2008 में नई दिल्‍ली में किया गया था।
  • वर्ष 2008 में नई दिल्‍ली में आयोजित बैठक में सार्क कृषि विजन 2020 को अपनाया गया।
  • सन् 2008 से, भारत द्वारा सबसे अधिक बार परामर्श बैठकों, कार्यशालाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों (26) का आयोजन किया जबकि इसके उपरान्‍त बांग्‍लादेश द्वारा इनका आयोजन किया गया। सार्क कृषि केन्‍द्र, ढाका द्वारा की गई सिफारिशों के आधार पर दो अनुरोध यथा एक - सीआईआरबी, हिसार में भैंस फार्म प्रबंधन रीतियों पर प्रशिक्षण तथा दूसरा - एनडीआरआई, करनाल में पशु पुनर्जनन जैव प्रौद्योगिकी पर प्रशिक्षण को स्‍वीकार किया जाएगा और वर्ष 2016 में आवश्‍यक कार्रवाई की जाएगी।
  • कृषि कार्यक्रमों और परियोजनाओं को लागू करने के लिए सार्क विकास निधि (एसडीएफ) की सामाजिक विंडो के लिए भारत द्वारा 100.00 मिलियन यूएस डॉलर का स्‍वैच्छिक योगदान किया गया है।
  • सार्क बीज बैंक एक उत्‍कृष्‍ट विचार है। बीज बैंक के परिचालन की सफलता के लिए सामग्री स्‍थानान्‍तरण समझौते के लिए क्षेत्रीय फ्रेमवर्क अत्‍यधिक प्रासंगिक है। यह समझौता वर्तमान अंतर्राष्‍ट्रीय संधियों/राष्‍ट्रीय कानूनों के अनुरूप होना चाहिए। सामग्री स्‍थानान्‍तरण के लिए राष्‍ट्रीय कानूनों के दायरे में रहकर क्रियाविधि को विकसित करने की जरूरत है।
  • सार्क खाद्य बैंक की स्‍थापना एक अन्‍य नवीन संकल्‍पना है। इस बैंक को चलाने के लिए एक व्‍यापक अध्‍ययन करने की जरूरत है जिसमें सभी सदस्‍य देशों में खाद्य की मांग और आपूर्ति की स्थिति का मानचित्रण सहित सभी पहलुओं की जांच की जाएगी। अध्‍ययन के लिए UNESCAP का प्रस्‍तावित सहयोग प्रशंसा योग्‍य है।