झारसिम (Jharsim) : झारखण्‍ड के लिए एक स्‍थान विशिष्‍ट ग्रामीण मुर्गी प्रजाति

11 अप्रैल, 2016, रांची

झारखण्‍ड राज्‍य के लिए उपयुक्‍त एक दोहरे प्रयोजन वाली स्‍थान विशिष्‍ट मुर्गी प्रजाति, झारसिम को आज यहां डॉ. एच. रहमान, उपमहानिदेशक (पशु विज्ञान), भाकृअनुप ने जारी किया।  इस प्रजाति को अखिल भारतीय समन्वित मुर्गी प्रजनन अनुसंधान परियोजना, बिरसा कृषि विश्‍वविद्यालय, रांची केन्‍द्र द्वारा विकसित किया गया है।

Jharsim: A location specific rural poultry variety for JharkhandJharsim: A location specific rural poultry variety for Jharkhand

झारसिम नाम को झारखण्‍ड से झार तथा आदिवासी बोली में सिम जिसका तात्‍पर्य मुर्गी से होता है, से लिया गया है। इन पक्षियों के आकर्षक बहुरंगी पंख होते हैं तथा ये अल्‍प स्‍तर के पोषण पर भी बेहतर प्रदर्शन करते हैं, तेजी से बढ़ते हैं, इनमें इष्‍टतम अण्‍डा उत्‍पादन और झारखण्‍ड की कृषि जलवायु परिस्थितियों के तहत बेहतर अनुकूलनीयता पाई जाती है। अहाता पालन प्रणाली के तहत 6 सप्‍ताह की अवस्‍था तक इन पक्षियों का शरीर भार 400 – 500 ग्राम और पूरी तरह से परिपक्‍व अथवा वयस्‍क होने पर 1600 – 1800 ग्राम पाया जाता है।  पहली बार अण्‍डा देने की आयु 175 – 180 दिन होती है और 40 सप्‍ताह की आयु पर अण्‍डे का भार 52 – 55 ग्राम होता है। अहाता प्रणाली के तहत पक्षियों में 165 – 170 तक अण्‍डे देने की क्षमता होती है। इस प्रजाति से कहीं उच्‍चतर अनुपूरक आय और  राज्‍य की ग्रामीण/आदिवासी जनसंख्‍या को अण्‍डा तथा मीट के माध्‍यम से कहीं अधिक पोषण प्रदान किया जा सकता है।

डॉ. जॉर्ज जॉन, कुलपति, बीएयू, रांची; डॉ. आर.एस. गांधी, सहायक महानिदेशक (एपी एंड बी), भाकृअनुप; डॉ. आर.एन. चटर्जी, निदेशक, कुक्‍कुट अनुसंधान निदेशालय, हैदराबाद; तथा डॉ. विनीत भसीन, प्रधान वैज्ञानिक (एजी एंड बी ), भाकृअनुप भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

(स्रोत : पशु विज्ञान प्रभाग, भाकृअनुप )