‘एशिया में पिंजड़ा जलजीव पालन -2015’ पर 5वीं अंतर्राष्‍ट्रीय संगोष्‍ठी का उद्घाटन

25 नवम्‍बर, 2015, एर्नाकुलम, केरल

डॉ. एस. अय्यप्‍पन, सचिव, डेयर एवं महानिदेशक, भाकृअनुप ने दिनांक 25 नवम्‍बर, 2015 को एर्नाकुलम, केरल में एशिया में पिंजड़ा जलजीव पालन (2015) पर 5वीं अंतर्राष्‍ट्रीय संगोष्‍ठी का उद्घाटन किया। अपने उद्घाटन सम्‍बोधन में डॉ. अय्यप्‍पन ने नीली क्रान्तिपर बल दिया और टिकाऊ जलजीव पालन विकास की आवश्‍यकता बताई। उन्‍होंने कहा कि पिंजड़ा संवर्धन किसान एक संरक्षित वातावरण में मछली पकड़ने से जुड़े हुए थे और किसानों के मस्तिष्‍क में संरक्षण तथा पिजड़ा प्रबंधन का एक काल्‍पनिक प्रतिबिम्‍ब बना हुआ था। उन्‍होंने जल का सदुपयोग करने के लिए कहा और जलाशयों में पिजड़ा पालन पर सफलता के लिए झारखंड के युवाओं के प्रयासों की सराहना की। उन्‍होंने कहा कि भारत में पिजड़ा जलजीव पालन में और अधिक सुधार के लिए बीज, कौशल और इच्‍छा शक्ति का एक मजबूत संयोजन समय की मांग है।

अपने स्‍वागत संबोधन में डॉ. ए. गोपालकृष्‍णनन, संयोजक, सीएए-5 तथा निदेशक, भाकृअनुप – केन्‍द्रीय समुद्रीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्‍थान, कोच्चि ने कहा कि इस संगोष्‍ठी के माध्‍यम से भारत में एक टिकाऊ पद्धति में पिजड़ा पालन को अपनाने के लिए एक मंच प्रदान होगा।

 5th International Symposium on 'Cage Aquaculture in Asia-2015' inaugurated   5th International Symposium on 'Cage Aquaculture in Asia-2015' inaugurated

अपने अध्‍यक्षीय संबोधन में डॉ. जे.के. जेना, अध्‍यक्ष, एएफएसआईबी तथा निदेशक, एनबीएफजीआर, लखनऊ ने पिंजड़ों के आधुनिकीकरण और पिंजड़ा पालन को सहयोग देने के लिए सरकारी नीतियों की आवश्‍यकता बताई। उन्‍होंने कहा कि वर्तमान में केवल ‘आज और कल के लिए मत्‍स्‍य’ के स्‍थान पर ‘हमेशा के लिए मत्‍स्‍य’ का स्‍लोगन होना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि भारत इस मामले में नार्वे और चिली से विचार ले सकता है और पिंजड़ा पालन से अपने उत्‍पादन को दोगुना कर सकता है।

डॉ. एलाइस जॉन फेरर, उपाध्‍यक्ष, एशियन फिशरीज सोसायटी (एएफएस), मलेशिया ने एएफएस की गतिविधियों की समीक्षा की।

डॉ. मोहन जोसेफ मोदायिल, पूर्व सदस्‍य, कृषि वैज्ञानिक चयन मंडल तथा सीएजी, एएफएस, मलेशिया ने वर्तमान युग में अंतिम प्रयोक्‍ताओं से संकेत हासिल करके तथा एशियाई क्षेत्र में वैज्ञानिकों और तकनीशियनों की सामूहिक ताकत के माध्‍यम से साझा दक्षताओं को पाने में एशियाई देशों के सहयोग और सार्थक प्रयासों के लिए आह्वान किया।

डॉ. डेरेक स्‍टेपल्‍स, एएफएस, मलेशिया के पूर्ववर्ती अध्‍यक्ष ने कहा कि एशिया में मात्स्यिकी समाज में एशियाई देशों के बीच सम्‍पर्क स्‍थापित करने के संबंध में व्‍यापक सुधार करने की जरूरत है।

इस कार्यक्रम में एशियन फिशरीज सोसायटी इंडियन ब्रांच (एएफएसआईबी) इनोवेशन पुरस्‍कार प्रदान किए गए।

इस संगोष्‍ठी (25 – 28 नवम्‍बर, 2015) का आयोजन भाकृअनुप – केन्‍द्रीय समुद्रीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्‍थान, कोच्चि द्वारा एशियन फिशरीज सोसायटी (एएफएस), मलेशिया तथा एशियन फिशरीज सोसायटी, इंडियन ब्रांच (एएफएसआईबी) के साथ मिलकर किया गया।

(स्रोत : भाकृअनुप – केन्‍द्रीय समुद्रीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्‍थान, कोच्चि)