23वीं अंतर्राष्‍ट्रीय चरागाह कांग्रेस

20 नवम्‍बर, 2015, नई दिल्‍ली

श्री राधा मोहन सिंह, माननीय कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्री ने मुख्‍य अतिथि के रूप में अपने उद्घाटन सम्‍बोधन में कहा कि जीवनचर्या तथा खान-पान की आदतों में बदलाव के कारण चरागाह और रेंज भूमि पर हो रहा अतिक्रमण एक चिन्‍ता का विषय है। भारत में, 80-100 प्रतिशत संसाधनहीन ग्रामीण जनसंख्‍या चरागाह जैसी सामुदायिक भूमि से अपने परिवार के लिए खाद्य, चारा, ईंधन और रेशा प्राप्‍त करती है। मुख्‍य अतिथि ने इस बात पर बल दिया कि ग्रामीण भारत को एक मजबूत सेवा सेक्‍टर के रूप में विकसित करने की जरूरत है जिसके लिए व्‍यापक स्‍तर पर व्‍यापार केन्‍द्रों ओर कृषि वैज्ञानिकों की जरूरत होगी। माननीय मंत्री महोदय ने विकास कार्यक्रमों के लिए तथा वर्तमान चरागाहों का सुधार करने के लिए चरागाह एवं रेंज डाटाबेस की कमी  की ओर भी इशारा किया।

23rd International Grassland Congress  23rd International Grassland Congress

समारोह के विशिष्‍ट अतिथि एवं माननीय सांसद प्रोफेसर मुरली मनोहर जोशी ने चरागाह विकास और उत्‍पादकता को बढ़ाने में ‘’भारतीय चरागाह प्राधिकरण’ की स्‍थापना और चरागाह सेक्‍टर में चुनौतियां एवं अवसर विषय पर अपना व्‍याख्‍यान प्रस्‍तुत किया। प्रोफेसर जोशी ने चरागाह विकास के संदर्भ में फसल – जल – पशुधन – मृदा - स्‍वास्‍थ्‍य – जैव विविधता और पारिस्थितिकी कार्यों के बीच सामंजस्‍य स्‍थापित करने पर बल दिया।

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डॉ. एस. अय्यप्‍पन, सचिव, डेयर एवं महानिदेशक, भाकृअनुप ने अपने संबोधन में कहा कि चरागाह भूमि का संरक्षण करना ग्रामीण, सामाजिक और अर्थशास्‍त्र प्रणाली के लिए अतिमहत्‍वपूर्ण है। सरकार द्वारा पारम्‍परिक और विशिष्‍ट चरागाह तथा रेंज के माध्‍यम से सीमान्‍त किसानों की आमदनी को बढ़ाने के लिए निशुल्‍क चरागाह क्षेत्र, चारा उत्‍पादन, गुणवत्‍ता बीज, चारा प्रसंस्‍करण और प्रौद्योगिकीय सहयोग देने पर विचार किया जा रहा है।

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डॉ. डेविड मियानो मवांगी, अध्‍यक्ष, इंटरनेशनल ग्रासलैण्‍ड कांग्रेस ने अपने संबोधन में कांग्रेस का आयोजन करने के लिए भारत के प्रतिअपना आभार व्‍यक्‍त किया और कहा कि इसका उद्देश्‍य जानकारी और ज्ञान की संवृद्धि के लिए सभी संबंधित वैज्ञानिकों, किसानों और हितधारकों को अपने विचार प्रकट करने के लिए एकसाथ एक मंच पर लाना है। चरागाह और रेंज क्षेत्र द्वारा ग्रामीण परिवारों के लिए खाद्य, चारा तथा रेशा जुटाने में प्रमुख भूमिका निभाई जाती है।

डॉ. पी.के. घोष, निदेशक, भाकृअनुप – भारतीय चरागाह एवंचारा अनुसंधान संस्‍थान (IGFRI), झांसी, उत्‍तर प्रदेश और आईजीसी की आयोजन समितिके अध्‍यक्ष ने यह आश्‍वासन दिया कि इस कांग्रेस के परिणामों को आईजीसी के लक्ष्‍यों में शामिल किया जाएगा।

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डॉ. पंजाब सिंह, पूर्व सचिव, डेयर एवं महानिदेशक, भाकृअनुप तथा संचालन समिति के अध्‍यक्ष ने अपने संबोधन में वर्तमान ऊष्‍णकटिबंधीय चरागाहों जो कि पशुधन की उत्‍तरजीविता के लिए अति महत्‍वपूर्ण हैं, के संकटग्रस्‍त होने की समस्‍या का सामना करने का अनुरोध किया।

डॉ. आर.एस. परोदा, पूर्व सचिव, डेयर एवं महानिदेशक, भाकृअनुप और कांग्रेस के सम्‍माननीय अतिथि ने अपने संबोधन में कहा कि चरागाह और रेंज क्षेत्र, जिन्‍हें सामुदायिक सम्‍पत्ति माना जाता है, के संरक्षण के लिए पंचायतों को सशक्‍त बनाया जाना चाहिए।

23वीं अंतर्राष्‍ट्रीय चरागाह कांग्रेस का आयोजन ‘’पर्यावरण संतुलन, जैव विविधता एवं चारा उत्‍पादन के लिए चरागाह और रेंज का टिकाऊ उपयोग’’ विषय पर किया गया। इस कांग्रेस में 47 देशों के 500 से भी अधिक वैज्ञानिकों, किसानों, गैर-सरकारी संगठनों और विकास अधिकारियों ने भाग लिया। इस कांग्रेस का आयोजन संयुक्‍त रूप से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद; इंडियन रेंज मैनेजमेंट सोसायटी एवं भाकृअनुप –भारतीय चरागाह एवं चारा अनुसंधान संस्‍थान झांसी, उत्‍तर प्रदेश द्वारा किया गया।

इस अवसर पर चारा एवं चरागाह के क्षेत्र में उल्‍लेखनीय उपलब्धियों के लिए प्रगतिशील किसानों को सम्‍मानित किया गया।

डॉ. सुनील कुमार, अध्‍यक्ष, फसल विज्ञान संभाग, भाकृअनुप –भारतीय चरागाह एवं चारा अनुसंधान संस्‍थान, झांसी, उत्‍तर प्रदेश ने धन्‍यवाद ज्ञापन प्रस्‍तुत किया।

प्रमुख मुद्दे
साझा सम्‍पत्ति संसाधन/चरागाहों के डाटाबेस का विकास; चरागाह के पुनरूद्धार के लिए राष्‍ट्रीय कार्यक्रम; चारा फसलों के लिए बीमा और न्‍यूनतम मूल्‍य नीति; चरागाह प्रबंधन सहित आहार एवं चारा पर राष्‍ट्रीय नीति; फसल अपशिष्‍टों को जलाने पर प्रतिबंध की नीति और चारे के रूप में इसका इस्‍तेमाल; पारम्‍परिक चरागाह प्रबंधन, पशुपालन तथा खानाबदोशी; पर्यावरण अनुकूल प्रौद्योगिकियों के साथ तथा मशीनीकरण को अपनाकर सघन एवं व्‍यापक चारा उत्‍पादन प्रौद्योगिकियां विकसित करना; अपघटित चरागाह भूमि का प्रबंधन करने में सामाजिक और शैक्षणिक मुद्दे; चारागाही और पशुधन उत्‍पादन को प्रभावित करने वाली नीतियां; चरागाहों से ग्रीनहाउस गैसों का उत्‍सर्जन और न्‍यूनीकरण कार्रवाई; एकीकृत, उत्‍पादित भूदृश्‍य की दिशा में वन, कृषि वानिकी और वन्‍यजीव; बीज भंडारण, गुणवत्‍ता, परीक्षण, संगरोध तथा चरागाह प्रबंधन एवं पशु पालन पर बाजार की मांगों का मार्केटिंग प्रणाली प्रभाव; औषधीय पौधों, जैव ईंधन तथा वन्‍यजीव उत्‍पादों के लिए चरागाहों का वैकल्पिक उपयोग; तथा साझा सम्‍पत्ति संसाधनों का प्रबंधन करने में सार्वजनिक – निजी भागीदारी आदि।