भारतीय कृषि के रूपांतरण हेतु सम्‍मेलन

2 दिसम्‍बर, 2015, मुम्‍बई

Conference on Inter- and Intra-Sectoral Dynamics for Transforming Indian Agricultureडॉ. रमेश चन्‍द, सदस्‍य, नीति आयोग, भारत सरकार ने आज यहां भाकृअनुप – केन्‍द्रीय मत्‍स्‍य शिक्षा संस्‍थान, मुम्‍बई में भारतीय कृषि के रूपांतरण हेतु अंतर एवं अंतरा-क्षेत्रीय गतिकी पर एग्रीकल्‍चरल इकोनॉमिक्‍स रिसर्च एसोसिएशन के 23वें वार्षिक सम्‍मेलन का उद्घाटन किया।

अपने उद्घाटन संबोधन में, डॉ. रमेश चन्‍द ने इस बात पर बल दिया कि एसोसिएशन द्वारा क्षेत्र में नई जानकारी पर चर्चा करने के लिए एक प्‍लेटफार्म के रूप में सेवा करनी चाहिए और साथ ही व्‍यापक सामाजिक प्रासंगिकता पर आधारित अनुसंधान प्राथमिकताओं की पहचान करनी चाहिए। साथ ही कृषि क्षेत्र में अनेक जटिलताएं और धारणाएं हैं जिनकी गहराई से जांच करने की जरूरत है ताकि वैज्ञानिक साक्ष्‍यों और व्‍यावहारिक समाधानों को विकसित किया जा सके। उन्‍होंने कहा कि वर्तमान क्षेत्रीय परिदृश्‍य अनेक नई चुनौतियों और वास्‍तविकताओं के साथ जटिल बना हुआ है और इसके लिए अंतर-विषयी सहयोग के साथ नए दृष्टिकोण और आर्थिक साधनों की जरूरत है जिससे राष्‍ट्रीय लक्ष्‍यों को हासिल करने में मदद मिलेगी।

डॉ. हर्ष कुमार भनवाला, अध्‍यक्ष, नाबार्ड एवं समारोह के मुख्‍य अतिथि ने प्रतिनिधियों से कृषि अर्थशास्‍त्र को ग्रामीण विकास पर बल देते हुए कहीं अधिक व्‍यापक बनाने का अनुरोध किया। उन्‍होंने कृषि में सूचना प्रौद्योगिकी, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, कृषि निर्यात, छोटे तथा सीमान्‍त किसानों का कृषि से इतर अन्‍य पेशों में स्‍थानान्‍तरण, निवेश की प्राथमिकताओं और भूमि लीज आदि जैसे क्षेत्रों पर प्रकाश डाला जिन पर  अनुसंधानकर्मियों, संस्‍थानों तथा नीति निर्माताओं को ध्‍यान देना चाहिए।

इससे पहले डॉ. गोपाल कृष्‍ण, निदेशक, भाकृअनुप – केन्‍द्रीय मत्‍स्‍य शिक्षा संस्‍थान, मुम्‍बई ने अतिथिगणों और प्रतिनिधियों का स्‍वागत करते हुए कहा कि यह सम्‍मेलन अनुसंधानकर्मियों को आपस में  विचारों का आदान-प्रदान करने का एक उत्‍कृष्‍ट अवसर प्रदान करेगा।

अपने अध्‍यक्षीय भाषण में प्रो. चेंगप्‍पा, अध्‍यक्ष, एईआरए ने कहा कि हालांकि कृषि वृद्धि में गिरावट चिन्‍ता का विषय है लेकिन इस क्षेत्र में अभूतपूर्व रूपांतरण देखने को मिला है जिसमें उच्‍च मूल्‍य वाली जिंसों की ओर मांग में बदलाव तथा कृषि निर्यात में प्रगतिशील वृद्धि शामिल है। इस अवसर का इस्‍तेमाल कृषि प्रगति के लिए कृषि अर्थशास्त्रियों के बीच नेटवर्क बनाने के लिए किया जाना चाहिए।

बाद में, डॉ. पी.के. जोशी, निदेशक – दक्षिण एशिया, आईएफपीआरआई, नई दिल्‍ली ने ‘पाथवेज टू इम्‍प्रूव फूड सेक्‍युरिटी एंड रिडयूस पॉवर्टी इन इमर्जिंग इंडिया’ विषय पर अध्‍यक्षीय भाषण प्रस्‍तुत किया जिसमें इन्‍होंने अनेक चुनौतियों जैसे कि खाद्य एवं पोषणिक सुरक्षा, कृषि उत्‍पादन पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव  पर प्रकाश डालते हुए इस बात पर बल दिया कि आर्थिक प्रगति कहीं अधिक सम्‍यक और पोषण के प्रति संवेदनशील होनी चाहिए।

Conference on Inter- and Intra-Sectoral Dynamics for Transforming Indian Agricultureडॉ. एम. कृष्‍णन, अध्‍यक्ष, सामाजिक विज्ञान संभाग, भाकृअनुप – केन्‍द्रीय मत्‍स्‍य शिक्षा संस्‍थान, मुम्‍बई तथा आयोजन सचिव ने धन्‍यवाद ज्ञापन प्रस्‍तुत किया।

इस तीन दिवसीय सम्‍मेलन का आयोजन भाकृअनुप – केन्‍द्रीय मत्‍स्‍य शिक्षा संस्‍थान, मुम्‍बई के साथ मिलकर एग्रीकल्‍चरल इकोनॉमिक्‍स रिसर्च एसोसिएशन (इंडिया) द्वारा किया गया।

इस सम्‍मेलन में 250 से भी अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया तथा 176 पेपर प्रस्‍तुत किए गए और उन पर चर्चा की गई।

(स्रोत : भाकृअनुप – केन्‍द्रीय मत्‍स्‍य शिक्षा संस्‍थान, मुम्‍बई)