असम में बाढ़ और सूखे की आकस्मिक तैयारी

27 जून 2016, गुवाहाटी

Contingency Preparedness towards Floods and Mid-season Droughts in Assamभाकृअनुप- केन्द्रीय शुष्क भूमि अनुसंधान संस्थान (क्रीडा), उत्तर-पूर्वी पर्वतीय क्षेत्र के लिए भाकृअनुप अनुसंधान परिसर, उमियाम कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग गुवाहाटी द्वारा संयुक्त रूप से गुवाहाटी में खरीफ-2016 में बाढ़ एवं मध्य-मौसम सूखा से निपटने के लिए कृषि संबंधी आकस्मिक योजना की तैयारियों में तेजी लाने के लिए इंटरफेस मीटिंग आयोजित की गई।

श्री अमलान बरूआ, सचिव (कृषि) ने अपने संबोधन में कहा कि आकस्मिक योजनाओं के प्रति जागरूकता लाने में विभाग एवं किसानों के बीच संयोजक कड़ी के रूप में ग्रामीण स्तर पर कार्यकर्ताओं की आवश्यकता है। उन्होंने मौसम विचलन की स्थिति में भी किसानों की आय स्थिर और सुनिश्चित करने के लिए जिलाधिकारियों को सुझाव दिया। इसके साथ ही उन्होंने अधिकारियों से यह आग्रह किया कि वे रबी के मौसम में असम में विशेष तौर पर दहलनी व तिलहनी फसलों के उत्पादन को एएयू द्वारा विकसित तकनीकों के माध्यम से बढ़ाने में सहयोग दें।

डॉ. सीएच. श्रीनिवास राव, निदेशक, भाकृअनुप – क्रीडा ने असम के 22 राज्यों में जनहित के लिए जारी किये जाने वाली आकस्मिक योजनाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने विभिन्न राज्यों के लिए मानसून पूर्वानुमान के आधार पर आयोजित बैठकों के बारे में भी जानकारी दी।

डॉ. के.वी. राव, भाकृअनुप – क्रीडा ने मानसून की वर्तमान स्थिति के बारे में अवगत कराया तथा मध्य या मौसम के अंत में फसलों को प्रभावित करने वाली सामान्य से कम वर्षा की स्थिति में आकस्मिक योजना निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया। योजना निर्माण में अचानक आयी बाढ़ को भी ध्यान में रखने की बात कही जो असम में प्रायः देखी जाती है।

डॉ. जी.एन. हजारिका, निदेशक (अनुसंधान), असम कृषि विश्वविद्यालय (एएयू) ने अधिकारियों को एएयू द्वारा विकसित तकनीकों, बाढ़ की स्थिति में चावल की किस्मों, उपलब्ध संसाधनों के कुशलतापूर्वक उपयोग के लिए प्राकृतिक संसाधनों के लिए विकसित प्रबंधन तकनीकों के आकलन के लिए कहा। उन्होंने कम वर्षा के बावजूद रबी फसल की संभावनाओं के बारे में दर्शकों को जानकारी दी और कम अवधि के चावल किस्मों तथा बाढ़ के बाद की स्थिति में पौध रोपण का सुझाव दिया।

असम के लिए अनुशंसाएं:

  • अचानक आई बाढ़ और मध्य मौसम व आवधिक सूखे की स्थितियों पर नियंत्रण को प्राथमिकता
  • ग्रामीण स्तर पर विस्तार कार्यकर्ताओं की आकस्मिक योजना का मूल्यांकन और कार्यान्वयन में सक्रिय रूप से शामिल करना
  • मध्य मौसम सूखा का सामना करने के लिए प्रत्येक खेत में तालाब को बढ़ावा देना
  • चावल के खेतों में अतिरिक्त जल के भंडारण के लिए खेत के मेड़ों की ऊंचाई में वृद्धि करना
  • बाढ़ संभावित क्षेत्रों में रबी की कार्य योजना पर बल तथा इसे दलहन और तिलहन के उत्पादन में बढ़ावा देने के लिए जोड़ना
  • बाढ़ प्रभावित जिलों में बाढ़ सहिष्णु किस्मों को बढ़ावा देना
  • मध्य सूखे की स्थिति में कम जलस्तर के प्रयोग हेतु डीजल पंप पर सब्सिडी देना
  • मार्च व अप्रैल के आवधिक सूखे से बचने के लिए नवम्बर के महीने तक गरमी के धान (बोरो चावल) की बुआई पूरी कर लेना
  • बाढ़ पश्चात की स्थिति से निपटने के लिए कम अवधि में तैयार होने वाली चावल की किस्मों को बढ़ावा देना
  • मध्य एवं ऊपरी भूमि पर चावल के स्थान पर उच्च मूल्य वाली बागवानी पद्धति को अपनाना
  • आजीविका सुरक्षा हेतु पशुओं के लिए चारे व आवास की उचित व्यवस्था को प्राथमिकता
  • आकस्मिक योजनाओं के कार्यान्वयन हेतु जिला स्तरीय अधिकारियों का एएयू, जोरहाट में क्षमता निर्माण
  • कृषि सलाह एवं मौसम संबंधी बुलेटिनों का स्थानीय चैनलों व एसएमएस के माध्यम से वितरण
  • एसएयू व राज्य कृषि विभाग के अधिकारी, केवीके योजना समन्वयक, भाकृअनुप व अन्य स्थानीय संस्थानों, एआईसीआरपीडीए, एआईसीआरपीएएम ने इस कार्यशाला में भाग लिया।

    (स्रोतः भाकृअनुप – केन्द्रीय शुष्क भूमि कृषि अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद)