एआईसीआरपीआरएम की 23वीं वार्षिक सामूहिक बैठक

5-7 अगस्त 2016, मथुरा

अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (तोरिया-सरसों) की 23वीं वार्षिक समूहिक की बैठक 5-7 अगस्त, 2016 को पंडित दीन दयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान एवं गो- अनुसन्धान संस्थान (डीयूवीएएसयू), मथुरा, उत्तर प्रदेश में आयोजित की गयी।

	23rd Annual Group meeting of AICRPRM 	23rd Annual Group meeting of AICRPRM

डॉ. जे.एस. संधू ने अपने अभिभाषण में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए तिलहनी और दलहनी फसलों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश में तिलहनों की उत्पादकता एवं उत्पादन बढ़ाने के लिए तकनीकी हस्तक्षेप, संकर, उन्नत बीज प्रतिस्थापन, फसल प्रबंधन विधियां, गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन, रोग प्रबंधन बहुत महत्वपूर्ण हैं।

डॉ. बी.बी. सिंह, सहायक महानिदेशक (ओपी), भाकृअनुप, नई दिल्ली ने गैर-पारंपरिक क्षेत्रों विषेशकर धान की परती भूमि व प्रायद्वीपीय क्षेत्रों में सरसों की खेती शुरू करने पर जोर दिया।

डॉ. के.एम.एल. पाठक, कुलपति, डीयूवीएएसयू, मथुरा ने इस महत्वपूर्ण बैठक के लिए भाकृअनुप द्वारा विश्वविद्यालय को चुने जाने पर धन्यवाद दिया। इसके साथ ही उन्होंने चारा फसलों को बढ़ावा देने के लिए बीज उत्पादन कार्यक्रम प्रारंभ करने की आशा व्यक्त की और विश्वविद्यालय में सरसों के बीज उत्पादन के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की सहमति प्रदान की।  

डॉ. धीरज सिंह, निदेशक, डीआरएमआर, भरतपुर ने योजना के तहत वर्ष 2015-16 में गतिविधियों से संबंधित प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत किया।

इस अवसर पर हितधारकों के लाभ के लिए चार प्रकाशन गणमान्यों द्वारा जारी किए गए।

तीन किस्मों में से एक सीएसएसआरआई, करनाल द्वारा क्षारीयता के लिए विकसित किस्म: न्यू सीएस1100-1-22-3 (सीएस58) और अधिसूचित डीआरएमआर, भरतपुर द्वारा विकसित एनआरसीएचबी101 और सीसीएसएचएयू, हिसार द्वारा विकसित आरएच749 शेष दो किस्मों को क्षेत्र – 5 (छत्तीसगढ़, बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम और उत्तर-पूर्वी राज्य) और क्षेत्र – 3 (उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और राजस्थान) के लिए अनुशंसित किया गया है।

22 केन्द्रों के 150 से भी अधिक प्रतिभागियों ने इस बैठक में भाग लिया।

(स्रोतः भाकृअनुप – तोरिया - सरसों अनुसंधान निदेशालय)