भाकृअनुप महानिदेशक का प्रौद्योगिकी प्रभाव के विश्लेषण पर जोर

15 जून 2016, कोलकाता

डॉ. त्रिलोचन महापात्र, सचिव, डेयर एवं महानिदेशक, भाकृअनुप ने 15 जून, 2015 को भाकृअनुप - कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान (अटारी), कोलकाता का दौरा किया।

DG Emphasized Impact Analysis of Technologies DG Emphasized Impact Analysis of Technologies

डॉ. त्रिलोचन महापात्र ने वैज्ञानिकों से संवाद के दौरान यह सुझाव दिया कि तकनीकों के स्रोत की पहचान के साथ ही राज्यों के विभागों को दिए गए उपयुक्त चिन्हित तकनीकों के ओएफटी और एफएलडी का संकलन किया जाय। डॉ. महापात्र ने कहा कि कृषि विज्ञान केन्द्रों के वर्गीकरण व पहचान और प्रदर्शन संकेतक को जुलाई 2016 तक अंतिम रूप दे दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि विभिन्न तकनीक/ केवीके द्वारा अनुकूलन विचार और विभिन्न अर्थिक नियोजनों के प्रसार दर/ सांख्यिकीय मैट्रिक्स तकनीकों के सामाजिक-आर्थिक प्रभाव पर शोध किए जाने चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि प्रत्येक केवीके को मोबाइल एप जारा करना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि लक्ष्य समूहों के लिए आवश्यक जानकारी के आधार पर मात्स्यिकी या चावल संस्थानों द्वारा एप विकासित करना और उसे बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने सलाह दी कि हितधारकों की संख्या बढ़ाने के लिए मीडिया के साथ संबंध बनाना आवश्यक है।

महानिदेशक महोदय ने संस्थान के प्रकाशन "सफल किसान - केवीके के प्रयास" का विमोचन किया।

डॉ. एस. के. रॉय, निदेशक, भाकृअनुप – अटारी, कोलकाता ने संस्थान की केवीके को अधिदेशित गतिविधियों, निक्रा और हालिया जागरूकता कार्यक्रमों की सफलता के बारे में जानकारी दी।

डॉ. जे.के. जेना, उपमहानिदेशक (मात्स्यिकी), निदेशक, स्टेशन प्रभारी, भाकृअनुप-अटारी कोलकाता के नजदीकी क्षेत्रीय स्टेशनों के प्रमुख, वैज्ञानिकों और भाकृअनुप-अटारी, कोलकाता के स्टॉफ ने इस आयोजन में भाग लिया।

(स्रोत: भाकृअनुप - अटारी, कोलकाता)