एनएमओओपी 2016-17 के अंतर्गत तिलहन पर सामूहिक प्रथम पंक्ति प्रदर्शन

जोरहाट, 9 सितंबर, 2016

Cluster Frontline Demonstration on Oilseeds under NMOOP 2016-17डॉ. के.एम. बुजरबरूआ (कुलपति, एएयू, जोरहाट) द्वारा दो दिवसीय 'तिलहन पर सामूहिक प्रथम पंक्ति प्रदर्शन' का उद्घाटन किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन भाकृअनुप - कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान (अटारी), क्षेत्र- 3, उमियाम, मेघालय द्वारा राष्ट्रीय तिलहन एवं ताड़ तेल मिशन (एनएमओओपी) के तहत 2 सितंबर, 2016 को असम कृषि विश्वविद्यालय और 8-9 सितंबर, 2016 को कामरूप, काहिकुची में आयोजित किया गया। डॉ. बुजरबरूआ ने अपने संबोधन में विदेशों से आयात को कम करने के लिए तिहलन के क्षेत्रफल को बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने रबी के दौरान परती भूमि में तिलहनी फसलों की खेती के बारे में बताया।

डॉ. विद्युत सी. डेका (निदेशक, अटारी, क्षेत्र 3, उमियाम) ने अपने संबोधन में कहा कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य तिलहनी फसलों के बारे में विचार एवं जानकारी को प्रस्तुत करना था। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में तिलहन उत्पादकता एवं क्षेत्रफल को बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न तकनीकों, अध्ययन एवं ज्ञान का उपयोग भी इस कार्यक्रम का उद्देश्य था।

डॉ. धीरज सिंह (निदेशक, डीआरएमआर) ने प्रथम पंक्ति समूह प्रदर्शन के तहत तिलहनी फसलों के क्षेत्रफल एवं उत्पादकता के बीच संतुलन के महत्व के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी।

डॉ. एच.सी. भट्टाचार्य (डीईई, एएयू, जोरहाट) ने परिषद द्वारा प्रस्तावित लक्ष्यों को पूरा करने की आवश्यकता और प्रभावी परिणाम एवं उत्पादकता को पाने में केवीके की समन्वयक भूमिका के बारे में जानकारी दी।

डॉ. ए.के. गोगोई (प्रभारी, सीपीसीआरआई, असम) ने केवीके से आग्रह किया कि वे अपने कार्यों को अथक परिश्रम से पूरा करें जिससे किसान को प्रेरणा मिले। इसके साथ ही यह सुझाव दिया कि सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले लाभार्थी को पुरस्कृत भी किया जाएगा। उन्होंने ‘तिलहनी फसलों की इन्द्रधनुषी खेती’ को पूरा करने और किसानों तथा हितधारकों को प्रेरित करने के लिए इस प्रकार के अधिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों की आवश्यकता पर जोर दिया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को तिलहनी फसलों से जुड़े विभिन्न पहलुओं जैसे, बीज उत्पादन और विकसित तकनीक एवं कीट प्रबंधन आदि के बारे में प्रशिक्षण दिया गया। प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न तकनीकों के बारे में जानकारी प्राप्त की और विभिन्न अनुसंधान संस्थानों से आए वैज्ञानिकों से संवाद द्वारा अपनी शंकाओं को दूर किया।

तिलहन पर प्रथम पंक्ति समूह प्रदर्शन कार्यक्रम में असम एवं नगालैंड के 67 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

(सौजन्यः अंग्रेजी संपादकीय एकक)