भाकृअनुप, महानिदेशक द्वारा कुक्कुट अनुसंधान निदेशालय, हैदराबाद में पशु गृह का शिलान्यास

31 अगस्त 2016, हैदराबाद

डॉ. त्रिलोचन महापात्र, सचिव, डेयर एवं महानिदेशक, भाकृअनुप द्वारा 31 अगस्त, 2016 को भाकृअनुप - कुक्कुट अनुसंधान निदेशालय, हैदराबाद में पशु गृह की आधारशिला रखी गई।

डॉ. महापात्र ने निदेशालय के वैज्ञानिकों एवं स्टॉफ को संबोधित करते हुए संस्थान की गतिविधियों सहित निदेशालय द्वारा विकसित कुक्कुट की नई किस्मों की प्रशंसा की और किसानों की जरूरतों को पूरा करने के लिए नए परिसर में स्थापित होने वाली नयी सुविधा का उपयोग करने का सुझाव दिया। महानिदेशक महोदय ने प्योरलाइन (शुद्ध संतति) के प्रदर्शन को बढ़ाने के लिए उन्नत अनुसंधान पर बल दिया। उन्होंने स्थानीय क्षेत्रों में उन्नत देसी किस्मों की लोकप्रियता और उत्पादकता बढ़ाने के लिए स्थानीय अवर्णित एवं स्थानीय देसी किस्मों के लक्षण व आनुवंशिकता के मध्य संबंध की खोज करने वाले आधारभूत विज्ञान में अनुसंधान पर बल दिया। इसके साथ ही उन्होंने संस्थान द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों के व्यावसायीकरण पर भी जोर दिया।

DG, ICAR laid down Foundation stone of Animal House at Directorate of Poultry Research, HyderabadDG, ICAR laid down Foundation stone of Animal House at Directorate of Poultry Research, HyderabadDG, ICAR laid down Foundation stone of Animal House at Directorate of Poultry Research, HyderabadDG, ICAR laid down Foundation stone of Animal House at Directorate of Poultry Research, Hyderabad

महानिदेशक महोदय ने इस अवसर पर 'कुक्कुट पालन में आनुवंशिकता प्रबंधन पर व्यावहारिक नियमावली' नामक संस्थान के प्रकाशन को जारी किया।

डॉ. एच. रहमान उपमहानिदेशक (पशु विज्ञान) ने भारत में आंगन मुर्गीपालन को लोकप्रिय बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने एवं अन्य गतिविधियों के लिए संस्थान की प्रशंसा की। उन्होंने देश में उभर रहे व पुनरावृति वाले कुक्कुट रोगों की चर्चा की एवं कुक्कुट के विभिन्न वायरल रोगों के लिए एकीकृत टीके के विकास की आवश्यकता पर बल दिया।

डॉ. जे.के. जेना, उपमहानिदेशक (मत्स्य विज्ञान) ने ग्रामीण किसानों के आर्थिक उत्थान के लिए एकीकृत मछली और कुक्कुट पालन की आवश्यकता के समय की मांग बताई।

इससे पूर्व डॉ. आर.एन. चटर्जी, निदेशक, आईसीएआर-डीपीआर, हैदराबाद ने संस्थान की महत्वपूर्ण उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कुक्कुट किस्मों के पालन के माध्यम से स्थानीय जननद्रव्य और ग्रामीण सीमांत किसानों की अर्थव्यवस्था के विकास में एआईसीआरपी और बीज परियोजना केन्द्रों के योगदान की चर्चा की।

इस कार्यक्रम में डॉ. एच. रहमान, उपमहानिदेशक (पशु विज्ञान), डॉ. जे.के. जेना, उपमहानिदेशक (मात्स्यिकी विज्ञान); स्थानीय भाकृअनुप संस्थानों के निदेशकगण; डॉ. वी. प्रभाकर राव, पूर्व कुलपति, एसवीवीयू, तिरूपति; डॉ. ए. पद्मराजू, पूर्व कुलपति, एएनजीआरएयू, हैदराबाद; डॉ. आर.पी. शर्मा, पूर्व निदेशक, डीपीडी एवं अन्य गणमान्यों ने भाग लिया। डॉ. आर.एन. चटर्जी, निदेशक, भाकृअनुप-डीपीआर ने सभी का स्वागत किया।

इस कार्यक्रम में निदेशकगण एवं भाकृअनुप संस्थानों एवं कृषि विश्वविद्यालयों ने वरिष्ठ अधिकारयों ने भी भाग लिया।

(स्रोतः भाकृअनुप – कुक्कुट अनुसंधान निदेशालय, हैदराबाद)