हरियाणा के लवणता से प्रभावित अंतःस्थलीय खारे जल में झींगे की खेती

23 जुलाई, 2016, सहरवा

Shrimp farming in the salt affected inland saline soils of Haryanaश्री संदीप सिंह, निदेशक, डीएन फार्म द्वारा हरियाणा में लवणता से प्रभावित अंतःस्थलीय खारे जल में झींगा पालन की संभावनाओं जागरूकता, एवं चुनौतियों पर ‘नीली क्रांति की ओर हरियाणा’ शार्षक से सम्मेलन एवं संवाद सभा का आयोजन किया गया। डीएन फार्म द्वारा खारापानी जलजीव पालन संस्थान (सीआईबीए) द्वारा विकसित ‘वेन्नामेई प्लस’ लागत प्रभावी झींगा चारा तकनीक हस्तांतरण की मांग की है जिसके लिए किसान समझौता पत्र पर हस्ताक्षर के लिए सहमत हैं। इस क्रम में सीआईबीए वैज्ञानिकों ने तकनीकी उपयुक्तता के जांच के लिए प्रस्तावित चारा मिल का दौरा किया।

डॉ. के.के. विजयन, निदेशक, सीआईबीए, चेन्नई ने ‘हरियाणा के लवणता प्रभावित अंतःस्थलीय खारे जल में झींगे की खेती’ नामक सम्मेलन का उद्घाटन किया। इसके साथ ही उन्होंने हरियाणा में झींगा उत्पादन की संभावनाओं पर भी चर्चा की। डॉ. विजयन ने इस तरह की चुनौतियों के प्रति सचेत करते हुए कहा कि अंतःस्थलीय खारे जल में झींगे की खेती करते समय लवणता एवं एवं अन्य सावधानियों को ध्यान में रखना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जल के उपयोग में पुनर्चक्रण, फसल चक्रण एवं पुनःप्रयोग किया जाए एवं इसमें आधुनिक तकनीकों को अपनाया जाए। इसके अलावा उन्होंने क्षेत्र में बेहतरीन सतत झींगा उत्पादन प्रबंधन के आवश्यक क्रियान्वयन एवं विकास पर जोर दिया और सतत दृष्टिकोण के माध्यम से लंबी अवधि के लाभ के लिए किसानों से आग्रह भी किया। डॉ. अंबाशंकर, प्रधान वैज्ञानिक, सीबा ने ‘ झींगा पालन में पोषण एवं चारा प्रबंधन’ विषय पर व्याख्यान दिया जिसमें पोषण भार, जल का पुनर्चक्रण एवं पर्यावरण अनुकूल झींगा पालन की समस्याएं शामिल थीं।

इस सम्मेलन में विभिन्न संस्थानों से आए हुए वैज्ञानिकों ने झींगा पालन एवं विशेष तौर पर अंतःस्थलीय लवणीय जल में झींगा पालन पर व्याख्यान दिये। सीबा के वैज्ञानिकों एवं झींगा पालक किसानों के बीच एक संवाद सत्र का भी आयोजन किया गया जिसमें वैज्ञानिकों ने किसानों की झींगा पालन से जुड़ी जिज्ञासाओं का समाधान किया। लगभग 200 किसानों एवं हितधारकों ने इस सम्मेलन एवं संवाद सभा में भाग लिया।

(स्रोतः भाकृअनुप –सीबा, चेन्नई)