कृषि मंत्री द्वारा पेरेन में कृषि विज्ञान केन्द्र का शिलान्यास

06 अगस्त, 2016, नगालैंड

श्री राधा मोहन सिंह, केन्द्रीय कृषि एंव किसान कल्याण मंत्री द्वारा 6 अगस्त, 2016 को जलुकी, पेरेन में केवीके की आधारशिला का अनावरण किया। इस अवसर पर नगालैंड के माननीय मुख्यमंत्री श्री टी.आर.जेलिआंग द्वारा किसान मेला व प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया।

Foundation Stone of KVK in Peren Unveiled by Shri Radha Mohan Singh Foundation Stone of KVK in Peren Unveiled by Shri Radha Mohan Singh

श्री जेलिआंग ने खेती के विकास के लिए केवीके की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि केवीके तकनीकी ज्ञान को जिले के किसानों तक पहुंचाते हैं जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार होता है। उन्होंने कहा कि 6 अगस्त, 2016 को पेरेन जिले में तीन महत्वपूर्ण संस्थानों की स्थापना की जायेगी जिनका स्वागत किया जाना चाहिए। इनमें केवीके, किसान प्रशिक्षण केन्द्र और पशु चिकित्सा कॉलेज शामिल है।

श्री एस. चुबा लोंगकुमार, संसदीय सचिव, पशु चिकित्सा और पशुपालन, नगालैंड ने आईसीएआर और केवीके द्वारा प्रशिक्षण के माध्यम से किसानों, महिला किसानों और युवाओं के लिए आवश्यक आद्यतन तकनीक पहुंचाने के लिए आभार व्यक्त किया।

इससे पहले, गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत करते हुए डॉ. डी.जे. राजखोवा, संयुक्त निदेशक, उत्तर-पूर्वी पहाड़ी क्षेत्र के लिए आईसीएआर अनुसंधान केन्द्र, नगालैंड ने केवीके के महत्व की चर्चा करते हुए जिले के विकास में केवीके, पेरेन की भूमिका का उल्लेख किया।

इस कार्यक्रम में नगालैंड के 500 से अधिक किसानों ने भाग लिया। इन किसानों को मछली के जीरे, पौधे, कृषि उपकरण, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, चूजे और शूकर शिशु के अलावा विभिन्न महत्वपूर्ण कृषि आदान वितरित किए गए। इसके साथ ही कृषि और संबद्ध क्षेत्रों पर विविध प्रकाशन मुख्यमंत्री और अन्य गणमान्य व्यक्तियों द्वारा जारी किए गए।

श्री टालोखे येपथोमी, मंत्री, लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी, नगालैंड, श्री पंकज कुमार, मुख्य सचिव, नगालैंड, डॉ. त्रिलोचन महापात्र, सचिव, डेयर एवं महानिदेशक, भाकृअनुप, श्री छबिलेन्द्र राऊल, अतिरिक्त सचिव, डेयर एवं सचिव भाकृअनुप, डॉ. ए.के. सिंह, उपमहानिदेशक (कृषि विस्तार), डॉ. एस. भास्कर, सहायक महानिदेशक (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन) डॉ. एच. रहमान, उपमहानिदेशक (पशु विज्ञान), डॉ. एस.वी. नचान, निदेशक, भाकृअनुप- उत्तर-पूर्वी पर्वतीय क्षेत्र के लिए अनुसंधान परिसर, उमियाम, मेघालय, डॉ. प्रेमजीत सिंह, कुलपति, केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, इम्फाल और डॉ. बी.सी. डेका, निदेशक, अटारी, क्षेत्र-3, मेघालय इस कार्यक्रम में शामिल थे।