सब्जी उत्पादन की उन्नत तकनीकों को अपनाकर बढ़ाई आय

Sushil Kumar is now a Lakhpati Farmer, Thanks to Vegetables Peaश्री सुशील कुमार बिन्द ग्राम-बहुती, ब्लाक मंडिहान, जिला मिर्जापुर के किसान हैं। उन्होंने संस्थान द्वारा आयोजित एक किसान मेले में भाग लिया। वह कृषि कार्य से बहुत ही निराश थे। उनके पास एक हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है जिससे उन्हें बहुत मुश्किल से वर्ष भर गुजारा करने लायक अनाज मिल पाता था। कई बार तो फसल की लागत भी नहीं मिल पाती थी जिससे उनकी आर्थिक स्थिति बहुत ही कमजोर थी।

श्री बिन्द ने संस्थान द्वारा आयोजित किसान मेले में वैज्ञानिकों से सब्जी उत्पादन की उन्नत तकनीकों के बारे विस्तृत जानकारी प्राप्त की। इससे वह बहुत प्रभावित हुए और स्वयं भी उन्नत तकनीक अपनाने का निश्चय कर लिया। संस्थान के वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में उन्होंने सब्जियों की कुछ प्रजातियों को अपने खेत में लगाया जिससे उन्हें काफी लाभ प्राप्त हुआ।

संस्थान और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा चलाई जा रही राष्ट्रीय कृषि नवोन्मेषी परियोजना के अन्तर्गत उनके गांव का चयन उन्नत तकनीक के हस्तांतरण के लिए किया गया। संस्थान के वैज्ञानिकों की देखरेख में उन्होंने मटर की विकसित किस्में काशी उदय और काशी उन्नति की बुवाई अक्टूबर माह के अन्तिम सप्ताह में की।

Sushil Kumar is now a Lakhpati Farmer, Thanks to Vegetables Pea

दिसम्बर के महीने में उन्होंने 1200  किग्रा. फलियों की तुड़ाई की जिसे 25-35 रूपया प्रति किग्रा. की दर से बेचकर 40,000 रूपये प्राप्त किए इसके बाद जनवरी महीने में 3500 किग्रा. फलियों को 15-20 रूपया प्रति किग्रा. की दर से बेचकर 57500 रूपया प्राप्त किया। फरवरी महीने में उत्पादन में गिरावट होने के कारण उन्होंने 1500 किग्रा. मटर की फलियों को 5-10 रूपया प्रति किग्रा की दर से बेचकर 11250 रूपया प्राप्त किया।

इसके बाद श्री बिन्द संस्थान ने वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार बीज उत्पादन के लिए मटर की फलियों को तोड़ना बन्द कर दिया। उन्होंने 2500 किग्रा. मटर के बीज प्राप्त किए जिसे बेचकर 1500 रुपये मिले। श्री बिन्द ने 4 माह के अन्तराल में लगभग 1,23,750 रूपया प्राप्त किए। जिसमें से 5000 रूपया बीज का मूल्य, 10,000 रूपया परिवहन व 5000 रूपये उर्वरक तथा 2000 रूपये जुताई व खेत की तैयारी में खर्च किए। कुल मिलाकर 23000 रूपया खर्च करके उनको लगभग 100000 रूपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ।

सब्जी उत्पादन से वह बहुत ही खुश हैं वह कृषि कार्य को वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार कर रहे है तथा संस्थान के वैज्ञानिकों से लगातार सम्पर्क में रहते हैं। सब्जी उत्पादन से हो रहे लाभ को देखकर उनके गांव के अन्य किसान सब्जी उत्पादन के लिए आतुर है। आज बहुती गांव में श्री बिंद प्रगतिशील किसान के रूप में प्रसिद्ध हैं।
भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी के वैज्ञानिक लगातार सब्जियों की नई व उन्नत किस्मों के विकास के लिए कार्यरत हैं, इसी क्रम में संस्थान के वैज्ञानिकों ने मटर की नई किस्मों के विकास में सफलता प्राप्त की है। काशी उदय व काशी नंदनी संस्थान द्वारा विकसित नई किस्में हैं। ये दोनों प्रजाति अधिक उत्पादन देने वाली व इनकी फलियां बड़ी व दाने मीठे होते हैं। संस्थान सब्जियों की विकसित प्रजातियों को किसानों तक पहुंचाने के लिए भी प्रयासरत है। इसी क्रम में संस्थान द्वारा समय-समय पर किसान मेला व सब्जी प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है।

(स्त्रोत-एनएआईपी मास मीडिया सब प्रोजेक्ट भारतीय और सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी)