कृषि उपकरणों व यंत्रों पर एआईसीआरपी की कार्यशाला

3 जनवरी, 2017, कोयंबटूर

कृषि उपकरणों व यंत्रों पर एआईसीआरपी की कार्यशालाकृषि उपकरणों एवं यंत्रों पर अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना की 31वीं कार्यशाला का आयोजन 3-5 जनवरी, 2017 को तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय (टीएनएयू), कोयंबटूर में किया गया।

डॉ. के. रामासामी, कुलपति, टीएनएयू, ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कृषि में परियोजना के 3-4 केन्द्रों को शामिल कर ड्रोन के प्रयोग पर स्वतंत्र अनुसंधान कार्यक्रम की आवश्यकता पर चर्चा की। उन्होंने यंत्रीकृत उभरी क्यारियों में खेती के लाभ तथा फसल अवशेषों के लिए यथा स्थान पर श्रेडर मशीन (छोटे टुकड़े करने वाला यंत्र) के प्रयोग की आवश्यकता के बारे में जानकारी प्रदान की।

डॉ. के. अलगूसुंदरम, उपमहानिदेशक (अभियांत्रिकी), भाकृअनुप ने अपने संबोधन में कहा कि कृषि को पर्यावरण अनुकूल, अधिक लाभकारी, कम लागत वाली बनाने के लिए नई प्रौद्योगिकियों के माध्यम से मशीनों के प्रयोग को विकसित तथा लोकप्रिय बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कृषि में स्वचालन की दिशा में कृषि इंजीनियरों की भूमिका पर भी बल दिया। उन्होंने एफआईएम समूह से आग्रह किया कि पावर टिलर और मिनी ट्रैक्टरों के समान उपकरण विकसित करके छोटे खेतों के यंत्रीकरण पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

श्री वी. थेईवेन्द्रन, मुख्य अभियंता (कृषि अभियात्रिकी), तमिलनाडु ने हल्दी रोपड़ मशीन, हल्दी फसल काटने की मशीन, वीडर, कम लागत वाली नारियल तुड़ाई की मशीन, चैनल (जल नाली) साफ करने की मशीन, कपास चुनने की मशीन, ज्वार काटने की मशीन, मुलायम नारियल काटने की मशीन इत्यादि जैसे उपकरणों का विकास राज्य में यत्रीकरण के लिए आवश्यक है।

डॉ. कंचन कुमार सिंह, सहायक महानिदेशक (कृषि अभियांत्रिकी) भाकृअनुप व सभा के उपाध्यक्ष ने विविधीकृत फसलों जैसे गन्ना, कपास, मक्का, तिलहनों व दलहनों के यंत्रीकरण पर बल दिया।

एफआईएम पर एआईसीआरपी – एक झलक, 2017 के प्रमुख अनुसंधान तथा ‘धान के पुआल के यांत्रिक प्रबंधन’ तथा ‘चारा उत्पादन में यंत्रीकरण’ पर तकनीकी बुलेटिन, अल्ट्रासोनिक सेंसर आधारित बागवानी फसलों के लिए छिड़काव यंत्र, असम की कृषि मशीनरी उत्पादकों की निर्देशिका, खरीफ की चावल की खेती के लिए उभरी क्यारी में रोपण करने वाले यंत्र को भी कार्यक्रम के दौरान जारी किया गया।

(स्रोतः एआईआरपी ऑन फार्म इम्प्लिमेंट्स एंड मशीनरी)