लवण सहिष्णु बासमती चावल की किस्म 'सीएसआर 30’ द्वारा आर्थिक सशक्तिकरण

Mr. Isham Singh with his knowledge network and CSSRI Scientists at the CSR 30 variety plot केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान (सीएसएसआरआई), करनाल ने बासमती चावल की एक लवण सहिष्णु किस्म 'सीएसआर 30' जारी की है। यह हरियाणा के किसानों के बीच एक लोकप्रिय किस्म है। नवीनतम अनुमानों के अनुसार, हरियाणा राज्य में बासमती चावल की खेती के लगभग 60 प्रतिशत क्षेत्र पर 'सीएसआर 30' उगाई जाती है। हरियाणा के नवोन्मेषी एवं प्रगतिशाली किसानों ने 'सीएसआर 30' को एक लोकप्रिय किस्म बनाने में प्रमुख भूमिका अदा की है। इन किसानों ने 'सीएसआर 30' को लवण प्रभावित और कृषि अयोग्य मिट्टी में उगाने की चुनौती स्वीकार की।

कछवा गांव के श्री ईशम सिंह (40वर्ष) और श्री विक्रम सिंह (36वर्ष) वे दो नमोन्वेषी किसान हैं, जो दूसरों के लिए प्रेरक बने। सीएसएसआरआई, करनाल ने बासमती किस्म 'सीएसआर 30' के प्रदर्शन के लिए श्री ईशम सिंह की कृषि भूमि को चुना। श्री ईशम सिंह ने 'सीएसआर 30' के प्रर्दशन के बारे में सूचित किया। इस किस्म में लवणीय एवं सोडिक वातावरण में बढ़ने की बेहतर क्षमता है तथा कीट एवं रोगों के प्रति सहिष्णु होने के साथ ही, इसका उच्च बाजार मूल्य एवं विदेशों मांग है। 'सीएसआर 30' पूर्व बासमती किस्मों की तुलना में बेहतर है। पूर्व में श्री सिंह 13-11 क्विंटल प्रति एकड़ (28-33 क्विंटल प्रति हैक्टर) उपज लेते थे, लेकिन बाद में प्रक्षेत्र प्रदर्शनों में सीएसएसआरआई के वैज्ञानिकों द्वारा प्राप्त तकनीकी सहयोग से अब वे 15-13 क्विंटल प्रति एकड़ अनाज उत्पन्न करने में सक्षम हैं। कछवा और आसपास के गांवों के अन्य किसान भी श्री ईशम सिंह के संपर्क में आए और सीएसआर 30 के बारे में जानकारियों का विस्तार किया।

कछवा गांव के ही एक युवा किसान श्री विक्रम सिंह ने भी लवणीय एवं सोडिक भूमि में अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए सीएसआर 30 को अपनाया। उनकी सफलता से उत्साहित होकर उनके परिवार ने इटारसी, मध्य प्रदेश के पास 30 एकड़ भूमि खरीदी, जहां वे अब सीएसआर 30 की खेती करते हैं। पहले वर्ष में उन्होंने लगभग 30 क्विंटल प्रति हैक्टर की उपज प्राप्त की, जबकि वर्तमान वर्ष उन्होंने 37 क्विंटल प्रति हैक्टर अनाज उत्पन्न किया। श्री विक्रम सिंह ने बताया कि सीएसआर 30 विभिन्न प्रकार की मृदओं और जलवायु परिस्थितियों के लिए अनुकूल है। यह एक नकदी किस्म है तथा दूसरी किस्मों की तुलना में इसकी बाजार मांग अधिक है। सीएसआर 30 के आनुवंशिक गुणों और बेहतर बाजार मांग ने इसे विविध कृषि पारिस्थितिकीय तंत्रों में लोकप्रिय बनाया साथ ही, कृषि क्षेत्र में विस्तार प्रणाली के माध्यम से यह लवण प्रभावित और सोडिक मिट्टी की सबसे लोकप्रिय चावल किस्म बनती जा रही है। सामान्य मिट्टी वाले क्षेत्रों में भी जहाँ लवणता और क्षारीयता संबंधी समस्याएं नहीं है, सीएसआर 30 बेहतर उपज दे रही है।

डॉ. एस.के. शर्मा, प्रमुख (फसल सुधार), सीएसएसआईआर, करनाल ने बताया कि सीएसआर 30 किस्म की खेती से प्राप्त उत्पादन से किसानों की आय में वृद्धि हुई है। हरियाणा राज्य बीज उत्पादन एवं विकास निगम, राष्ट्रीय बीज निगम तथा अन्य सरकारी और निजी बीज एजेंसियों ने भी अच्छी गुणवत्ता वाले बीजों के उत्पादन एवं आपूर्ति के माध्यम से उत्पादन क्षमता बढ़ाने में सहयोग किया है।

((हिन्दी प्रस्तुतिः एनएआईपी मास मीडिया परियोजना, कृषि ज्ञान प्रबंध निदेशालय, आईसीएआर)